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घायल मोहम्मद आवेस
घायल मोहम्मद आवेस

आवेस को अधमरा करने वालों की अब तक गिरफ्तारी न होना पुलिस का आपराधिक रवैया-रिहाई मंच

रिहाई मंच ने मड़ियांव निवासी मुहम्मद आवेस से मुलाकात की, आवेस पर हुआ था  हिंसक हमला

लखनऊ 22 जुलाई.  रिहाई मंच के प्रतिनिधिमंडल ने बलरामपुर अस्पताल में मड़ियांव निवासी हाफिज मुहम्मद आवेस से मुलाक़ात की. प्रतिनिधिमंडल में रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव, सृजनयोगी आदियोग, जियाउद्दीन और मुदस्सिर शामिल थे.

हाफिज मुहम्मद आवेस पर शुक्रवार को हिंसक हमला हुआ था.

रिहाई मंच प्रतिनिधिमंडल जब हाफिज मुहम्मद आवेस से मुलाक़ात के लिए अस्पताल पहुँचा तो वे बेड पर पड़े थे. असह्य पीड़ा की वजह से कुछ बोलने की ज्यादा स्थिति में नहीं थे. दर्द इतना ज्यादा था कि कुछ पूछने पर उनकी कराह निकलती है और चक्कर आ जाता है. पीड़ित के बड़े भाई मो0 नफीस ने बताया कि कल उनके बाएं टूटे हाथ का आपरेशन है उसमें रॉड पड़ेगी. सिर में 9 से 10 सेंटीमीटर के घाव और बाएं कान के नीचे गहरे जख्म की बात बताई.

रिहाई मंच प्रतिनिधिमंडल को मो0 नफीस ने बताया कि गुरुवार की रात साढ़े 9 बजे के करीब जब उनके बहनोई नौबस्ता खुर्द रामलीला मैदान की तरफ आ रहे थे तो सात -आठ लोग चौरसिया पान भंडार के पास रास्ते पर खड़े थे तो उन्होंने निकलने के लिए जगह मांगी तो वे सब उनको धमकाते हुए मारने लगे. इसके बाद वो वहाँ से भागकर पास में ही डॉ सुनील की क्लिनिक पर पहुँचे, जहाँ जावेद का उपचार चल रहा था. उसके बाद जावेद जब उन लोगों से फिर पूछने आया कि क्यों उनके बहनोई के साथ मारपीट की तो वे लोग फिर उन दोनों को मारने लगे. बातों में उन्होंने बताया कि चौरसिया पान भंडार ऐसे अराजक तत्त्वों का केंद्र है जहाँ ये लोग शराब-गांजा के नशे में धुत रहते हैं और अक्सरहां मारपीट करते हैं.

रिहाई मंच को पीड़ितों के परिजन बताते हैं कि इसके बाद 10-12 लोग आकर उनके घर पर अध्धा-गुम्मा चलाते हुए साम्प्रदायिक गालियां देने लगे जिस पर आवेस के घर वालों ने 100 नंबर पर फ़ोन किया. थोड़ी देर में पुलिस तकरीबन साढ़े 12 बजे के करीब आई तब तक वे भाग चुके थे. उसके बाद पुलिस ने चौरसिया पान भंडार और उनके बीच बात कराकर मामले को रफा-दफा करवा दिया. वे बताते हैं कि वे अभी इस सदमें से उबर ही रहे थे कि रात डेढ़ बजे के करीब फिर से 60-70 की तादाद में लोग घर पर अध्धा-गुम्मा फेकने लगे और साम्प्रदायिक गालियां देने लगे. इस पर जब फिर हम लोगों ने 100 नंबर पर फ़ोन किया तो पुलिस ने कहा कि आकर कंप्लेन लिखवाइए. इस पर हम लोगों ने कहा कि इतनी भीड़ घेरी है. कैसे आ सकते हैं हमारे पूरे परिवार की जान आफत में है आप बचाइए तो उन्होंने कहा कि वे उनको थोड़े उठा के ले जाकर कंप्लेन करवाएंगे और वे नहीं आए. इसके बाद इस डर-दहशत के माहौल में किसी तरह वहाँ से घर के सभी पुरुष निकल गए. बाद में मालूम चला कि पुलिस ढाई बजे के करीब आई और पूछने लगी तो महिलाओं ने कहा कि कोई पुरुष घर पर नहीं है.

