जमुना निषाद और उनके परिवार से चार बार हो चुकी है योगी आदित्यनाथ की चुनावी टक्कर

-गोरखपुर लोकसभा सीट उपचुनाव

गोरखपुर, 12 फरवरी। सीएम योगी आदित्यनाथ पांच बार (2014/2009/2004/1999/1998) गोरखपुर लोकसभा से सांसद रहे हैं। चार बार उनका मुकाबला जमुना प्रसाद निषाद और उनके परिवार  से तो एक बार पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी से हुआ।

वर्ष 1998 में भाजपा ने पहली बार योगी आदित्यनाथ को टिकट दिया तो उनका कड़ा मुकाबला सपा के टिकट पर लड़े जमुना प्रसाद निषाद से हुआ। जीत-हार का अंतर महज 26206 रहा। इसके अगले साल वर्ष 1999 में दोबारा चुनाव हुआ तो योगी आदित्यनाथ को जमुना प्रसाद निषाद ने और भी कड़ी टक्कर दी और जीत हार का अंतर महज 7339 पर सिमट गया। वर्ष 2004 के चुनाव में फिर योगी आदित्यनाथ का मुकाबला जमुना प्रसाद निषाद से हुआ लेकिन जीत हार का अंतर बढ़कर 142039 पर पहुंच गया। यहीं से योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ता गया। कट्टर हिन्दुत्व की छवि ने उन्हें रिकार्ड मतों से जीत दिलानी शुरू कर दी। वर्ष 2009 के आम चुनाव में उनका मुकाबला पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के पुत्र (वर्तमान में चिल्लूपार से विधायक) विनय शंकर तिवारी से हुआ. इस बार योगी आदित्यनाथ का जीत का अंतर और बढ़ गया. वह 220271 मतों से जीते.  वर्ष 2014 में एक बार फिर योगी आदित्यनाथ का मुकाबला जमुना प्रसाद निषाद की पत्नी राजमति निषाद से हुआ। जिसमें योगी आदित्यनाथ ने उन्हें रिकार्ड 312783 मतों से शिकस्त दी।

इस बार देखना दिलचस्प होगा कि क्या सपा फिर जमुना प्रसाद निषाद के परिवार पर दांव आजमाती है या किसी दूसरे को चुनती है। रामभुआल निषाद भी सपा से टिकट के दावेदार है। वर्ष 2014 में सपा से राजमति निषाद व बसपा से रामभुआल निषाद चुनाव लड़ चुके है और क्रमश: दूसरा व तीसरा स्थान हासिल किया है। रामभुआल इस समय सपा में है। वह पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके है। पिपराइच व गोरखपुर ग्रामीण में निषाद मतदाताओं की बहुलता है। बसपा ने चुनाव न लड़ने का संकेत दिया है। इस क्षेत्र में निषाद, मुस्लिम, ब्राहमण, राजपूत, यादव, सैंथवार, वैश्य व भूमिहर मतदाता ठीक-ठाक तादाद में है।

सपा के लिए निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद थोड़ी परेशानी बन सकते है। उनमें निषाद मतों में सेंध लगाने की क्षमता है। चर्चा है कि डा. संजय निषाद को भी सपा टिकट दे सकती है बशर्तें की वह सपा के सिंबल पर चुनाव लड़े। पिछले विधानसभा चुनाव में गोरखपुर ग्रामीण से उन्होंने चुनाव लड़ा था और तीस हजार से अधिक मत पाकर सपा की जीत में रोड़ा बन गए थे। सपा अबकी चुनाव में ऐसा कोई रोड़ा नहीं चाहती है इसलिए उन्हें मैनेज किए जाने की संभावना है।

कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों में भाजपा को टक्कर देने की स्थिति नहीं लगती। संभावित सूची के अष्टभुजा वर्ष 2014 में चुनाव लड़ भी चुके है और कांग्रेस की जमानत भी जब्त करवा चुके है।

अबकी तो गैर भाजपा दलों के सामने योगी आदित्यनाथ नहीं है लेकिन सीएम योगी की प्रतिष्ठा दांव पर जरूर लगी हुई है। भाजपा साधना सिंह, स्वामी चिन्मयानंद, उपेंद्र दत्त शुक्ल, संतराज यादव व धर्मेंद्र सिंह में से किसी पर दांव आजमा सकती है।

वर्ष 2014 में योगी आदित्यनाथ के सामने 14 उम्मीदवार थे जिसमें सपा व बसपा के निषाद उम्मीदवारों के सिवा किसी की जमानत भी नहीं बची थी। भाजपा के योगी आदित्यनाथ ने 538604, सपा की  राजमति निषाद ने 226216, बसपा के रामभुआल निषाद ने 176277 व कांग्रेस के अष्टभुजा प्रसाद त्रिपाठी ने 45693 मत हासिल किए थे। नोटा के तहत 8149 मत पड़े थे।

विभिन्न दलों के संभावित उम्मीदवार

भाजपा – साधना सिंह, स्वामी चिन्मयानंद, उपेंद्र दत्त शुक्ल, संतराज यादव, धर्मेंद्र सिंह

कांग्रेस – सिद्धार्थ प्रिय श्रीवास्तव, अष्टभुजा त्रिपाठी, रामनाथ निषाद, राजेंद्र प्रसाद यादव, डा. पीएन भट्ट

सपा- राजमति निषाद, रामभुआल निषाद

पीस-निषाद पार्टी – डा. संजय निषाद

हिन्दू महासभा – चक्रपाणी महराज

नामांकन – 13 फरवरी 2018
चुनाव – 11 मार्च 2018
परिणाम – 14 मार्च 2018

कुल मतदाता – 1949178
पुरूष – 1072003
स्त्री – 877018
अन्य – 157
मतदान केंद्र – 967
मतदेय स्थल – 2141

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