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पंकज मिश्र का ‘ यक्ष-युधिष्ठिर संवाद ’ अब लाइव देखिये

( लेखक-ब्लागर पंकज मिश्र का ‘ यक्ष-युधिष्ठिर संवाद ’ सोशल मीडिया पर बेहद लोकप्रिय है। श्री मिश्र यक्ष-युधिष्ठिर संवाद के जरिए राजनीतिक, साहित्यिक और सामाजिक घटनाओं पर चुटीली व तीखी टिप्पणी करते हैं। पंकज मिश्र ने अपने फेसबुक वाल पर यक्ष-युधिष्ठिर संवाद अप्रैल 2015 से लिखना शुरू किया था और अमूमन प्रतिदिन एक टिप्पणी लिखते हैं जिसे हजारों की संख्या में लोग पढ़ते हैं। इन पाठकों में से ही किसी ने अब यक्ष-युधिष्ठिर संवाद को वीडियो क्लिप के जरिए प्रस्तुत करने का कार्य शुरू किया है। गोरखपुर न्यूज लाइन के पाठकों के लिए प्रस्तुत है चुनिन्दा यक्ष-युधिष्ठिर संवाद )

( 1 )

यक्ष -नोटबंदी क्यों हुई थी राजन , ऑप्शन है –

1.कालाधन खत्म करने के लिए
2.आतंकवाद खत्म करने के लिए
3.जाली नोट खत्म करने के लिए
4.कैशलेस सोसायटी बनाने के लिए
5 डिजिटल इंडिया बनाने के लिए
6.डायरेक्ट टैक्स रेट कम करने के लिये
7.लोन सस्ता करने के लिए
8.सबको टैक्स नेट में लाने के लिए
9.रियल स्टेट में प्राइस कम करने के लिए
10.फाइनेंसियल सर्विलांस / ट्रांसपेरेंसी के लिए
11.उपरोक्त सभी
12.उपरोक्त में से कोई नही

युधिष्ठिर –मेरे हिसाब से ऑप्शन 12 … उपरोक्त में से कोई नही |

यक्ष –इतने ऑप्शन में कोई नही !!! और ऑप्शन दूँ क्या , अभी इलेक्शन में टाइम है इसलिए और भी विकल्प झोले में है मेरे ..

युधिष्ठिर -नही नही रहने दें … मेरा उत्तर बदलने वाला नही |

यक्ष –अबे ! अल्ट्रा लेफ्ट हो या अल्ट्रा राइट , जो कह रहे हो कि उत्तर बदलने वाला नही चाहे जो विकल्प हो …

युधिष्ठिर -न अल्ट्रा राइट न अल्ट्रा लेफ्ट मैं ऊपर वाले पर भरोसा रखने वाला , सर्वधर्म समभाव मानने वाला प्योर सेंट्रिस्ट अपरच्युनिस्ट हूँ ..फिर भी मेरा उत्तर बदलने वाला नही क्योकि सच सिर्फ मुझे मालूम है |

यक्ष –कौन सा सच ? कैसा सच , जो सिर्फ तुम जानते हो ?

युधिष्ठिर – यही कि , असल में नोटबंदी हुई ही नही थी |

यह तो माया थी , माया के मोह से उबारने के लिए ऊपर वाले ने यह लीला की थी | इसके अलावा ऊपरवाला प्रजाजनों के धैर्य और सहनशीलता की परीक्षा भी ले रहा था | प्रजा इस परीक्षा में सफल हुई अब वह भविष्य में होने वाली हर मुश्किल परीक्षा के लिए तैयार है |

मैं आर्यावर्त में प्रजा का यह रूप देख अत्यंत प्रसन्न हूँ | एक बार अज्ञातवास खत्म हो , दुर्योधन का राज मिटे और ऐसी अनुशासित और आज्ञाकारी प्रजा को मैं अपने सपनों का देस बना कर गिफ्ट करूंगा , कोई अड़चन अब नही दिखती मुझे …

हे ऊपर वाले तेरा लाख लाख शुक्र है जो तेरे करम से मुझे ऐसी प्रजा प्राप्त होगी ….

यक्ष – आएं !!!

 

(2)

यक्ष – ये जियो वाला फ्री में डेटा क्यों दे रहा है , ये बात कुछ समझ में नही आयी राजन |

युधिष्ठिर – व्यापारी आदमी है , व्यापारी फ्री में कुछ नही देता | ये आपको फ्री में डेटा दे नही रहा है ये उससे पहले फ्री में आपका सारा डेटा ले रहा है | जरा अपना सारा डेटा देने से पहले , इसका डेटा ले के दिखाइए ….देखिये देता है कि नही …और डेटा बोले तो सारा डेटा …

(अब यक्ष को कैसे समझाएं , कि यह डिजिटल दुनिया है यक्ष , यहां आप का डेटा ही आपकी पहचान , आपकी ताकत और आपका आवरण है …. इस डिजिटल संसार में जो व्यापारी आपको जितना नँगा कर सकता है उतना ही सामान आपको बेच सकता है | आप अब इसके सामने नँगे है | आपका कुछ नही छिपा है इससे …. )

दृश्य परिवर्तन (वर्ष 2020 )

कर लो दुनिया मुट्ठी में की होर्डिंग ऊपर और नीचे डिपार्टमेंटल स्टोर ..

