साक्षात्कार

भारत का मुसलमान दहशत के साये में जी रहा है : डा. माजिद देवबंद

अशफाक अहमद/फरहान अहमद

गोरखपुर, 12 नवम्बर। दिल्ली उर्दू अकादमी के वाइस चैयरमैन डा. माजिद देवबंदी ने कहा कि गुजिस्ता दस सालों में देश के हालात बहुत खराब हुए है। मजहब के नाम पर सियासतदां ने इसका गलत इस्तेमाल किया है। मजहब के नाम पर देश में कत्लेआम, खूरेजीं जैसी दर्दनाक चीेजें होती रही है। वतन में रहने वाले हिंदू- मुसलमान सदियों से साथ रहते आ रहे हैं लेकिन कुछ लोगों की वजह से जो सरकारें बनी देश व प्रदेश में उससे यह समझते हैं कि हमारी ही हुकूमत रहेगी जबकि हुकूमतें बदलती रहती हैं।

डा. माजिद देवबंदी गोरखपुर में आयोजित मुशायरे में भाग लेने आये थे. गोरखपुर न्यूज़ लाइन से बात करते हुए उन्होंने जगहों के नाम बदलने के सवाल पर तल्ख होते हुए कहा कि नाम बदलने से क्या होगा। आज की सरकार को मुगलों का एहसान मानना चाहिए कि ताजमहल जैसी विरासत दी। आज इसी विरासत की वजह से कई हजार लोगों की रोजी-रोटी चल रही है। उन्होंने कहा कि देश में इतनी खराब सरकार को हटाने के लिए सभी मजहबों के मानने वालों को साथ आना पड़ेगा तब जाकर सही सरकार बनेगी। हुकूमत चलाने के नशे में आवाम के सपनों के चकनाचूर कर रही है यह सरकार। उन्होंने सही लोगों को मुत्तहिद होने की अपील भी की।
उन्होंने कहा कि सब सियासी फरेब लोग ही सियासत में बैठे हैं। फिरकापरस्त ताकतें हुकूमत कर रही हैं। जो घपले व घोटाले में फंसे हुए हैं वहीं लोग समर्थन कर रहे हैं।
डा. माजिद ने कहा कि शिया समुदाय की नुमाईंदगी बीजेपी नहीं कर रही है जबकि शिया समुदाय बीजेपी का हिमायती रहा हैं। सही लोग खासकर मुसलमान बीजेपी को काबिले कुबूल नहीं हैं। आज हिंदुस्तान दानिश्वरों की सही सोच रखने वाले हिन्दू-मुसलमान को आगे बढ़कर आना पड़ेगा तभी देश तरक्की करेगा। आज की सरकार तरक्की के नाम पर सिर्फ सियासत कर रही है। इस मुल्क के रहने वाले हिंदू-मुसलमान एक हैं और वजीर-ए- आजम की जिम्मेदारी बनती है कि सबको बराबर से देखें। उन्होंने कहा कि भारत का मुसलमान खौफ और दहशत के सांयें में जी रहा है।
उन्होंने कहा कि हमारे बुजुर्गों की तारीख मिटाने से मिट नहीं  सकती हैं। उनकी तामीर से आज भी अरबों रुपए आते हैं। जिस पर हमें फख्र है। यह भी तारीख रही कि मुगलों की हुकूमत में सबसे ज्यादा सुकून से हिन्दू-मुस्लिम थे। उन्होंने तंज करते हुए शेर कहा-
” खुद को भी आजमाओ तो पहले
कुछ नया कर दिखाओ तो पहले
बन ही जायेंगे मंदिर-मस्जिद
दिल से दिल को मिलाओ तो पहले”

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