विचार

तिरंगा यात्रा निकालने वाले सबसे पहले आरएसएस हेडक्वार्टर पर तिरंगा फहराएं : अतुल कुमार अंजान

 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व एमएलसी स्व. नागेन्द्र नाथ सिंह की चौथी पुण्यतिथि पर ‘ साम्प्रदायिक सौहार्द एवं वर्तमान राष्ट्रीय परिदृश्य ‘ पर व्याख्यान 

संविधान की हिफाजत के लिए वामपंथी और समाजवादी साथ आयें 

सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए 7 वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित किया गया 
गोरखपुर, 25 अगस्त। सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजान ने कहा है कि देश एकता के सूत्र में तभी बंधेगा जब संविधान की हिफाजत के साथ फिरकापरस्ती खत्म होगी। आज देश का संविधान व सीमायें खतरे में है। संविधान की हिफाजत होगी तो लोकतंत्र की रक्षा स्वयं हो जायेगी। धर्म, जाति और पूंजी की राजनीति ने हमारे राष्ट्र की आजादी की शहादत परंपराओं की गौरव गाथा को भुला देने का कार्य किया है। देश की आाजादी में सब साथ लड़े थे। यह देश जितना हिंदू का है उतना ही मुसलमान, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी का भी है।

श्री अंजान गुरूवार को गोरखपुर क्लब में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व एमएलसी स्व. नागेन्द्र नाथ सिंह की चौथी पुण्यतिथि पर ‘ साम्प्रदायिक सौहार्द एवं वर्तमान राष्ट्रीय परिदृश्य ‘ पर व्याख्यान दे रहे थे।

उन्होने कहा कि जो लोग आज देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने कि बात कर रहे हैं मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि क्या इससे से महंगाई, बेगारी, गरीबी खत्म हो जाएगी? क्या महिलाओं पर अत्याचार नब्द हो जाएगा ? क्या हर एक को काम मिल जायेगा?  सभी कच्चे मकान पक्के हो जाएंगे ? क्या सभी एक सूत्र में बंध जायेंगे ? धर्म के आधार पर पाकिस्तान बना। क्या वहां पर खुशहाली आ गयी ? भाकपा नेता ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग आज तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं उन्हें सबसे पहले नागपुर के आरएसएस हेडक्वार्टर पर तिरंगा झंडा फहराना चाहिये।
उन्होंने कहा कि जब केंद्र में अटल जी की सरकार थी तो संविधान पर विचार करने कि बात उठाई गयी। आज वही लोग एक बार फिर सत्ता में आने के बाद संविधान बदलना चाहते है। जब-जब भाजपा की सरकार आयी है संविधान व सीमाओं पर संकट खड़ा हुआ है। सीमाओं की ऐसी असुरक्षा होती कि बड़ी लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ती है। बाजपेयी जब पीएम थे कारगिल और द्रास सेक्टर में हमारी सीमाओं के अंदर कई किलोमीटर तक पाक की फौज घुस आई।  भारत सरकार व जम्मू कश्मीर सरकार को पता तक नहीं चला। एक चारवाहे ने बताया कि पाक सैनिक हमारी सीमाओं में घुस आये है तब जाकर भारत सरकार चेती और तब जाकर कारगिल का युद्ध हुआ जिसमें 926 जवान शहीद हुए।
आज उस लापरवाही को शौर्य दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। आज भी भाजपा
की सरकार आ गयी। 48 दिनों से जम्मू कश्मीर में कर्फ़्यू लगा हैं। 60 से ज्यादा लोग मारे गए है। देश के गृहमंत्री जब वहां जाते है तो फिर फसाद हो जाता है। इससे पहले तो कभी ऐसे हालात नहीं थे। इन दो सालों के बीच में पाकिस्तान, आईएसआईएस का झंडा कई बार लहराया गया।  68 साल की आजादी में ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ। यह विषय चिंता का है लेकिन केंद्र सरकार को कोई चिंता नहीं।

