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आदित्य हवेलिया की अण्डरवाटर फोटो प्रदर्शनी ‘ इनटू द ब्लू ’ कलास्रोत दीर्घा में प्रारम्भ

प्रदर्शनी में दिखा माॅरीशस, मलेशिया, अण्डमान, लक्षद्वीप की शार्क, आक्टोपस, स्टोनफिश आदि समुद्री जीवों का अद्भुत संसार 
लखनऊ। जलीय पर्यावरण के प्रति जागरूक करती आदित्य हवेलिया की अण्डर वाटर फोटोग्राफी प्रदर्शनी ‘इन टू द ब्लू’ 28 मार्च  सेे अलीगंज में शुरू हो गई।

क्यूरेटर प्रो.फरहत बशीर खान जामिया मिलिया इस्लामिया नई दिल्ली के मार्गदर्शन में प्रारम्भ समुद्री जीवों के रोचक व रोमांचक संसार को दर्शाती इस एकल फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.पी.सिंह ने किया। प्रदर्शनी दीर्घा में चार अप्रैल तक नित्य सुबह 11 से शाम सात बजे तक जारी रहेगी।

यहा प्रदर्शित 53 छायाचित्रों को क्यूरेटर प्रो.फरहत ने बड़ी मशक्कत से आदित्य के उतारे सैकड़ों छायाचित्रों में से शृंखलाबद्ध करते हुए इस प्रदर्शनी के लिए छांटा और गैलरी में प्रदर्शित कराया है।

लखनऊ एयरपोर्ट सहित दुनिया के वन्यजीवों पर अब तक चार एकल शो आयोजित कर चुके आदित्य हवेलिया के इस पहले अण्डर वाटर शों में मलेशिया के समुद्र की रीफ शार्क शार्क, हाॅर्न काउ फिश की झलक है तो जीवंत कोरल चट्टानों के साथ कराहती मृत मूंगा चट्टानें हमें कचरे से विषाक्त होते समुद्र के प्रति आगाह करती हैं। मारीशस क्षेत्र के हिन्द महासागर के भीतर उतारी स्टोनफिश, आक्टोपस, स्पाॅटेड स्टिंगरे की तस्वीरें अचम्भित करती हैं। अण्डमान के समुद्र की मूंगा चट्टानों के संग क्लाउन फिश और क्रोकोडायल फिश के साथ ही लक्षद्वीप के समुद्री कछुओं के चित्रों के संग ही नेतरानी कर्नाटक के चित्रों में मोरे ईल मछली व अन्य जलीय जीव हैं।

आदित्य हवेलिया ने एमिटी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक, जामिया-मिलिया- इस्लामिया (एमसीआरसी) नई दिल्ली से फोटोग्राफी में परास्नातक और प्रसिद्ध फिल्मकार सुभाष घई के ख्याति प्राप्त संस्थान विस्लिंग वुड्स इंटरनेशनल, मुंबई से सिनमेटोग्राफी में दक्षता प्राप्त की है।

मुंबई की अंडरवाटर फिल्म सर्विसेज के साथ भी काम कर चुके आदित्य को अंडरवाटर फोटोग्राफी की प्रेरणा श्याम बेनेगल की फोटोग्राफर्स टीम के स्वर्गीय राजन कोठारी से मिली। फीचर फिल्मों, धारावाहिकों, लघु प्रचार अभियान, मल्टी कैमरा शो के साथ ही विज्ञापन, वृत्तचित्र और म्यूजिक वीडियोज से जुडे़ रहे हैं और जामिया मिलिया दिल्ली में बतौर विजटिंग फैकेल्टी कार्यरत हैं।

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प्रदर्शनी देखने वाले दर्शकों के लिए यह जानने का मौका भी है कि अनेक खतरों से खेलते हुए समुद्र के भीतर किस तरह स्कूबा डाइव लगाकर विशिष्ट उपकरणों की सहायता से फोटोग्राफी की जाती है। मलेशिया से लगे सी आफ सिलैबस में तस्वीरें उतारते अण्डरवाटर फोटोग्राफी के लिए लाइसेंसधारी आदित्य का कुछ मिनटों का एक वीडियो भी प्रोजेक्टर की सहायता से दीर्घा में दर्शकों के लिए बराबर प्रदर्शित किया जा रहा है।
अफ्रीकी और भारतीय जंगलों में वन्यजीवों के दुर्लभ क्षणों को कैद करके अपनी पिछली प्रदर्शनियों में लोगों के सामने रख चुके फोटोग्राफर आदित्य ने प्रदर्शनी की तस्वीरों को मारीशस से लगे हिन्द महासागर, मलेशिया से लगे सी आफ सिलैबस के साथ ही लक्षदीप, अण्डमान नीकोबार और नेतरानी कर्नाटक के मुरुडेश्वर द्वीप में पानी के भीतर के जीवन और सौंदर्य को उतारा है। लाइसंेसधारी फोटोग्राफर को 30 मीटर गहराई तक जाने की इजाज़त होती है। बेहतर तस्वीर और शानदार नतीजों के लिए कैमरों में मैक्रो लेंस, वाइड लेंस, फिश आई लेंस जैसे खास लेंसों और सहायक उपकरणों के साथ जीवों के 12 इंच पास तक जाना पड़ता है। इस अवसर पर कलास्रोत के अनुराग डिडवानिया, सहयोगी कंपनी ओलम्पस के प्रतिनिधि, फोटोग्राफर अनिल रिसाल सिंह, रवि कपूर, ललित कला अकादमी के सचिव यशवंत सिंह राठौर, एडवोकेट बाबू रामजी दास व उ.प्र.ओलम्पिक संघ के उपाध्यक्ष टी.पी.हवेलिया, संयोजक मनोज सिंह चंदेल व बड़ी तादाद में कलाप्रेमी उपस्थित थे।

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