जनपद

पानी संकट से बचने के लिए पेप्सी – कोका कोला के कारखाने बंद करने की मांग

सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) ने हजरतगंज से सफेदाबाद स्थित कोका कोला कारखाने तक साइकिल-मोटरसाइकिल रैली निकाली

लखनऊ, 24 अप्रैल।  पानी के संकट के गहराने से बचने के लिए पेप्सी व कोका कोला के कारखाने बंद करने की मांग करते हुए आज सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) ने जी.पी.ओ. हजरतगंज से सफेदाबाद स्थित कोका कोला कारखाने तक साइकिल-मोटरसाइकिल रैली निकाली।रैली में शामिल लोगों ने पानी का निजीकरण बंद करने की मांग की। 
 सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) ने कहा कि पानी के संकट को लेकर त्राहि त्राहि मची हुई है। संकट सिर्फ महाराष्ट्र, जहां उच्च न्यायालय के फैसले से आई.पी.एल. क्रिकेट के खेल बाहर किए गए, या बुँदेलखण्ड में ही नहीं बल्कि सभी जगह मुंह बाए खड़ा है।
      पेप्सी व कोका कोला के कारखाने बड़ी मात्रा में भू-गर्भ जल का अनियंत्रित दोहन करते हैं। एक लीटर शीतल पेय बनाने में नौ लीटर पानी खर्च होता है। केरल के प्लाचीमाडा में स्थानीय पंचायत ने कोका कोला के कारखाने को बंद करा दिया। आज वहां यह स्थिति है कि पीने का पानी बाहर से टैंकरों में आता है। बलिया के सिंहाचवर गांव में भी स्थानीय लोगों ने कोका कोला का कारखाना बंद करवाया। वाराणसी के मेंहदीगंज में कोका कोला के कारखाने के खिलाफ किसानों का एक लम्बा संघर्ष चला है। पेप्सी और कोका कोला के जहां जहां भी कारखाने हैं वहां पानी का संकट गहराया है।  पेप्सी और कोका कोला यह दावा करती हैं कि जितना पानी ये जमीन के नीचे से निकालती हैं उससे ज्यादा की वर्षा जल संचयन के माध्यम से क्षतिपूर्ति करती हैं। किंतु इन दोनों कम्पनियों का यह दावा झूठा है। वाराणसी में कारखाना ग्रामीण इलाके में है और कोका कोला के जल संचयन कार्यक्रम शहर में स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय अथवा केन्द्रीय कारागार में चल रहे हैं और उनमें भी उपकरणों की टूट फूट की कोका कोला को कोई परवाह नहीं। इन कम्पनियों के जल संचयन कार्यक्रम लोगों की आंखों में धूल झोंकने जैसे हैं।

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