विचार

बार्डर पर बाजार

मेरा गांव मेरा देश -1

मनोज कुमार सिंह

6 अक्तूबर को सिद्धार्थनगर जाने का मौका मिला। सिद्धार्थनगर प्रेस क्लब के नव निर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करना था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वरिष्ठ पत्रकार एवं कपिलवस्तु पोस्ट के सम्पादक नजीर मलिक के साथ कपिलवस्तु चल पड़े। सिद्धार्थनगर कई बार आना हुआ लेकिन जिले का यही कोना बार-बार छूट जाता था।

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कपिलवस्तु में बुद्ध का बचपन बीता। कपिलवस्तुू छठी शती ईसा पूर्व शाक्य गणराज्य की राजधानी थी और गौतम बुद्ध के पिता शुद्धोधन यहां के राजा थे।

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बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनकी अस्थि अवशेषों को आठ भाग में विभाजित किया गया था जिसका एक भाग शाक्यों को मिला और उन्होंने उस अस्थि अवशेष पर स्तूप का निर्माण कराया। 1898 में डब्ल्यू सी पेपे को यहां खडि़या पत्थर से निर्मित अस्थि मंजूषा मिला जिस पर शाक्यों द्वारा स्तूप निर्माण का उल्लेख है।

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पहले यह स्थान काफी बदहाल था लेकिन अब इसे काफी अच्छा कर दिया गया है। चारो तरफ हरी मखमली घास नजर आती है। एक तरफ सुंदर कमल सरोवर है।

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सड़क उस पर कपिलवस्तु विश्वविद्यालय नजर आता है। इसकी स्थापना दो वर्ष पहले ही हुई थी। अब यहां पढ़ाई शुरू हो गई है। गोरखपुर विश्वद्यिालय के बाद गोरखपुर-बस्ती मंडल के सात जिलों के बीच यह दूसरा विश्वविद्यालय है।

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कपिलवस्तु से कुछ ही दूरी पर नेपाल बार्डर है। दस गज का नो मैंस लैंड है। दोनों देशों के प्रवेश द्वार बने हैं और दोनों पर ही कपिलवस्तु लिखा है।

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भारत वाले इलाके को भी कपिलवस्तु कहते हैं और बार्डर उस पार का क्षेत्र भी कपिलवस्तु कहते हैं। बुद्ध दोनों देशों को जोड़ते हैं। करीब 20 किलोमीटर दूर ही बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बनी है।
img_20161006_163103बार्डर पर बाजार लगा है। जबर्दस्त भीड़ है। बाजार भारत के क्षेत्र से होते हुए नेपाल के प्रवेश द्वार से ढाई सौ मीटर दूर तक विस्तारित है। नो मैंस लैंड पर भी दुकानें सजी हैं। बार्डर के बाजार पर खरीदार इस पार वाले भी हैं और उस पार वाले भी।

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बाजार में वह तमाम चीजें भी हैं जो आज के शहरों के बाजार से गायब मिलती हैं जैसे जालिम लोशन और चमकौआ। चमकौआ यानि चमकीली पन्नी। यह कई तरह के काम आता है। त्योहारों में सजावट से लेकर खेतों में फसल की रक्षा के लिए पशुओं के डराने तक के काम में।

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यहीं इमरती भी छन रही है जिसे खाने का लोभ शुगर होते हुए भी नजीर मलिक नहीं छोड़ पा रहे हैं। भारत के प्रवेश द्वार पर एसएसबी के दो जवान नजर आते हैं लेकिन नेपाल के प्रवेश द्वार पर कोई प्रहरी नहीं दिखायी देता हालांकि उनकी पोस्ट पास में ही है।

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आज जब पडोसी देश पाकिस्तान से बढ़ते तनाव के कारण युद्ध की आशंका में बार्डर क्षेत्र के ग्रामीण विस्थापित हो रहे हैं और बार्डर को पूरी तरह सील करने की बात हो रही है, नेपाल का यह बार्डर हमें संदेश देता है कि दुनिया के सभी देशों के बीच बार्डर ऐसा ही होना चाहिए। जहां लोग बेरोकटोक आज जा सकते हों और जहां नो मैंस लैंड ( दोनो देशों के बीच सीमा निर्धारित करने वाली दस गज की खाली भूमि) पर बाजार लगे और जहां पुलिस, सेना की जरूरत न हो।

( इस कालम में हम यात्रा संस्मरण को प्रकाशित करेंगे। यदि आप के पास भी संस्मरण हो तो हमें gnl2004@gmail.com पर भेजें । साथ में फोटो भेजना न भूलें )

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