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सीएम आए, डीएम आए लेकिन नहीं आई 400 चिकित्सा कर्मियों की तनख्वाह

बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर

बीआरडी मेडिकल कालेल के पीएमआर विभाग के चिकित्सा कर्मियों को 27 माह से, इंसेफेलाइटिस वार्ड के चिकित्सा कर्मियों को पांच माह से और न्यू नेटल यूनिट के कर्मियों को छह माह से नहीं मिला है वेतन
गोरखपुर, 10 अगस्त। एक महीने में बीआरडी मेडिकल कालेज में दो बार मुख्यमंत्री, दो बार प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा, एक बार प्रमुख सचिव स्वास्थ व अनगिनत बार डीएम, कमिश्नर आ आए फिर भी मेडिकल कालेज में इंसेफेलाइटिस के इलाज से जुड़े करीब 400 चिकित्सा कर्मियों की तनख्वाह नहीं आई। किसी का 27 महीने से वेतन बकाया है तो किसी का छह महीने से। आश्वासन पर आश्वासन मिल रहा लेकिन तनख्वाह नहीं मिल रही।
बीआरडी मेडिकल कालेज के 100 बेड वाले इंसेफेलाइटिस वार्ड, 54 बेड वाले वार्ड संख्या 12 में कार्यरत 378 चिकित्सकों, शिक्षकों, नर्सों व कर्मचारियों को मार्च 2007 से तनख्वाह नहीं मिली है। ये चिकित्सा कर्मी बीआरडी मेडिकल कालेज आने वाले अफसरों, मंत्रियों को प्रतिवेदन देते-देते थक गए हैं लेकिनउन्हें वेतन नहीं मिल सका है। जुलाई माह की 24 तारीख को आए प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी से जब ये चिकित्सा कर्मी मिले तो उन्होंने कहा कि दो दिन में वेतन मिल जाएगा लेकिन एक पखवारा हो गया किसी को भी वेतन नहीं मिला।
इसी तरह पीएमआर विभाग के 11 चिकित्सा कर्मियों को 27 महीने से वेतन नहीं मिला है। उन्होंने 22 जून मेडिकल कालेज में आई प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा अनीता भटनागर जैन से मुलाकात कर वेतन दिलाने की गुहार दिलायी थी। उन्होंने आश्वासन भी दिया लेकिन कुछ नहीं हुआ। दो दिन से प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा अनीता जैन भटनागर बीआरडी मेडिकल कालेज के दौरें पर रहीं लेकिन इस विषय में उन्होंने कुछ भी नहीं कहा।
मेडिकल कालेज के एनएनयू (नियोनेटल यूनिट) में कार्यरत एक दर्जन से अधिक चिकित्सा कर्मियों को भी पिछले छह माह से वेतन नहीं मिला है।
नौ अगस्त को बीआरडी मेडिकल कालेज में मुख्यमंत्री ने दो घंटे तक गोरखपुर-बस्ती के चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तथा बीआरडी मेडिकल कालेज के प्रिसिंपल के साथ मीटिंग की और इंसेफेलाइटिस पर चर्चा की लेकिन यह पता नहीं चल सका कि इन 400 चिकित्सा कर्मियों को वेतन न मिलने पर चर्चा हुई कि नहीं। सूचना विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति में भी इस मुद्दे पर एक शब्द नहीं कहा गया है। ठीक एक माह पहले भी मुख्यमंत्री मेडिकल कालेज आए थे।
सीएम से लेकर बड़े-बड़े अफसरों के दौरों के दौरान बड़ी-बड़ी बातें हुईं लेकिन इंसेफेलाइटिस मरीजों की चिकित्सा में दिन रात लगे इन चिकित्सा कर्मियों को तनख्वाह मिले यह चिंता का विषय नहीं रहा।

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