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जंगे आज़ादी में मुसलमानों ने बड़ी कुर्बानी दी है , उन्हें संदेह से देखना दुर्भाग्यपूर्ण-राजेंद्र सच्चर

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सग़ीर ए खाकसार, वरिष्ठ पत्रकार
लखनऊ, 1 फरवरी। जंगे आज़ादी में मुसलमानों ने अपना खून बहाया था। बड़ी- बड़ी कुर्बानियां दी थीं। लंबे संघर्ष के बाद तब जाकर आज़ादी नसीब हुई लेकिन हैरत की बात है जिन मुसलमानों के पूर्वजों ने जंगे आज़ादी में कुर्बानियां दी आज उन्ही से बात-बात पर अपनी राष्ट्रीयता साबित करने के लिए कहा जा रहा है। उन्हें संदेह के नज़रिए से देखा जा रहा है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
यह विचार पूर्व जज और सच्चर कमिटी के चेयरमैन राजेंद्र सच्चर ने व्यक्त किया। श्री सच्चर राय उमा नाथ बली सभागार में सैयद शाहनवाज अहमद कादरी की किताब  “लहू बोलता भी है” के विमोचन के मौके पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।श्री सच्चर ने आगे कहा कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान को एक साथ रहने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। कोई किसी को किसी भी कीमत पर मिटा नहीं सकता। न पाकिस्तान हिंदुस्तान को खत्म कर सकता है और न हिंदुस्तान  पाकिस्तान को। दोनों को साथ रहना है। इसी में दोनों की भलाई है।

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इस कार्यक्रम का आयोजन लोकबंधु के लोग संस्था द्वारा रविवार को किया गया था। उन्होंने कहा कि सच्चर कमिटी की रिपोर्ट में यह बात साफ हो गई है कि देश के मुसलमानों की हालत दलितों से बदतर है। वह सामाजिक,आर्थिक और शैक्षणिक स्तर पर पिछड़ा है। सरकारी नौकरियों में भागीदारी न के बराबर है।शांति के अग्रदूत महामानव महात्मा गांधी हिन्दू और मुस्लिम एकता के ज़बरदस्त पैरोकार थे। उन्हें मालूम था देश की मजबूती के लिए यह एकता कितनी अहम् है।इसलिए गांधी ने कहा था कि हिंदू-मुस्लिम भारत मां की दो आंखें हैं, एक में चोट लगी तो अंधे हो जाएंगे ।लेकिन बड़े अफ़सोस की बात है कुछ लोग उनकी कहीं बातों को भुला बैठे हैं। यही नहीं आज गांधी जी को मारने वाले की आरएसएस के नाम पर स्मारक बनाने की बात की जा रही है। अशफाक उल्ला और बिस्मिल की दोस्ती हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल थी। हमें नफरतों मिटाकर एकजुट होना होगा।साम्प्रदायिकता के खिलाफ उठ खड़ा होना होगा। तभी देश के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

इस मौके पर अपने विचार ब्यक्त करते हुए शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि सरकार और राजनैतिक पार्टियों ने मुसलमानों को उनको अधिकारों से वंचित रखा। उन्हें यह कत्तई हक नहीं है कि वो मुसलमानों की देशभक्ति पर शक करें।हम अपने वतन से बेपनाह मुहब्बत करते हैं। हमें किसी के सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं।

कार्यक्रम में अतिथियों ने लेखक सैयद शाहनवाज अहमद कादरी की जंग-ए-आजादी-ए-हिंद के मुस्लिम किरदार पर केंद्रित पुस्तक ‘लहू बोलता भी है’ का विमोचन किया। पुस्तक में मुस्लिम स्वतंत्रा सेनानियों की वीर गाथा का उल्लेख किया गया है।मुस्लिम क्रांतिकारियों की कुर्बानियों को ठीक ढंग से दर्शाया गया है। पुस्तक में इतिहास के पन्नों से गायब हो चुके 1200 मुस्लिम क्रांतिकारियों की कुर्बानियों का भी जिक्र किया गया है। इस मौके पर लेखक सैयद नसीर अहमद को लोकबंधु सम्मान से भी नवाजा गया। उन्होंने कहा कि इतिहास के पन्नों में गुम हो चुके मुस्लिम क्रांतिकारियों को फिर से वापस लाकर देश को उनका बलिदान याद दिलाना होगा। यह तभी संभव होगा जब उनको साहित्य में शामिल किया जाए। कार्यक्रम में राजेंद्र सच्चर ने क्रांतिकारी अशफाक उल्लाह के पौत्र शादाब उल्लाह को सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद मौलाना ओबैदुल्लाह खान ने की और सोशलिस्ट लीडर रघु ठाकुर, लेखक शफी अहमद व प्रो. राजकुमार जैन, प्रो. शकील शमदानी समेत अन्य कई वक्ताओं ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।⁠⁠⁠⁠

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