‘ हज सब्सिडी से एयरलाइंस को फायदा और खामखां मुसलमान बदनाम ’

हज सब्सिडी फंड को हिन्दुस्तान की हर जरूरतमंद औरत व लड़की पर खर्च करने की मांग
– एयरलाइंस का हो ग्लोबल टेंडर
गोरखपुर, 18 जनवरी। केंद्र सरकार द्वारा हज सब्सिडी फंड खत्म किए जाने के फैसले को मुस्लिम समाज ने सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है। वहीं मुस्लिम समाज से एयरलाइंस के ग्लोबल टेंडर की मांग तेजी से उठनी लगी है साथ ही हज सब्सिडी से बचने वाले फंड का इस्तेमाल हिन्दुस्तान की हर मजलूम औरत व जरूरतमंद लड़की के ऊपर खर्च करने की मांग भी शुरू हो गई है वह भी बिना किसी जाति, मजहब, बिरादरी, इलाके व जबान के आधार पर। सरकार को तुष्टिकरण से बचने की नसीहत भी की गयी है।
गोरखपुर न्यूज़ लाइन ने मुस्लिम समाज के कुछ प्रमुख लोगों से बात की तो उन्होंने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय जाहिर की.

इंजीनियर हाजी सेराज अहमद

अब एयरलाइंस का ग्लोबल टेण्डर होना चाहिए – इंजीनियर सेराज अहमद (तुर्कमानपुर) 

 पिछले वर्ष सपरिवार हज किया और हज के सफर का बारीकी से अध्ययन किया तो पता चला की हज सब्सिडी का कोई लाभ हाजियों को नहीं मिलता। हज सब्सिडी खत्म करना सही फैसला है। अब एयरलाइंस का ग्लोबल टेण्डर होना चाहिए। पिछली सरकारें हमारे नाम पर एयर इंडिया को सब्सिडी देती थी। ग्लोबल टेण्डर होने से अन्तर्रराष्ट्रीय स्तर पर प्राइवेट एयरलाइंस सस्ती व बेहतर सेवाएं देंगी जबकि एयर इंडिया मनमाना काम करती थी। रहा सवाल बची हज सब्सिडी फंड का तो मुल्क की तमाम जरूरतमंद माओं और बहनों पर यह फंड खर्च होना चाहिए।

डा. रजिउर्रहमानहज सब्सिडी बंद होने से मुस्लिम कौम को जलील नहीं होना पड़ेगा-डा. रजिउर्रहमान (एचओडी
उर्दू विभाग डीडीयू )

हज सब्सिडी बहुत पहले बंद हो जानी चाहिए थीं। हज सब्सिडी बंद होने से मुस्लिम कौम को जलील नहीं होना पड़ेगा। सरकार को मुबारकबाद की उन्होंने मुसलमानों के सर से जिल्लत हटा दी। सरकार को चाहिए कि वह हाजियों को अख्तियार दे कि वह किसी भी एयरलाइंस से व अपनी कीमत पर हज यात्रा पर जाएं। एयरलाइंस का ग्लोबल टेंडर होना चाहिए। हां सरकार के एक फैसले पर मुझे एतराज है। सरकार हज सब्सिडी फंड में तुष्टिकरण न करें बल्कि हिन्दुस्तान की हर मजलूम औरत व जरूरतमंद लड़की की मदद करें वह भी बिना मजहब, जाति, बिरादरी, जबान व इलाकों के आधार पर। सरकार को हज सब्सिडी फंड सिर्फ मुसलमानों पर ही खर्च करने का निर्णय वापस लेना चाहिए। जब हज सब्सिडी ही खत्म तो कैसा हज सब्सिडी का फंड कैसा ?

मौलाना मकसूद आलम मिस्बाहीहज सब्सिडी से एयरलाइंस वालों को फायदा होता था और मुसलमान खामखां बदनाम होता था-मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही (इमाम, दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद नार्मल)

केंद्र को हज सब्सिडी बंद करने का श्रेय लेने की जरूरत नहीं है। वर्ष 2012 में ही इस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है। हम इसका स्वागत करते हैं। हज सब्सिडी के फंड को मुस्लिम लड़कियों पर ही नहीं बल्कि हिन्दुस्तान की हर जरूरतमंद लड़की की तालीम व महिला सुरक्षा पर खर्च किया जाए। हज के लिए यात्रियों को अपनी सुविधा के अनुसार जाने की इजाज़त होनी चाहिए। हज सब्सिडी  लेने वाले एयर इंडिया के अलावा किसी और एयरलाइंस से यात्रा नहीं कर सकते थे। हज सब्सिडी से एयरलाइंस वालों को फायदा होता था और मुसलमान खामखां बदनाम होता था।

डॉ गयासुद्दीन

हर तरह के धार्मिक प्रोग्राम की सब्सिडी ख़त्म हो -डा. ग़यासुद्दीन (ऊंचवा)

हम सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं। इसके साथ ही मांग भी करते हैं कि तमाम तरह के धार्मिक प्रोग्रामों की बाबत भी ऐसा ही निर्णय लिया जाए और इस बजट को बगैर पक्षपात के लोगों की शिक्षा व सेहत पर खर्च किया जाए।

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