Thursday, December 8, 2022
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चौरी चौरा में हुए बवाल में तीन सपा नेताओं पर 25-25 हजार का इनाम घोषित, 13 गिरफ्तार 

गोरखपुर। चौरी चौरा के भोपा बाजार में 25 मार्च को हुए बवाल के मामले में बुधवार को चौरी चौरा के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को भी लाइन हाजिर कर दिया गया। इसके पहले झंगहा के इंस्पेक्टर का लाइन हाजिर किया गया था। इस मामले में कुल सात एफआईआर दर्ज की गई है जिसमें 56 नामजद और 200 अज्ञात हैं। अब तक एक पार्षद सहित 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मुख्य आरोपित तीन सपा नेताओं-मनुरोजन यादव, नरसिंह यादव और अरविंद यादव पर 25-25 हजार का इनाम भी घोषित किया है।

झंगहा क्षेत्र के राघवपट्टी पडरी के फैलाहा टोला निवासी सेना के जवान धनंजय यादव की मौत हो गई। वे सिक्किम में तैनात थे। परिजनों को 22 मार्च को धनंजय यादव के मौत की सूचना मिली।

मृतक धनन्जय यादव 2016 में सेना में भर्ती हुए थे।

धनन्जय यादव के पिता रामनाथ का कहना था कि बेटे की मौत की सूचना आर्मी के द्वारा नहीं दिया गया बल्कि उसके एक दोस्त ने दिया था। उन्होंने बताया कि धनन्जय से उनकी अंतिम बार मोबाइल पर रविवार की शाम 4.58 बजे हुई थी जिसमे उसने थोड़ी देर बाद बात करने की बात कहा। उसके बाद उससे उनकी बात नहीं हो सकी। मंगलवार की शाम 5.20 बजे उसके साथी ने बताया कि धनन्जय की मौत हो गयी है। इसकी पुष्टि के लिए रामनाथ ने आर्मी के सीओ से बात किया तो उन्होंने मौत की पुष्टि की और सिक्किम के गंगटोक पहुंचकर पोस्टमार्टम कराने को कहा। रामनाथ का आरोप है कि वहां पहुंचने पर उनको न्यूजलपाईगुड़ी ले जाया गया और एक अंग्रेजी में लिखे पेपर पर हस्ताक्षर कराकर शव को सौंप दिया गया। वहां से वह लोग प्राइवेट एम्बुलेंस से धनन्जय का शव लेकर शुक्रवार को घर पहुंचे।

धनंजय का शव 25 मार्च को पूर्वान्ह 11 बजे उनके गांव पहुंचा। उस समय परिजनों सहित गांव के लोग धनजंय यादव को शहीद का दर्जा देने, उनकी बहन को सरकारी नौकरी देने, परिजनों को 50 लाख का मुआवजा और शहीद स्मारक बनाने की मांग कर रहे थे। परिजन धनंजय की मौत की जांच की भी मांग कर रहे थे।

मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत चल रही थी कि कुछ लोग शहीद धनंजय का शव लेकर चौरीचौरा के भोपा बाजार पहुंच गए और रास्ता जाम कर धरना-प्रदर्शन करने लगे। धीरे-धीरे भोपा बाजार में भारी भीड़ एकत्र हो गयी।

रास्ता जाम की सूचना पर जिलाधिकारी विजय किरन आनंद मौके पर पहुंचे और उनकी धनंजय यादव के परिजनों और रास्ता जाम कर रहे प्रदर्शनकारियों से बातचीत हुई। बातचीत में धनंजय के पिता रामनाथ यादव शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने को तैयार हो गए लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने शव को उठाने से मना कर दिया। इस दौरान उन्होंने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ देर बाद पथराव शुरू हो गया। इस बीच पुलिस ने शव को ट्रक में रखने की कोशिश की तो पुलिस पर भी पथराव होने लगा। जवाब में पुलिस ने लाठी भांजी। लाठीचार्ज से भीड़ तितर-बितर हो गई लेकिन पथराव जारी रहा। लोगों को हटाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़े।

पथराव के दौरान एक बाइक को आग लगा दी गई। कई राहगीरों के वाहनों पर पथराव हुआ। पुलिस के वाहनों पर भी पथराव हुआ। एक पुलिस जीप को पलट दिया गया।

यह बवाल करीब सात घंटे तक चला। स्थिति को नियंत्रित करने के बाद सेना के जवान धनंजय का शव उनके गांव पहुंचाया गया और अगले दिन 26 मार्च को गोर्रा नदी के इटौवा घाट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

पुलिस ने भोपा बाजार में हुए बवाल में चार राहगीरों-अजय कुमार बरनवाल, विजय पांडेय, यू एस तिवारी, उमेश यादव व सूरत वर्मा के अलावा जीआरपी और चौरीचौरा इंस्पेेक्टर की तहरीर पर कुल सात एफआईआर दर्ज किए हैं। इनमें 56 नामजद और 200 अज्ञात लोगों के नाम दर्ज हैं। इनके खिलाफ हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश, सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिस पर हमला करने, तोड़फोड़, आगजनी, सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने के अलावा 7 क्रिमिनल लाॅ एमेंडमंेट एक्ट की धारा लगायी गयी है।

अब तक पुलिस ने 13 आरोपियों को गिरफतार किया है। पुलिस ने बवाल के लिए सपा नेता एवं जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं गीताजंलि यादव के पति मनुरोजन यादव, नरसिंह यादव और अरविंद यादव को मुख्य आरोपी मानते हुए उनके उपर 25-25 हजार का इनाम घोषित किया है।

उधर समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि मनुरोजन यादव सहित अन्य सपा नेताओं को राजनैतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। सपा जिलाध्यक्ष अवधेश यादव सहित सपा नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल 28 मार्च को डीएम से मिला और उन्हें ज्ञापन देकर कहा कि मुकदमें में वसीम अहमद, मुन्नीलाल एडवोकेट और बृजेश का नाम डाला गया है जो वहां थे ही नहीं। बजेश विकलांग हैं। मुन्नीलाल एडवोकेट घटना के दिन गोरखपुर में थे फिर भी उनका नाम केस में डाल दिया गया है। सपा नेताओं का कहना था कि इस आंदोलन का कोई राजनैतिक नेतृत्व नहीं था। शहीद का शव एम्बुलेंस से भेजे जाने के कारण लोग नाराज हो गए और नौजवानों ने आंदोलन शुरू कर दिया।

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