पुलिस की गैरजिम्मेदारी और पीड़ितों में उसकी अविश्वसनीयता को इस बात से समझा जा सकता है कि परिजन कहते हैं कि जब रात पुलिस उनको बुला रही थी तो विरोधी पक्ष के 20-25 वकील थाने के अंदर और 30-40 लोग बाहर हमारा इंतज़ार कर रहे थे कि जैसे हम लोग थाने पहुँचे वे हमको अपना निशाना बना सकें. जावेद के खिलाफ एफआईआर होना इस बात की पुष्टि करता है कि विरोधी पक्ष जो उनके घर पर अध्धा-गुम्मा चला रहा था और साम्प्रदायिक गालियां दे रहा था वो इतना सक्रिय हो गया था कि खुद हमला कर खुद एफआईआर करने भी पहुँच गया. जो बताता है कि अब तक इस मामले में कुछ शातिर दिमाग वाले लोग लग गए थे.

रिहाई मंच के प्रतिनिधि मंडल ने पीड़ित से मुलाकात की

रिहाई मंच के प्रतिनिधि मंडल ने पीड़ित से मुलाकात की

रात के वाक़ये के बात आवेस ने सुबह 6 बजे के तकरीबन अपनी दुकान खोली और 8 बजे भाई नावेद के आने के बाद पास में अपने घर चला आया. 11 बजे के करीब घर से तकरीबन साठ हजार रुपये लेकर यहियागंज में बाजार करने लिए निकलते हुए दुकान पर आया. इसी बीच 12 बजे के तकरीबन 40-50 की भीड़ ने दुकान पर हमला किया और बुरी तरह से मारा-पीटा और दुकान में लूटपाट करते हुए तकरीबन साठ हज़ार रुपए भी ले गए. जिसकी एफआईआर भी दर्ज करवाई गई जिस पर पुलिस ने कोई करवाई नहीं कि और उल्टे रात में मुजरिमों को पहचानने के नाम पर जावेद को ले जाकर बंद कर दिया.

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि जिस तरह से आवेस पर हिंसक हमला हुआ और उससे पहले पान की दुकान पर रास्ते से निकलने को लेकर कुछ लंपट तत्त्वों द्वारा मारपीट हुई और जिसके बाद आवेस के घर पर दो-दो बार चढ़कर अध्धा-गुम्मा चलाते हुए साम्प्रदायिक गालियां दी गईं ऐसे में ये मामला बहुत गंभीर है. पुलिस की निष्क्रियता का अंदाजा एफआईआर में दर्ज थाने और घटना स्थल की दूरी से लगाया जा सकता है जो मात्र 1.5 किमी है. दोनों समुदायों की समझ-बूझ ने मामले को नियंत्रित कर दिया. पर पुलिस की भूमिका इस मामले में बहुत गंभीर है उसने रात में जहाँ आवेस का घिर जाने के बाद उन्हें बचाने नहीं आई वहीं जावेद के ऊपर एफआईआर कर उसे मुजरिम की शिनाख्त के बहाने थाने बुलाकर जेल भेज दिया पर दूसरे पक्ष ने जिसने दो-दो बार रात में पीड़ित के परिजनों को रास्ते मे मारा और घर पर चढ़कर हमला किया उन तत्वों के खिलाफ पुलीस की कार्रवाई न होना उसकी साम्प्रदायिक भूमिका पर सवाल उठाता है.

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