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गरीब बच्चों का एडमिशन नहीं लेने पर 3 निजी स्कूलों की मान्यता रद्द करने के लिए डीआईओएस ने सीबीएसई बोर्ड को लिखा पत्र

सैयद फरहान अहमद

गोरखपुर, 15 अगस्त।  शिक्षा अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों का दाखिला लेने से इंकार करने पर  जिला विद्यालय निरीक्षक एएन मौर्या ने गोरखपुर शहर के तीन प्रमुख निजी स्कूलों की मान्यता रद करने के लिए केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड इलाहाबाद को पत्र लिखा है।

जिला विद्यालय निरीक्षक एएन मौर्या ने 23 जुलाई को लिखे पत्र में कहा है कि  अनिवार्य  शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009  की धारा 12(1) के तहत पिलर्स पब्लिक स्कूल सिविल लाइन को 10, जीएन नेशनल पब्लिक स्कूल गोरखनाथ को 16, एचपी पब्लिक स्कूल सिविल लाइन को 12 गरीब बच्चों का दाखिला लेने के लिए कहा गया था लेकिन तीनों स्कूलों ने बच्चों का दाखिला लेने से इंकार कर दिया। जिन बच्चों का एडमिशन लेने को कहा गया था वे  16 मई जारी पहकी सूची में थे। सूची के साथ जिला विद्यालय निरीक्षक व बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा आदेश निर्गत जारी किया गया कि था कि तीन कार्य दिवस के अर्न्तगत एडमिशन लिया जाय  लेकिन ढ़ाई  माह  हो गया उक्त तीनों स्कूलों में 38 बच्चों का एडमिशन नहीं हो पाया।
शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009  की धारा 12(1) (ग)  अलाभित समूह एवं दुर्बल वर्ग के बच्चों को कान्वेंट की शिक्षा दिए जाने का उल्लेख करती है। कान्वेंट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें दुर्बल समूहों के बच्चों के लिए आरक्षित है। सारा खर्चा सरकार द्वारा उठाये जाने का प्राविधान है।
पिछले दिनों बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा इस बाबत आवेदन मांगे गए। डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी जिसमें जिला विद्यालय निरीक्षक व बेसिक शिक्षा अधिकारी शमिल है, ने प्रथम चरण में 554 बच्चों का चयन कान्वेंट स्कूलों के लिए किया। इसमें 21 सीबीएसई व 81 बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालय शामिल है। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विद्यालयों से तो शिकायत नहीं मिली बल्कि सीबीएसई बोर्ड द्वारा संचालित कुछ कान्वेंट स्कूलों ने प्रवेश लेने से साफ इंकार कर कर दिया।

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