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बिजली वितरण के निजीकरण के पीछे मेगा घोटाले की तैयारी :विद्युत कर्मचारी सँयुक्त संघर्ष समिति

निजी घरानों को मुनाफा देने के लिए बढ़ाई गयी हैं ग्रामीण क्षेत्र की बिजली की दरें

लखनऊ.विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री द्वारा निजीकरण के पक्ष में दिये गये बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि आगरा में निजीकरण का इतिहास इस बात का गवाह है कि निजीकरण से सबसे ज्यादा परेशानी आम इमानदार उपभोक्ता को उठानी पड़ रही है। समिति ने कहा कि आगरा में अरबों रूपये का घोटाला होने के बावजूद प्रदेश के पांच अन्य शहरों का निजीकरण किये जाने के पीछे कोर्पोरेट घरानों को बेजा फायदा देने और मेगा घोटाले की तैयारी है।

निजीकरण के विरोध में चलाये जा रहे आन्दोलन के तेरहवें दिन आज भी प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों और अभियन्ताओं ने नियमानुसार कार्य अन्दोलन जारी रखा तथा परियोजना व जनपद मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किये गये। संघर्ष समिति ने ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली दरों में बेतहाशा वृद्धि की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि निजी घरानों को बेजा मुनाफा देने के लिए ही बिजली दरों में निजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के पहले वृद्धि की गयी है। पावर कारपोरेशन में भर्ती घोटाला निजी क्षेत्र की देन है। इसी प्रकार निजी कम्पनी एचसीएल का 100 करोड़ रूपये से अधिक का बिलिंग घोटाला भी निजी क्षेत्र की ही देन है। इसके बावजूद सरकार द्वारा निजी क्षेत्र की पैरवी का क्या अर्थ है।

संघर्ष मिति की आज यहां हुई बैठक में पांच शहरों एवं सात जनपदों के निजीकरण का निर्णय वापस लेने की मांग के साथ ही प्रदेश सरकार से मांग की गयी कि आगरा में घोटालों के चलते टोरेंट का फ्रेन्चाईजी करार रद्द किया जाये ओर गे्रटर नोएडा में निजी कम्पनी का लाइसेंस निरस्त किया जाये। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि ग्रामीण उपभोक्ताओं की बिजली दरों में अबतक की सर्वाधिक 34 प्रतिशत की वृद्धि निजी घरानों को फायदा पहुंचाने की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। समिति ने कहा कि पांच शहरों के अलावा सात जनपदों का निजीकरण किया जा रहा है जिनमें ग्रामीण क्षेत्र के काफी उपभोक्ता भी सम्मिलित है। निजी घरानों को ज्यादा मुनाफा मिल सके इसीलिए निजीकरण के टेंडर फाइनल करने के पहले ग्रामीण क्षेत्रों के बिजली दरों में इतनी भारी वृद्धि की गयी है। समिति ने प्रदेश की जनता को सचेत किया है कि शीघ्र ही शहरी उपभोक्ताओं की बिजली दरों में भारी वृद्धि करने की गुपचुप योजना चल रही है जिससे शहरी क्षेत्रों में आने वाली निजी क्षेत्र की बिजली कम्पनियों को मुनाफा दिया जा सके।

संघर्ष समिति ने आगरा के फ्रेन्चाईजीकरण पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं की शिकायतों पर गठित कमेटी की रिर्पोट के अनुसार आगरा में उपभोक्ताओं के मीटर बेतहाशा तेज चलने की शिकायतें, बिल वसूली के लिए गुण्डों व बाउन्सरों के जरिये डराना धमकाना और गरीब बस्तियों में कई-कई घण्टे तक जानबूझ कर बे्रकडाउन न अटेण्ड करना आदि शिकायतें सामने आई है। इससे पूरी तरह स्पष्ट है कि निजीकरण से सबसे ज्यादा परेशानी आम ईमानदार उपभोक्ताओं को होने वाली है। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के कार्यों की सीएजी रिपोर्ट के अनुसार टोरेन्ट को फ्रेन्चाईजी देने की प्रक्रिया में हुए घोटाले में 2012 के टैरिफ के अनुसार 4600 करोड़ रूपये का घाटा हो चुका है जो आज के टैरिफ से 10000 करोड़ रूपये से ऊपर का बैठता है। इसी प्रकार टोरेन्ट को पावर कारपोरेशन का 1147 करोड़ रूपये का बिजली राजस्व का एरियर एकत्र करके देना था जिसे टोरेंट कम्पनी हड़प कर गयी है। ऐसे घोटाले करने वाली निजीकरण की प्रक्रिया की तारीफ करके सरकार पांच अन्य शहरों के निजीकरण की बात करते है तो प्रतीत होता है कि और बड़े घोटालों की तैयारी है।

निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में बिजली कर्मचारी व अभियन्ताओं ने जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देने का सिलसिला जारी रखा। संघर्ष समिति समिति ने आम जनता से अपील की है कि वे सरकार के बयानों से गुमराह न हो और प्रदेश के पावर सेक्टर को तबाह होने से बचाने के लिए बिजली कर्मचारियों के आन्दोलन को सहयोग व समर्थन दें।

संघर्ष समिति की आज यहां हुई बैठक में शैलेन्द्र दुबे, राजीव सिंह, गिरीश पाण्डेय, सदरूदद्ीन राना, विपिन प्रकाश वर्मा, सुहैल आबिद, राजेन्द्र घिल्डियाल, परशुराम, पी एन राय, पूसे लाल, ए के श्रीवास्तव, महेन्द्र राय, शशिकान्त श्रीवास्तव, करतार प्रसाद, के एस रावत, पी एन तिवारी, आर एस वर्मा, रामनाथ यादव, पवन श्रीवास्तव, शम्भू रत्न दीक्षित, कुलेन्द्र प्रताप सिंह, मो इलियास मुख्यतया उपस्थित रहे।

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