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वर्णव्यवस्था के पोषकों और पूंजीपतियों का संघी भारत नहीं बनने देंगे-कामरेड रामजी राय

हमारा संघर्ष भगत सिंह और अंबेडकर के सपनों का बहुजन भारत और समाजवादी भारत है

‘ नए भारत के वास्ते-भगत सिंह अम्बेडकर के रास्ते ’ अभियान के तहत भाकपा
माले का जन कन्वेंशन
गोरखपुर, 13 अप्रैल। भाकपा माले और खेत मजदूर सभा ने आज दोपहर भगत
सिंह-अम्बेडकर संदेश यात्रा के क्रम में ‘ नए भारत के वास्ते-भगत सिंह
अम्बेडकर के रास्ते ’ अभियान के तहत डीएम कार्यालय पर जन कन्वेंशन आयोजित किया। जन कन्वेंशन को संबोधित करते हुए पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य एवं राज्य सचिव कामरेड रामजी राय ने कहा कि हमारी लडाई शहीदे आजम भगत सिंह और बाबा साहब अंबेडकर के सपनों के अनुरूप बहुजन का भारत, समाजवादी भारत बनाने की और हम आरएसएस-भाजपा के वर्णव्यवस्था के पोषकों व पूंजीपतियों के वर्चस्व वाला संघी भारत नहीं बनने देंगे। हमारा संघर्ष संघ और भाजपा के भगत सिंह और अंबेडकर के भगवाकरण की साजिश के खिलाफ इंकलाबी भगत सिंह और इंकलाबी अंबेडकर को लोगों के बीच स्थापित करने का संघर्ष है।

जन कन्वेन्शन_भाकपा माले
कामरेड रामजी राय ने कहा कि बाबा साहब ने कहा था कि देश आजाद होगा तो
भूमि का राष्ट्रीयकरण  होगा और उसे खेती करने वालों में बांट दिया जाएगा। बाबा साहब यह बात संविधान में भी लाना चाहते थे लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया। आज भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा भी उनके इस संकल्प की दिशा में कोई कार्य करने के बजाय सिर्फ उनके नाम का जप कर रहे हैं। संघ और भाजपा बाबा साहब पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। बाबा साहब कोई सामान या सम्पत्ति नहीं हैं कि उनको हड़पा जा सके। अंबेडकर गरीबों का आंदोलन और विचार हैं जिनके साथ खड़ा हुआ जा सकता है, जिया-मरा जा सकता है। उन्होंने 1857 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हिन्दुओं-मुसलमानों के एक होकर लड़ने को याद करते हुए कहा कहा कि यह देश किसी एक का नहीं है। देश की आजादी को याद करना होगा तो बहादुर शाह जफर और उनके दोनों बेटों के कटे सिर को भी याद करना होगा।
कामरेड रामजी राय ने कहा कि संविधान सभा में अपने आखिरी भाषण में अंबेडकर ने कहा कि संविधान के जरिए हमने एक वोट का एक मूल्य तो दे दिया लेकिन हर आदमी का मूल्य एक हो, उसकी सामाजिक-आर्थिक हैसियत एक हो, हासिल नहीं कर पाए हैं। संविधान के सहारे हमें यह लड़ाई लड़नी है और यदि हम यह हासिल नहीं कर पाए तो देश पर, लोकतंत्र पर खतरा पैदा हो जाएगा। रोहित वेमुला ने अपने पत्र में अंबेडकर की इस वेदना को बयान करते हुए लिखा कि हमारा मूल्य और पहचान वोट और जाति तक सीमित कर दी गई है और हमारे मस्तिष्क का कोई मूल्य नहीं रह गया है। संविधाान लागू होने के 66 वर्ष बाद आज लोकतंत्र और देश के सामने यह खतरा पैदा हो गया है। देश इसलिए संकट में है क्योंकि 99
फीसदी जनता के हक-हकूक को एक फीसदी लूटने वाली ताकतों को सौंपने का काम हो रहा है। इसलिए हमारी लड़ाई देश को बद से बदतर बनाने वालों के खिलाफ
है। हम देश के बेहतर से बेहतर बनाना चाहते हैं और इसके लिए हम हर
कुर्बानी देंगे।
अधिवक्ता श्याम मिलन एडवोकेट ने हैदराबाद सेंटल यूनिवर्सिटी के दलित
छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या को संस्थानिक हत्या बताते हुए कहा कि
उनकी शहदात को नौजवान व्यर्थ नहीं होने देंगे और ब्राह्मणवाद की समर्थक
मोदी सरकार को इसका करारा जवाब मिलेगा। भाकपा माले के जिला सचिव राजेश साहनी ने विस्तार से पार्टी के इस अभियान के मकसद का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने अपने दो वर्षों के राज में किसानों, मजदूरों, बुद्धिजीवियों, नौजवानों पर एक-एक कर हमला बोला और अब राष्ट्रवाद के नाम पर बोलने की आजादी का गला घोंट रही है। भगत सिंह और अम्बेडकर पर होने वाले कार्यक्रमों पर भी हमला बोला जा रहा है क्योंकि वे हमारे इन दोनों नायकों के विचारों से डरते हैं।

जन कन्वेंशन को खेत मजदूर सभा के जिला सचिव विनोद भारद्वाज, भाकपा के जिला सचिव सुरेश राय ने भी सम्बोधित किया। संचालन इंकलाबी नौजवान सभा के प्रदेश प्रभारी राकेश सिंह ने और अध्यक्षता कामरेड श्यामाचरण ने की।

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