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घटना के 55 दिन बाद सात में से तीन अभियुक्त ही हुए हैं गिरफ़्तार

देवरिया जिले के बरहज क्षेत्र के करजहां गांव का एक दलित परिवार 55 दिन से खौफ के साए में जी रहा है। इस परिवार के इंजीनियरिंग छात्र की 16 अप्रैल को हत्या कर दी गई। पुलिस अभी तक सात में से सिर्फ तीन अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर पाायी है। अभियुक्त लगतार पीड़ित परिवार को धमकी दे रहे हैं कि यदि उन्होंने बेटे की हत्या के केस में पैरवी बंद कर समझौता नहीं किया तो तो वे पूरे परिवार को जला कर मार डालेंगे। दहशत से यह परिवार घर से निकल तक नहीं पा रहा है।

करजहां गांव में 16 अप्रैल की शाम को दलित नौजवान 27 वर्षीय विश्वजीत की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। विश्वजीत मदन मोहन मालवीय प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर में एमटेक अंतिम वर्ष का छात्र था। उसके दादा की 16 अप्रैल को मृत्यु हो गई थी। उनके अंतिम संस्कार से लौटने के बाद वह घर पहुंचा था कि गांव के कुछ लड़के उसको बुलाकर घर से 200 मीटर दूर एक दुकान पर ले गए। वहां पहले से मोजूद आधा दर्जन से अधिक लोगों ने विश्वजीत पर हमला किया और उसे गोली मार दी। विश्वजीत पर लाठी-डंडे से भी प्रहार किया गया और उसका सिर कूकल दिया गया।  विश्वजीत की मौके पर ही मौत हो गयी।

विश्वजीत के पिता बुच्चु प्रसाद ने इस घटना की एफआईआर में सात लोगों-रबी यादव, अंशु यादव, जगदीश यादव, सुनील यादव, अरविन्द यादव, सोनू यादव, गोपाल यादव को नामजद किया है। इन लोगों के खिलाफ धारा भादवि की धारा 147,148,302,504 और एससी एसटी एक्ट की धारा 3 (1) द व 3 (1) ध के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। घटना के तीन दिन बाद सुनील यादव, अंशु यादव को पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त देशी पिस्टल व देशी तमंचा के साथ गिरफ़्तार किया। बाद में एक अन्य अभियुक्त को भी गिरफ़्तार किया गया। अन्य अभियुक्त अभी फरार हैं।

तहरीर में बुच्चु प्रसाद ने कहा है कि पुरानी रंजिश में इन लोगों ने विश्वतीत की गोली मारकर हत्या की। गोली चलने की आवाज सुनकर वह, उनकी पत्नी और बेटियां भागकर मौके पर पहुंचे तो देखा कि विश्वजीत को गोली मारने के बाद उसके सिर को कुचला जा रहा था। उन लोगों के पहुंचने के बाद अभियुक्त भागने लगे। भागते समय अभियुक्तों ने हम लोगों  की तरफ भी बंदूक ताना और मारने की धमकी दी।

बुच्चु प्रसाद स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। विश्वजीत उनका इकलौता बेटा था। उनकी दो बेटिया हैं। सभी को उन्होंने खूब पढाया लिखाया। विश्वजीत पढ़ने में काफी तेज था। उसने बरहज के किसान इंटर कालेज से इंटरमीडिएट करने के बाद बाराबंकी के एसआर इंस्टीच्यूट से बीटेक किया। दो वर्ष पूर्व उसका चयन मदन मोहन मालवीय प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय में एमटेक में हो गया। इस वर्ष वह फाइनल इयर में था।

बुच्चु प्रसाद के परिवार पर मुसीबत तब शुरू हुई जब पांच वर्ष पूर्व विश्वजीत का गांव के दूसरी विरादरी की एक लड़की से प्रेम हो गया। बाद में दोनों ने कोर्ट मैरेज कर लिया। इससे खफा लड़की के परिवार वालों ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी थी। उस समय भी बुच्चु प्रसाद पर बोलेरो चढ़ाकर जान से मारने की कोशिश की गई थी। परिजनों के दबाव में लड़की बाद में अपने घर वापस आ गयी थी और उसकी शादी कर दी गई। विश्वजीत पढ़ने के लिए गोरखपुर चला गया। इसके बाद कोई घटना न हुई। लगा कि सब कुछ ठीक हो गया है लेकिन ऐसा नहीं था। विश्वजीत और उनके घरवालों को सजा देने की साजिश होती रही। इस साजिश को 16 अप्रैल को विश्वजीत की हत्या कर अंजाम दिया गया।

बुुच्चु प्रसाद का कहना है कि अभियुक्त के घर वाले इस बात से रंजिश रख रहे थे कि दलित का बेटा इतना पढ़ लिखकर आगे कैसे बढ़ गया ?

विश्वजीत की हत्या की घटना के बाद से अभियुक्त के परिजन लगातार बुच्चु प्रसाद को धमका रहे हैं और परेशान कर रहे हैं। उनके घर आकर मोटर, साइकिल सहित कई सामान उठा ले गए हैं। दरवाजे पर आकर गाली देते हैं और पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देते हैं। बुच्चु प्रसाद का कहना है कि उन्हें आशंका है कि उन्हें पत्नी व बेटियों के साथ मार दिया जाएगा।

विश्वजीत की हत्या और उसके परिजनों को मिल रही धमकी के बारे में अम्बेडकर जन मोर्चा के मुख्य संयोजक श्रवण कुमार निराला ने पुलिस अधीक्षक देवरिया, डीआईजी गोरखपुर, अपर पुलिस महानिदेशक गोरखपुर, डीजीपी, गृह सचिव, डीएम देवरिया, कमिश्नर गोरखपुर, एससी एसटी आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अलावा राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। श्री निराला ने इस पत्र में कहा है कि होनहार इंजीनियरिंग छात्र की हत्या में स्थानीय पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। अभियुक्त विश्वजीत के परिजनों पर समझौता करने का दबाव बना रहे है और ऐसा नहीं करने पर जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। यह जानकारी दिए जाने के बाद भी पुलिस निष्क्रिय बनी हुई है। अभी तक सात में से सिर्फ तीन अभियुक्तों को ही गिरफ़्तार किया गया है।

उन्होंने कहा कि  पुलिस आखिर फरार अभियुक्तों के घर की कुर्की की कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है ? श्री निराला छह जून को पीडित परिवार के घर जाकर उनसे मिले और फिर उनके साथ देवरिया में पत्रकार वार्ता कर फरार अभियुक्तों की गिरफ़्तारी , पीड़ित परिवार की सुरक्षा और एक करोड़ की अर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन किया जाएगा।

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