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बाढ़ में बहकर चकिया पहुंचे छह हिरण रेस्क्यू किए गए, हाइड्रिल कालोनी पहुंचे भालू को वापस जंगल भेजा गया

कुशीनगर। वाल्मीकिनगर वन क्षेत्र में मंगलवार को मोतिहारी प्रमंडल के चकिया वन क्षेत्र से रेस्क्यू किये गये छह हिरणों को वीटीआर के जंगलों में छोड़ दिया गया. ये हिरण नारायणी नदी की बाढ़ में चकिया पहुँच गए थे। वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व से सटे हाइड्रिल कालोनी में मंगलवार की रात एक भालू भी पहुँच गया था जिसे वनकर्मियों ने वापस जंगल में भगा दिया।

गंडक (नारायणी) नदी में पानी का डिस्चार्ज बढ़ने पर बाल्मीकि टाइगर रिजर्व  सहित दियारा क्षेत्रों में पानी का जमाव हो गया था. पानी में बहकर वन्यजीव खासकर हिरण दूसरे जिले बेतिया, मोतिहारी, गोपालगंज, चकिया आदि क्षेत्रों में पहुंच गये थे. जिन्हें वन प्रशासन द्वारा रेस्क्यू के बाद वीटीआर के जंगलों में छोड़े जाने की प्रक्रिया जारी है। चकिया क्षेत्र में भटक कर पहुंचे 6 हिरणों को वन कर्मियों ने रेस्क्यू के उपरांत वीटीआर के वाल्मीकिनगर वन प्रशासन को सुपुर्द कर दिया।

वन प्रमंडल दो के वाल्मीकिनगर वन क्षेत्र में तैनात वनपाल विजय पाठक ने बताया कि 6 हिरण को वन क्षेत्र में उनकी सुरक्षा और पोषण को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य जांच के उपरांत छोड़ दिया गया है।

वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष वन प्रमंडल दो वाल्मीकिनगर वन क्षेत्र से सटे रिहाइशी क्षेत्र में एक माह से एक भालू का जटाशंकर वन क्षेत्र से निकाल कर घूम रहा है। मंगलवार की रात एक भालू हाइड्रिल कॉलोनी में जा पहुंचा। भालू को देखकर कालोनी निवासी डर गये. यह भालू रोज रिहाइशी क्षेत्र में घूम रहा है। कॉलोनीवासियों की सूचना पर मौके पर पहुंचे वनकर्मियों ने शोर मचाकर भालू को वन क्षेत्र की तरफ खदेड़ दिया. वनपाल विजय कुमार पाठक ने बताया कि वन क्षेत्र से रिहाइशी क्षेत्र सटे हुए हैं।  इस कारण वन्यजीव भटक कर पहुंच जाते हैं. ग्रामीणों से अपील है कि वे सतर्क और सजग रहे।

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