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हज करने का तरीका बताया गया

गोरखपुर। हज यात्रा पर जाने वाले ज़ायरीनों की हज ट्रेनिंग गोरखनाथ स्थित ज़ाहिदाबाद मस्जिद में रविवार को हुई।

इस मौके पर प्रो. असहाब अली ने कहा कि हज के दौरान 10 काम को याद रखना जरुरी है हज का एहराम बांधना, अराफात में ठहरना, मुज़दलफ़ा में ठहरना, 10 ज़िल्हिज्जा को सिर्फ बड़े शैतान को सात कंकरी अलग-अलग मारना,  सुबह से सेहरी के आखिर वक्त तक कुर्बानी करना, हलक करना यानी सर के बाल मुड़ाना। उन्होंने कहा कि औरतों के लिये सर के बाल लंबाई में बराबर कर उंगली के एक पोर से कुछ ज़्यादा काट देना, तवाफ-ए- ज़ियारत करना यानी हज का तवाफ़ रमल के साथ करना, 10 ज़िलहिज्जा कि सुबह से 12 ज़िलहिज्जा के गुरूब-ए- आफताब से पहले, सफा व मरवा के दरम्यिान सात चक्कर लगाना, 11 और 12 ज़िलहिज्जा को शैतान को सात-सात कंकरियां अलग-अलग मरना ज़वाल के बाद से सहरी के आखिर वक़्त तक, तवाफे विदा करना यानी आखिरी तवाफ़ करना ।

उन्होंने बताया कि मक्का मुकर्रमा की सर ज़मीन पर हज के पांच दिनों को छोड़ कर बाकी दिन ज़्यादा से ज़्यादा नफ्ली तवाफ़ करते रहे। जो अपने पहने हुए कपड़े में किया जाता है एहराम की किए ज़रूरत नही रहती। इसमें रमल यानी अकड़ कर नही चला जाता है। मौलाना सादिक़ अली क़ासमी ने कहा कि मदीना शरीफ ने दो अहम काम ज़रूरी है रौज़ा-ए-अक़दस पर ज़्यादा से ज़्यादा दरूदो-सलाम पढ़ना दूसरा काम चालीस वक़्त की नमाज़ मस्जिदे नबवी में बा जमात अदा करना। ट्रेनिंग में दुआ को याद करने की सलाह दी गई ताकि कोई कमी न रह जाए।
ट्रेनिंग में हाजी आफाक अहमद, वसी अहमद, मौलाना ओबैदुर्रहमान, अशफाक अहमद आदि मौजूद रहे।

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