उन्होने तंज़ करते हुए कहा कि बंद गले का काला कोट पहन लेने से हर कोई डा. भीमराव अम्बेडकर नहीं हो जाता है और चूड़ीदार पायजामा पहने से हर कोई जवाहर लाल नेहरू नही हो जाता।
श्री अंजान ने कहा कि हिंदू सम्प्रदायिकता के साथ मुस्लिम संप्रदायिकता भी है। साक्षी महराज, उमा भारती, साघ्वी प्राची, निरंजना जहर उगलते है। अगर नागपुर से साम्प्रदायिकता की आवाज आती है तो हैदराबाद से प्रेम की वाणी नहीं आती है। ओवैसी बंधुओं का नाम लिए बिना कहा कि वह अपनी जहरीली तकरीरें बंद करें। वह देश के साम्प्रदायिक सौहार्द को तोड़ने का कार्य ना करें। इस देश की वाणी, परम्परा, गंगा जमुनी संस्कृति को बचाने और बनाने की जिम्मेदारी सभी की है। अकसरियत फिरकापरस्ती व अकलियत फिरकापस्ती एक दूसरे को जिंदा रखने में मदद करती है, आक्सीजन देती है।
उप्र के चुनाव पर भी भाजपा की नीति पर जोरदार प्रहार करते हुए भाकपा नेता ने कहा कि मुजफ्फनगर आपने कर लिया और 2014 में सरकार बना ली। क्या यह साजिश देश हित में है ? अब उप्र चुनाव के पहले मुजफ्फरनगर में भाजपा नेता संगीत सोम भाषण दे रहे है कि यह उप्र का चुनाव नहीं हो रहा है भारत और पाकिस्तान की लड़ाई हो रही है। इस तरह की बातें 22 करोड़ के उप्र को कहा ले जाएंगी ?

उन्होने पूंजीवाद को भारतीय राजनीति के लिए खतरा बताते हुए कहा कि  पूंजीवाद ने राजनीतिक नेताओं को भगवान के बराबर कर दिया है। स्थिति ऐसी बन गई है कि अडानी, अंबानी के साथ के बगैर चुनाव नहीं लड़ा जा सकता। देश में महंगाई, बेगारी, गरीबी, राजनीति में गिरावट के लिए पूंजीवादी व आर्थिक शक्तियां जिम्मेदार है। आज हमें शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने और खेत, गांव, किसान को बचाने कि लड़ाई तेज करनी है।
सदर सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बगैर उन्होने लोगों से गोरखपुर में सम्प्रदायिक तत्वों को सर न उठाने देने कि अपील की। उन्होने कहा कि भारत में अगर रहना है तो भारत के संविधान का जय गान करना होगा न कि किसी व्यक्ति का। कुछ लोग है इस दुनिया में जो फूलों की जगह कांटों की तमन्ना करते हैं। जीते है ना जीने देते है। महंगाई, गरीबी रूक नहीं रही है। इसलिए साम्प्रदायिक सौहार्द को बनाये रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। कम्यूनिष्टों एव सोशलिस्टों को मिलकर एक साथ बढ़ना देश के संविधान की हिफाजत के लिए एक महत्वपूर्ण काम है। संविधान बचाने के लिए, गरीबों, मजलूमों , मजदूरों व देश की गंगा जमुनी संस्कृति को बचाने के लिए कम्यूनिष्टों व समाजवादियों को एकता
बनाकर काम करना होगा।
मुख्य अतिथि एमएलसी डा. अशोक बाजपेयी और अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति कलीमुल्ला खां ने कहा कि फिरकापरस्ती को देश के लोगों ने हमेशा नकारा है और आगे भी परास्त केरेंगे  साकी। इस मौके पर डा. प्रभा शंकर पांडेय, बृजेश सिंह, सुरेश श्रीवास्तव, डा. अशअर अली, जफर अमीन डक्कू, डा. मोहसिन खान, कमल किशोर, सुरेश राम, श्याम त्रिपाठी, राजमणि पांडेय, गोरख यादव आदि मौजूद रहे।

आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के आयोजक राजेश सिंह ने कहा कि उनके पिता एक प्रतिबद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता थे। वह उनकी पुण्यतिथि पर यह कार्यक्रम देश को आजाद करने वाले स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियो को याद करने और प्रतिबद्ध राजनीतिक कार्यकर्ताओं का सलाम करने के लिए करते हैं।

कार्यक्रम में सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए  प्रो. रघुनाथ चंद, शंकर प्रसाद गप्ता, अब्दुल बारी, डा. शौकत अली, राजमणि पांडेय, पन्नेलाल यादव और डा. दिनेश नायक को सम्मानित किया गया।

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