साहित्य - संस्कृति

‘ गोरखपुर में प्रेमचन्द: शताब्दी स्मरण ’ का दूसरा चरण 18 सितम्बर से

18 सितम्बर को अपने जीवन पर प्रेमचन्द की कहानियों के प्रभाव के बारे में बात करेंगे साहित्यकार व साहित्य प्रेमी
 10 अक्तूबर को प्रो गोपाल प्रधान को होगा व्याख्यान
स्कूलों के बच्चे बनाएंगे प्रेमचन्द की कहानियों पर चित्र 
गोरखपुर, 29 अगस्त। ‘ गोरखपुर में प्रेमचन्द: शताब्दी स्मरण ’ कार्यक्रमों की श्रृंखला के अगले चरण में स्कूलों में प्रेमचन्द के कहानियों पर चित्र बनाने के साथ-साथ व्याख्यान, गोष्ठी व सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। यह निर्णय 28 अगस्त को प्रेमचन्द पार्क में प्रेमचन्द साहित्य संस्थान, अलख कला समूह, गोरखपुर फिल्म सोसाइटी की संयुक्त बैठक में लिया गया।
बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए गोरखपुर में प्रेमचन्द: शताब्दी स्मरण कार्यक्रम के संयोजक अशोक चौधरी ने बताया कि सितम्बर माह के दूसरे चरण में गोरखपुर के स्कूलों में प्रेमचन्द की कहानियों पर चित्र बनाने का कार्यक्रम होगा। छात्र-छात्राओं द्वारा बनाए गए चित्रों को प्रेमचन्द पार्क में प्रदर्शित किया जाएगा और चित्र बनाने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इसके बाद 18 सितम्बर को अपरान्ह चार बजे ‘ प्रेमचन्द की कहानियों का मेरे जीवन पर प्रभाव ’ विषय पर संवाद का कार्यक्रम होगा जिसमें साहित्यकार और साहित्य प्रेमी अपने जीवन पर प्रेमचन्द की कहानियों के प्रभाव के बारे में बात करेंगे।
श्री चौधरी ने बताया कि 10 अक्तूबर को प्रेमचन्द के साहित्य पर दिल्ली के अम्बेडकर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर गोपाल प्रधान व्याख्यान देंगें। पांच नवम्बर को तीन पीढि़यों के कवियों का एक साथ कविता पाठ का आयोजन है जबकि पांच दिसम्बर को प्रेमचंद पर एक सेमिनार होगा। बैठक में प्रेमचन्द साहित्य संस्थान के सचिव मनोज कुमार सिंह, डा. चन्द्रभूषण अंकुर, वरिष्ठ कवि प्रमोद कुमार, फिल्मकार प्रदीप सुविज्ञ, जन संस्कृति मंच गोरखपुर के अध्यक्ष जगदीश लाल श्रीवास्तव, अरूण प्रकाश पाठक, राजेश साहनी, श्रीराम, डा. संजय आर्य, श्याम मिलन एडवोकेट, सुजीत श्रीवास्तव सोनू, सुरेश सिंह, देश बंधु, धर्मेन्द्र नारायण दूबे, बैजनाथ मिश्र, डा मुमताज खान, राधा, ज्योति, नितेन अग्रवाल, ओंकार सिंह, पवन कुमार आदि उपस्थित थे।

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