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सेफ सोसाइटी दे रही है रेलवे स्टेशन पर काम करने वाले बच्चों को नई जिंदगी

सात वर्ष बाद फिर से शिक्षा से जुड़ा प्लेटफार्म पर पानी की बोतलें बेचने वाला लड़का
80 बच्चों को मानव तस्करों के चंगुल में फंसने से बचाया, 218 को उनके घर वालों से मिलाया
गोरखपुर, 29 अगस्त। गोरखपुर रेलवे स्टेशन के अन्दर और बाहर विभिन्न तरीके के कार्यों से जुड़े बच्चों और भटक कर या भाग कर आए बच्चों के लिए सेफ सोसाइटी एक नई रोशनी देने वाली संस्था साबित हो रही है। सेफ सोसाइटी ने गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर अपने दो वर्ष के कार्यकाल में 80 बच्चों को मानव तस्करों के चंगुल में जाने से बचाया तो भटक कर या घर से भाग कर आए 218 बच्चों को उनके परिवार से फिर से जोड़ने का काम किया। यही नहीं संस्था के प्रयास से प्लेटफार्म पर पानी का बोतल बेचने वाला और मादक द्रव्यों के व्यसन में फंसा एक बच्चा फिर से पढ़ाई से जुड़ गया है।

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सेफ सोसाइटी गोरखपुर स्टेशन पर विभिन्न कारणों से अपने से परिवार से बिछुड़ गये बच्चों को उनके परिवार से मिलााने के लिये काम कर रही है। बच्चों के साथ काम करते हुए संस्था ने बच्चों में सकारात्मक परिवर्तन की संकल्पना से समयबद्ध हो प्लेटफार्म पर आजीविका के लिये संघर्ष कर रहे बच्चों केा शिक्षा तथा खेल के प्रति उन्हे आकृष्ट करने का काम शुरू किया है। इसी कोशिश में उसे रेलवे प्लेटफार्म पर पिछले सात वर्ष पानी बोतल बेच रहा बुरी संगत मे पड़कर कई गैर जरुरी आदतों को जीवन का सुख मान लेने वाला 14 वर्ष का बच्चा मिला। संस्था के कार्यकर्ताओं की काउसिलिंग से चंदन में बहुत बड़ा बदलाव आया। उसने न सिर्फ मादक द्रव्यों का सेवन छोड़ दिया बल्कि फिर से अपना कालेज में एडमिशन भी करा लिया। उसने कक्षा नौ में एडमिशन कराया है। अब वह अपने परिवार के प्रति अपना दायित्व निर्वहन भी कर रहा है और भाइयों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठा रहा है।

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सेफ सोसाइटी के कोआर्डिनेटर ब्रजेश ने बताया कि इस बच्चे के माता-पिता की माली हालत दयनीय हैे। इस कारण उसने 7 साल की उम्र में ही घर छोड़ दिया और गोरखपुर रेलवे प्लेट फार्म पर आ गया। पानी के बोतलें बेचते हुए वह मादक पदार्थों का सेवन भी करने लगा लेकिन अब उसने इससे मुक्त होकर एक नई जिंदगी शुरू कर दी है।

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