स्वास्थ्य

होम आइसोलेशन के कोरोना मरीजों को दिये जाएंगे पल्स ऑक्सीमीटर

एसीएमओ डॉक्टर एसएन त्रिपाठी के साथ होम आइसोलेशन वाले मरीज के घर भ्रमण करती आरआरटी

गोरखपुर। घर पर रह कर (होम आइसोलेशन में) कोरोना का इलाज करवा रहे मरीजों को चिकित्सकीय आवश्यकतानुसार पल्स ऑक्सीमीटर भी दिया जाएगा। इस उपकरण से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर पता चल जाता है। इसके लिए कुल 1800 पल्स ऑक्सीमीटर मंगाए गए हैं।

यह जानकारी मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने दी है। उन्होंने बताया कि कोरोना मरीजों के घर मेडिकल किट भी भेजी जा रही है जिसमें एक सप्ताह की दवाइयां हैं। इसके आगे की दवा के लिए संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता का मोबाइल नंबर उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्र के सभी 22 शहरी स्वास्थ्य केंद्रों पर अब सिर्फ बुधवार और शुक्रवार को छोड़ कर बाकी सभी कार्यदिवसों पर कोरोना जांच की सुविधा उपलब्ध करा दी गयी है।

प्रयास है कि होम आइसोलेटेड सभी मरीजों को बेहतर सुविधाएं दी जाएं लेकिन अगर किसी प्रकार की कोई कमी रह जाती है तो कोरोना के लिए बने इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर को सूचना देकर सुविधाएं प्राप्त की जा सकती हैं।

मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि कंट्रोल रूम के नंबर 0551-2201796, 0551-2202205 और 0551-2204196 लगातार 24 घंटे क्रियाशील रहते हैं जिन पर सूचना देकर कोरोना मरीज सभी प्रकार की जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग भी जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन की निगरानी में चल रहे इस इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुसार मरीजों और उनके परिजनों को सहायता उपलब्ध करवा रहा है।

उन्होंने बताया कि ड्रिस्ट्रिक्ट कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर (डीसीपीएम) रिपुंजय पांडेय को दिशा-निर्देश है कि सुनिश्चित करें कि प्रत्येक आशा कार्यकर्ता संबंधित क्षेत्र के मरीजों तक अवश्य पहुंचे और सेवाओं का लाभ दें। आशा कार्यकर्ताओं की मदद के लिए रैपिड रिस्सांस टीम (आरआरटी) के तौर पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की मेडिकल टीम लगाई गई है। सभी आरआरटी की निगरानी अपर मुख्य चिकित्साधिकारी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं।

आशा कार्यकर्ता का करें सहयोग

डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय ने बताया कि आशा कार्यकर्ता प्राप्त सूचना के आधार पर कोरोना मरीजों के घर जा रही हैं और वहां अपना मोबाइल नंबर भी दे देती हैं। दवा की कमी होने पर या किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर इनसे सहयोग लिया जा सकता है। लोगों को चाहिए कि वह आशा कार्यकर्ता का सहयोग करें और उनके साथ अच्छा बर्ताव करें। अगर कोई शिकायत है तो उससे भी अवगत कराएं। होम आइसोलेशन के मरीजों के लिए इन कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम है।

फील्ड में आकर करते हैं सहयोग

आरआरटी (आरबीएसके) से जुड़े चिकित्सक डॉ. मनोज मिश्र, डॉ. अर्चना, स्टॉफ सरिता और गरिमा का कहना है कि प्रत्येक दिन कम से कम 10 मरीजों के घर जाना होता है। टीम के लौटने के बाद आशा कार्यकर्ता ही क्षेत्र में रह कर लोगों की मदद कर रही हैं। जहां आशा कार्यकर्ता को लोग सहयोग नहीं देते वहां आरआरटी खुद जाकर मरीज के परिजनों का काउंसिलिंग करती है। समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के उच्चाधिकारी भी क्षेत्र में आकर आशा और आरआरटी का सहयोग कर रहे हैं।

जांच से ही रूकेगा संक्रमण

डीसीपीएम का कहना है कि क्षेत्र से ऐसे फीडबैक मिल रहे हैं कि लोग लक्षण आने पर भी जांच कराने से पीछे हट रहे हैं और बीमारी को छिपाते हैं। इस प्रवृत्ति से संक्रमण की चेन नहीं टूट पाएगी। चरगांवा पीएचसी पर 24 घंटे कोरोना जांच की सुविधा, जबकि सभी अन्य सभी ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रत्येक कार्यदिवस में कोरोना जांच की व्यवस्था मौजूद है। जांच की प्रक्रिया व अन्य सुविधाओं के संबंध में लोग क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। सभी के सहयोग से ही संक्रमण की यह चेन तोड़ी जा सकेगी।

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