सेठ अपने सेल्समैन से कहता है – अबे ए …. साब को 90 नम्बर का अंडवियर दो , 95 की बनियान और xl शर्ट और 34 इंच की स्लिम फिट जीन्स … अभी यंग है साब , बस कमर 32 मांगता है सर इस एज में ..bt फ़िक्र नही करने का …. कल एक डिब्बा 100 गोली का भिजवा दूंगा घर , 100 डेज़ में कमर 32 ..
आप कहेंगे ….वाह सेठ , आप तो एक नज़र से सब भांप लेते है , माप भी ले लेते है ……हाहा …

लेकिन ये आप नही , सेठ हंस रहा है आपके ऊपर ……
देखो नँगा हंस रहा है .. कितना इम्प्रेस्ड है …तभी बोलेगा ए साब को 6 इंच स्क्रीन वाला मोबाइल ले आओ , साब को बड़ा स्क्रीन चाहिए , साब वीडियो बहुत देखता है , क्यों साब ….अब आप अभिभूत हो रहे है और सेठ भूत , ऐसा भूत जो आपका पीछा कभी नही छोड़ेगा …

                        (3)
 यक्ष – महाभारत के बाद पांडवों का हृदय परिवर्तन हो गया , कलिंग युद्ध के बाद अशोक का , गांधी की पूरी राजनीति का आधार ही हृदय परिवर्तन था …. अब भी आर्यावर्त में क्या राजनेताओं का हृदय परिवर्तन होता है ? लेटेस्ट अपडेट क्या है राजन ?

युधिष्ठिर – लेटेस्ट अपडेट यह है कि 47 में देश आज़ाद हुआ , उसके बाद राजनेताओं में यह प्रथा बन्द हो गयी है |

अब प्रजा का हृदय परिवर्तन होता है | कब तक एक ही पक्ष हृदय परिवर्तन करता रहेगा | चेंज तो होते रहने चाहिए वरना पॉलिटिक्स कितनी बोरिंग हो जायेगी | है कि नही …

(4 )

यक्ष – भारत खेलों के क्षेत्र में इतना पिछड़ा क्यों है ?

युधिष्ठिर – क्योंकि यहाँ सर्वश्रेष्ठ कोच द्रोणाचार्य और सर्वश्रेष्ट खिलाड़ी कोच-प्रिय अर्जुन होता है | जब तक सर्वश्रेष्ठ कोच द्रोणाचार्य रहेंगे तब तक ऐसा ही हाल रहेगा | द्रोण और अर्जुन की दुरभिसंधि को तोड़े बगैर कोई परिवर्तन नही होगा | लेकिन इस विडम्बना का क्या कीजियेगा कि आज भी सर्वश्रेष्ठ कोच ले लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के लिए अर्जुन पुरस्कार देने की परम्परा है |

(5 )

यक्ष- क्या तुम गांधीवादी हो ?

युधिष्ठिर- नही

यक्ष – तो क्या गोडसेवादी हो ?

युधिष्ठिर- नही

यक्ष- तब क्यों गांधी के प्रति अपनी पक्षधरता दिखा रहे हो ?

युधिष्ठिर – क्योंकि मौजूदा सियासी हाल में मैं उनके साथ संयुक्त मोर्चे में हूँ |

(6)

यक्ष – एक पहेली समझ में नहीं आती राजन ? जब सारे के सारे मसाले अपने आप में एक से एक बढ़ कर औषधीय गुणों से युक्त होते हैं तो मसालेदार भोजन से परहेज़ क्यों बताया जाता है ?

युधिष्ठिर – यह कोई पहेली नही है यक्ष | जब व्यक्ति और समाज के द्वंदात्मक सम्बन्ध को समझ जायेंगे तो ऐसी कोई गुत्थी परेशान नही करेगी | यदि यह इतना ही सीधा और सरल समीकरण होता तो हमारे सुधरने से समाज फिर क्यों नही सुधरता | क्या आम आदमी इतना अन्यायी और अत्याचारी है जितना अत्याचार समाज में मौजूद है | समाज और व्यक्ति के द्वंद में समाज की गति ही निर्णायक होती है , जैसा समाज होगा वैसा व्यक्ति होगा | जैसे विभिन्न मसालों में मेडिसिनल प्रापर्टीज़ होने के बावजूद मसालेदार भोजन अनिवार्यतः नुक्सान करता है | जैसे भीड़ की मानसिकता उसमे शामिल व्यक्तियों की मानसिकता से स्वतंत्र गति करती है यानी क्वांटिटी का सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है , एक हरी मिर्च विटामिन सी देती है और दस मिर्चें अल्सर और एसिडिटी |


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पंकज मिश्र

(7 )

यक्ष – ” सबका साथ सबका विकास ” क्या है ?

युधिष्ठिर – ” सबका साथ सबका विकास ” 108 मनकों की माला है | इसे एकांत के बजाय पब्लिक में जपा जाता है | इसके जाप से अच्छे दिनों का आभास होने लगता है ‘ मुख पर कान्ति और शरीर में ऊर्जा का संचार होता है | एक बार संकल्प करने पर यदि नियम से तस्बीह न की जाए तो पाप लगता है |

(8 )

यक्ष – ऐसा क्या है , जो ठोस भौतिक अवस्था में मौजूद हो और दिखाई भी न दे ?

युधिष्ठिर – काला धन , जो दिखाई भी नही देता है परन्तु ठोस भौतिक अवस्था में मौजूद होता है |

यक्ष – मैंने सोचा था , कि ब्लैकहोल बताओगे क्योंकि यह तो ब्लैकहोल की सामान्य परिभाषा है |

युधिष्ठिर – कालाधन को भी ब्लैक होल ही समझिये यक्ष , क्योंकि इन गुणों के अलावा भी काला धन और ब्लैकहोल समानधर्मा है | दोनों में यह खासियत भी होती है कि इन दोनों का आकर्षण अपरिमित है , जो इनके करीब पहुँचता है यह दोनों उस को भी अपने में समो लेते हैं।

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