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सरकार की असंवेदनशीलता के कारण आलू किसान संकट में – अजय कुमार लल्लू

भाजपा राज में किसानों को टमाटर, प्याज और आलू सड़कों पर फेंकना पड़ रहा है
लखनऊ, 6 जनवरी। कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता अजय कुमार ‘लल्लू’ ने भाजपा नीत सरकार को किसान विरोधी असंवेदनशील सरकार करार दिया है. श्री लल्लू ने कहा कि पिछले साल छत्तीसगढ़ में किसानों को टमाटर और मध्यप्रदेष में प्याज सड़कों पर फेंकना पड़ा । अब उत्तरप्रदेश में किसान आलू सड़कों पर फेंकने के लिए बाध्य हो रहे हैं।
 
उन्होने कहा कि विगत वर्ष आलू किसानों के राहत के लिए सरकार ने समर्थन मूल्य घोषित किया था किंतु उसको प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया और बहुत ही कम था। जिसके कारण किसानों ने आलू के सरंक्षण के लिए कोल्ड स्टोरेज मालिकों को जो किराये का भुगतान किया वह भी उनको बाजार से नहीं मिल सका था। इस बार भी सरकार आलू किसानों की समस्याओं की अनदेखी कर रही है। विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए वादा भी किया अब अपने वादे से मुकर रही है। 
 
उन्होनें कहा कि उत्तर प्रदेश में आलू के किसान बेहाल हैं और सरकार सो रही है। किसानों को मंडियों में उन्हे आलू की लागत मिलना भी मुश्किल हो गया है। जिससे किसानों में अधिक निराशा है. इसके प्रतिरोध स्वरूप ही लखनउ में यह घटना हुई है। पिछले वर्ष कोल्ड स्टोरेज में अधिक आलू भंडारित होने और मंडियों में आलू की अल्प मांग होने से आलू बाजार मंदी की चपेट में रहा है। किसानों ने इस साल कर्ज लेकर बीज खरीदा और महंगी खाद खरीदा और फसल बोई है।
आलू किसानों के हितों की रक्षा के लिए विधानसभा सत्र में भी इस मुद्दे को उठाने के बाद सदन में सरकार की ओर से आवश्यक कार्यवाही की बात कही गयी थी, किंतु कोई ठोस पहल नहीं किया गया। यदि ठोस पहल की गयी होती तो किसान लखनऊ की सड़कों पर अपने आलू को फेंकने के लिए बाध्य नहीं होते। आलू की बम्पर पैदावार को देखते हुए सरकार को फूड प्रोसेसिंग यूनिट और अन्य विकल्पों की  तलाश  करनी होगी जिससे किसानों के हितों की रक्षा की जा सके।
 
उन्होनें सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि आलू उत्पादक किसानों के सामने बाजार मूल्य और लागत को लेकर उपजे गहरे संकट के मद्देनजर सरकार आलू का समर्थन मूल्य वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अविलम्ब घोषित कर उनके साथ न्याय करे अन्यथा बड़े पैमाने पर किसान आंदोलन किया जायेगा। 

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