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ख्वाजा गरीब नवाज के मोहब्बत व अमन का पैगाम घर-घर पहुंचाया जाए

-‘जश्न-ए-ख्वाजा गरीब नवाज’ कार्यक्रम का दूसरा दिन

गोरखपुर, 21 मार्च। नार्मल स्थित दरगाह  हजरत मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमां पर महान सूफी संत हजरत मोईनुद्दीन चिश्ती अलैहिर्रहमां (ख्वाजा गरीब नवाज) के 806वें उर्स-ए-पाक के मौके पर ‘छह दिवसीय जश्न-ए-ख्वाजा गरीब नवाज’ कार्यक्रम मंगलवार से दोपहर की नमाज के बाद आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का समापन रविवार 25 मार्च को होगा।

कार्यक्रम के दूसरे दिन बुधवार को कारी शराफत हुसैन कादरी ने हजरत मोईनुद्दीन चिश्ती अलैहिर्रहमां (ख्वाजा गरीब नवाज) के बचपन व तालीम हासिल करने के वाकियात पर रोशनी डाली।

उन्होंने बताया कि आपका नाम मोइनुद्दीन हसन और लकब हिन्दल वली, गरीब नवाज है। आप 537 हिजरी को खुरासान में पैदा हुए। आपका देहांत 6 रजब 633 हिजरी को अजमेर शरीफ में हुआ। आपके पिता का नाम सैयद गयासुद्दीन हसन व मां का नाम बीबी उम्मुलवरा (माहे नूर) था। आपकी शुरुआती तालीम घर पर ही हुई। यहां तक कि 9 साल की उम्र में आपने पूरा क़ुरआन हिफ्ज़ (याद) कर लिया। 14 साल की उम्र में पिता का साया सर से उठ गया और इसके कुछ माह बाद ही मां का भी साया सर से उठ गया। पिता की तरफ से आपको विरासत में एक पनचक्की और एक बाग़ मिला। जिससे आपकी गुज़र बसर होती थी। एक दिन आपके बाग में एक दरवेश हज़रत इब्राहीम कन्दोज़ी आए गरीब नवाज़ ने उन्हें अंगूर का एक गुच्छा तोड़कर दिया। हज़रत इब्राहीम गरीब नवाज़ को देखकर समझ गए कि इन्हें बस एक रहनुमा की तलाश है। जो आज एक बाग़ को सींच रहा है कल वो लाखों के ईमान की हिफाज़त करेगा। आपने फल का टुकड़ा चबाकर गरीब नवाज़ को दे दिया। जैसे ही गरीब नवाज़ ने उसे खाया तो दिल की दुनिया ही बदल गयी। हज़रत इब्राहीम तो चले गए मगर दीन का जज़्बा ग़ालिब आ चुका था। आपने बाग़ को बेचकर गरीबो में पैसा बांट दिया। खुरासान से समरक़न्द फिर बुखारा, इराक पहुंचे और अपनी तालीम मुकम्मल की। गरीब नवाज ने मशहूर आलिम मौलाना हिसामुद्दीन अलैहिर्रहमां से काफी इल्म हासिल किया। आप बीस साल तक पीर-ए-तरीकत हजरत ख्वाजा शेख उस्मान हारूनी अलैहिर्रहमां की खिदमत में रहे और फैजयाब हुए।

मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज के 806वें उर्स-ए-पाक के मौके पर उनकी बारगाह में अकीदत का नजराना यही होगा कि हम उनकी शिक्षाओं पर चल कर हमारे देश से हिंसा, नफरत, घृणा और अज्ञानता के अंधेरे को दूर करें और मोहब्बत व अमन का पैगाम घर-घर पहुंचाएं।

इस मौके पर कारी महबूब रजा, सैयद कबीर अहमद, हाजी कमरुद्दीन, हाजी ईशा मोहम्मद, जमशेद अहमद, सुब्हानल्लाह, आफताब अहमद, डा. शाह आलम, शहाब, सद्दाम हुसैन सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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