स्वास्थ्य

देवरिया में एईएस प्रभावित गांव विशेष निगरानी में रखे गये

गांव में एईएस निगरानी कार्यक्रम के दौरान मरीजों की जांच पड़ताल करते स्वास्थ्यकर्मी

  गांवों में जाकर सत्यापन कर रही टीम, 200 से अधिक गांवों में कराया गया  एंटी लार्वा दवा का छिड़काव

देवरिया संचारी रोग नियंत्रण अभियान में मलेरिया विभाग कई अन्य विभागों की भी मदद ले रहा है, लक्ष्य है अधिक से अधिक लोग  संचारी रोगों के बारे में जागरूक हों. बीमारी से बचाव के लिए जिला स्तरीय टीम बनाकर गावों में एंटी लार्वा दवा का छिड़काव कराकर स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. इसके साथ ही जिन गांवों में एईएस के मरीज मिले हैं वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है. 

मलेरिया अधिकारी सुधाकर मणि ने बताया कि अबतक उनकी टीम द्वारा 200 गांवों में जाकर ग्रामीणों को जागरूक किया गया है . संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत विशेष रूप से प्रधान के माध्यम से नालियों की सफाईफागिंग और कूड़े का निस्तारण कराया जा रहा है, जिससे बरसात का पानी एकत्रित न हो. इसके साथ ही शिक्षा विभाग की मदद से बच्चों को साफ-सफाई और ठीक ढंग से हाथ धोकर भोजन करने के लिए कहा जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस वर्ष अबतक भटनी ब्लाक के खजुरी करौता गांव में एक, पिपरा दीक्षित और अंबेडकर नगर भीखमपुर एईएस के मरीज एक-एक मिले हैं. इन गांवों में सत्यापन टीम द्वारा सत्यापन कार्यवाही व विशेष निगरानी रखी जा रही है. पीड़ित बच्चों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए जिले के स्वास्थ्य केन्द्रों में समस्त सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी है. सामुदायिक स्तर पर रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए आशा एवं एएनएम को भी जिम्मेदारी दी गयी है. मलेरिया अधिकारी ने बताया कि पिछले तीन वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष मरीजों की संख्या काफी कम है। 2016 में 644 , 2017  में 728 , 2018  में 256  एईएस मरीज मिले। वहीँ 2019  में अबतक 34  मरीज मिले हैं.

जेई-एईएस लेकर विभाग सतर्क   

 इस मामले में सीएमओ डॉ धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि जेई-एईएस को लेकर विभाग सतर्क है, संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत जिला स्तरीय टीम गठित कर कस्बे सहित गांवों में एंटी लार्वा दवा का छिड़काव व सत्यापन का कार्य कराया जा रहा है. बीमारी से बचाव के लिए लोगों  को साफ-सफाई के प्रति जागरूक किया जा रहा है.

 

क्या है एईएस (मस्तिष्क ज्वर) ?

जिला अस्पताल के पीकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट ) प्रभारी व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ एके वर्मा  ने बताया कि जेई-एईएस को मस्तिष्क ज्वर भी कहा जाता है। समय से ईलाज कराने पर यह ठीक हो सकता है। अत्यधिक गर्मी की शुरुआत होने से एईएस से ग्रसित बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी शुरू होती है, जो बारिश की शुरुआत पर खत्म हो जाती है। जबकि जेई की शुरुआत बारिश के बाद शुरू होती है एवं ठंड की शुरुआत होते ही खत्म हो जाती है। इनके लक्षणों को जानकर इसका सटीक उपचार संभव है। तेज बुखार आना, पूरे शरीर या किसी खास अंग में ऐंठन होनादांत का चढ़ जाना, बच्चे का सुस्त होना या बेहोश हो जाना एईएस के लक्षण हैं। उन्होंने बताया कि बच्चे को मस्तिष्क ज्वर से बचाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी है। बच्चों को खाली पेट लीची ना खिलाएं, अधपके एवं कच्चे लीची बच्चों को खाने नहीं देंबच्चों को गर्म कपड़े या कम्बल में ना लिटाएंबेहोशी की हालत में बच्चे के मुंह में बाहर से कुछ भी ना दें, बच्चे की गर्दन झुका हुआ नहीं रहने दें।

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