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मुसहर भाइयों की भूख और बीमारी से मौत का मामला मानवाधिकार आयोग पहुंचा

सामाजिक कार्यकर्ता राजेश मणि ने आयोग से दोनों भाइयों की मौत और मुसहरों की स्थिति जानने के लिए जांच समिति बनाने का अनुरोध किया
गोरखपुर, 3 जनवरी। कुशीनगर जिले के दुदही ब्लाक के मठिया माफी गांव में 28 दिसम्बर को दो मुसहर भाइयों की भूख और बीमारी से हुई मौत का मामला मानवाधिकार आयोग में पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं मानव सेवा संस्थान के निदेशक राजेश मणि ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दोनों मुसहर भाइयों की मौत और मुसहरों की दयनीय स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए इस घटना की जांच का अनुरोध किया है। आयोग ने श्री मणि की शिकायत को पंजीकृत कर लिया है।

श्री मणि ने मानवाधिकार आयोग को 2 जनवरी को लिखे शिकायती पत्र में कहा है कि मुसहर समुदाय पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे वंचित समाज है। मुसहर समुदाय गरीबी, भूखमरी, जातीय भेदभाव, छूआछूत, शिक्षा के अभाव, प्रशासनिक व सरकारी उदासीनता के कारण सामाजिक विलगाव का शिकार है। मुसहर समुदाय की बसावट जंगलों व नदियों के किनारे है और वे मुख्य धारा से कटे हुए हैं।

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राजेश मणि

श्री मणि ने अपने पत्र में कहा है कि मठिया माफी गांव निवासी सुरेश और गंभा खेतों में मजदूरी कर अपने परिवार का जीवन यापन कर रहे थे। उनके पास खेती के लिए भूमि नहीं है और उनकी स्थिति बहुत दयनीय थी। मनरेगा का जाब कार्ड होने के बावजूद उन्हें काम नहीं मिल रहा था। कुपोषण के कारण उनकी तबियत खराब हो गई और वे पैसे के अभाव में इलाज नहीं करा सके। राशन कार्ड होने के बावजूद उन्हें राशन नहीं मिला और वे भुखमरी की स्थिति में आ गए। आखिरकार उनका निधन हो गया। उनकी मौत के बाद सम्बन्धित विभाग ने उनके घर राशन पहुंचाया।
श्री मणि ने लिखा है कि सुरेश और गंभा की स्थिति हर मुसहर की है। तमाम निर्देश के बावजूद सरकारी विभाग मुसहरों को भुखमरी और बीमारी से बचाने में नाकामयाब सिद्ध हुए हैं जिसके कारण आए दिन वे मौत के शिकार हो रहे हैं। यह स्थिति मानवाधिकारों के उल्लंघन की है। उन्होंने अपने पत्र मंे आयोग से जांच कमेटी गठित कर पूरे मामले की जांच कराने और मुसहरों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
श्री मणि ने गोरखपुर न्यूज लाइन से कहा कि उन्होंने एक वर्ष पहले नीति आयोग को 10 सूत्री मांग पत्र देकर मुुसहरों को विशेष हित समूह के रूप में लाभान्वित करने, उन्हें आदिवासी घोषित करने तथा उनके लिए विशेष योजनाएं चलाने की मांग की थी ताकि उन्हें मुख्य धारा मंे लाया जा सके। आज जरूरत इस बात की है कि इन सभी मांगों को केन्द्र व राज्य सरकार मिलकर पूरा करे।

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