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नेपाल में पाँच दिन मनायी जाती है दीपावली, कुकुर तिहार के दिन होती है कुत्तों की पूजा

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कुत्तों को भैरव का दूत मान नेपाली करते हैं पूजा, खिलते हैं मिठाइयाँ

सगीर ए खाकसार

बढ़नी (सिद्धार्थनगर), 28 अक्टूबर। कहते हैं इंसान से ज़्यादा वफादार कुत्ते होते हैं। वे अपने स्वामी के प्रति बेहद ईमानदार होते हैं। कुत्तों और इंसानों के बीच वफ़ादारी को दर्शाने वाली फिल्मों की अपने यहाँ तो भरमार रही है। कुत्तों की वफादारी पर तो आप ने वॉलीवुड की कई फ़िल्में देखी होंगी। “तेरी मेहरबानियां ” फिल्म को शायद आप भूले नहीं होंगे लेकिन आज हम आपको ले चलते हैं नेपाजहाँ कुत्तों की होती है बाकायदा पूजा। नेपाल में दीपावली का पर्व यूँ तो पांच दिनों का होता है ,लेकिन इसमें एक दिन समर्पित है कुत्तो की पूजा हेतु ,जिसे कहा जाता है कुकुर तिहार।

नेपाल में हिन्दू मान्यता के अनुसार कुत्तों को भैरव का दूत माना जाता है। इस लिए लोग इस खास दिन पर कुत्तो  की पूजा करते हैं। यह इंसानों के जानवरों के प्रति प्रेम को भी दर्शाता है। इस दिन लोग अपने घरों में कुत्ते की पूजा करते हैं।इसके अलावा जो ट्रेंड कुत्ते होते हैं वो करतब भी दिखाते हैं। इस दिन बाकायदा कुत्तों के सिर पर लाल रोली भी लगाई जाती है। टीका और फूलों का माला भी पहनाया जाता है। जगह जगह पर आयोजन भी होते है ।

काठमांडू का सेन्ट्रल पुलिस डॉग ट्रेनिग सेंटर हर साल इस त्यौहार के मौके पर पूजा के आयोजन के साथ अपने प्रशिक्षित कुत्तों द्वारा तरह-तरह के करतब भी दिखाता है। नेपाल में कुकुर तिहार को लेकर काफी उत्साह और जोश भी देखने को मिलता है। सभ्य समाज में इंसानों और जानवरों के बीच सह अस्तित्व का भाव जगाने वाला नेपाल का कुकुर पूजा कई मायनों में देखा जाये तो बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है।

नेपाल में पांच दिन तक मनाये जाने वाले तिहार (पर्व) पर कुत्तों को पूजने के अलावा कई अन्य जानवरों के पूजा अर्चना की भी परंपरा है। लाइफ विद डॉग्स के मुताबिक कुत्तों को पूजने के साथ साथ उन्हें कई तरह की स्वादिष्ट मिठाइयां भी परोसी जाती हैं।

पहले दिन यमराज के दूत के रूप में माने जाने वाले कौवे की पूजा , दूसरे दिन भगवान भैरव के रूप में कुत्ते की पूजा तीसरे दिन देवी लक्ष्मी के रूप में गाय की पूजा चौथे दिन शक्ति के देवता बैल की पूजा तो पांचवें और आखरी दिन बहने भाइयो  के सम्मान में मनाती हैं जिसे भइलो व् देउसे के रूप में बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। इतने सारे तिहार को मनाने के अगर आप शौक़ीन हैं तो आप को एक बार नेपाल अवश्य ही जाना चाहिए।⁠⁠⁠⁠