जनपद

सिद्धार्थनगर में 700 गांव बाढ़ से प्रभावित

सग़ीर ए ख़ाकसार
बढनी (सिद्धार्थनगर), 21 अगस्त। नेपाल सीमा से सटा जनपद बलरामपुर और सिद्धार्थनगर भीषण बाढ़ की चपेट में हैं।सिद्धार्थ नगर ज़िले में 1998 में भीषण बाढ़ आई थी।लोगों का कहना है कि इस बार की बाढ़ उससे भी ज़्यादा भयावह है।सिर्फ सिद्धार्थ नगर ज़िले में करीब 700 गांव डूबे हुए हैं। सरकारी मशीनरी,स्वैच्छिक संस्थाएं,सियासी दल,सामाजिक संगठन पूरे शिद्दत से राहत सामग्री बांटने में लगे हैं।हर संभव मदद बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचाई जारही है।
बाढ़ की विभीषिका ने दलीय और क्षेत्रीय सीमाएं तोड़ दीं है।रास्ते कटे हुए हैं।आवागमन बंद है।फलस्वरूप प्रतिनिधि चाह कर भी बाढ़ पीड़ितों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

पड़ोसी ज़िला बलरामपुर के गैंसड़ी विधानसभा के विधायक शैलेश कुमार सिंह उर्फ शैलू अपने तमाम सहयोगियों के साथ अपने विधानसभा के गांव जैतापुर ,लै बुढ़वा, गणेश पुर आदि क्षेत्रों में वाया बढनी इटवा जाने की कोशिश की लेकिन भीषण तबाही की वजह से न जा सके।उनकी सभी कोशिशें बेकार गयीं।शनिवार को बढनी में पत्रकारों से उन्होंने बातचीत में ज़िलों में आयी भीषण बाढ़ की विभीषिका से अवगत कराया।उन्होंने कहा कि यह समय मिलजुकर लोगों की मदद करने का है।ज़रूरत मंदों तक राहत सामग्री पहुंचाना हमारी और सरकार की प्राथमिकता है।उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह से बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए गंभीर है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मांग पर अक्टूबर में केंद्र सरकार का प्रतिनिधिमंडल नेपाल जाएगा और समस्या के समाधान के लिए प्रयास करेगा।इस दौरान शोहरतगढ़ पीजी कालेज छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष व भाजपा के युवा नेता राजकुमार सिंह उर्फ राजूशाही अपने समर्थकों पंकज ,राजकुमार अग्रहरि, संजय जायसवाल, शंभू त्रिपाठी,फकरुद्दीन, सद्दू,सन्तराम अग्रहरि, मनोज पान्डेय आदि के साथ मौजूद रहे।श्री शाही ने अपने क्षेत्र के मडनी- बढनी ढेबरूवा राष्ट्रीय राजमार्ग की दुर्दशा दिखाई जिस पर विधायक ने चिन्ता प्रकट कर उक्त आवश्यक एनएच 730 सडक को मुख्य मंत्री के संज्ञान मे लाकर सदन मे उठाने का आश्वासन भी दिया ।
विधायक के साथ मुख्य रूप से विनय कुमार तिवारी भाजपा जिला उपाध्यक्ष बलरामपुर, धर्मेंद्र प्रताप सिंह कलहंस पूर्व अध्यक्ष एमएलके डिग्री कालेज बलरामपुर, अरूण देव पाठक पूर्व छात्र नेता डिग्री कालेज शोहरतगढ़ ,अमित जायसवाल वरिष्ठ भाजपा नेता पचपेड़वा आदि रहे ।

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