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अति कुपोषित बच्चों को नया जीवन दे रही हैं आंगनबाड़ी सुपरवाईजर मोहित

गोरखपुर. शहर के गंगानगर टोले में मजदूरी करने वाले मकसूदन और उनकी पत्नी सीमा के शिवम और मोहिनी दो ही संतान हैं। फरवरी की 25 तारीख को जब बच्चों को पोषण पुनर्वांस केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया गया तो शिवम का वजन 8.3 किलो था और मोहनी का वजन 8 किलो। दोनों अति कुपोषित थे और लाल श्रेणी में सबसे नीचे थे। पांच मार्च को जब दोनों बच्चे एनआरसी से डिस्चार्ज हुए तो उनका वजह एक किलो बढ़ चुका था और अब दोनों का वजह 11.1 किलो है।

यह चमत्कार शायद नहीं हो पाता अगर इस परिवार में आंगनबाड़ी सुपरवाईजर (मुख्य सेविका) मोहित सक्सेना लगातार दखल न देंतीं और एक सरकारी कर्मचारी की भूमिका से ऊपर उठ कर कदम न उठातीं।

छह महीने के भीतर मोहित ऐसे 13 बच्चों को एनआरसी सेंटर में भर्ती करवा कर उनमें से 9 बच्चों को स्वस्थ जीवन दे चुकी हैं। अब वह कार्यकर्ताओं के साथ एक-एक बच्चे का फालो अप भी कर रही हैं।

शिवम और मोहिनी की मां सीमा बताती हैं कि उनके घर बच्चों को पल्स पोलियो का ड्राप पिलाने पहुंचीं आंगनबाड़ी सहायिका मंजू देवी ने बताया था कि उनके बच्चे अति कुपोषित (सैम) हैं और बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र लाने को कहा। जब बच्चे केंद्र पहुंचे तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उषा कुशवाहा ने बच्चों का वजन किया और अति शीघ्र उन्हें बीआरडी मेडिकल कालेज में स्थित एनआरसी में भर्ती कराने को कहा।

सीमा तैयार नहीं हुईं क्योंकि उनके पति पेशे से मजदूर हैं। अगर वह बच्चों के साथ अस्पताल चली जातीं तो दो जून की रोटी भी नहीं मिल पाती। उषा ने अपने सुपरवाईजर मोहित से सम्पर्क किया। मोहित ने सीमा और उसके पति दोनों को साथ बैठा कर काउंसिलिंग किया। आश्वासन दिया कि बच्चों की देखरेख के लिए अलग से सहायिका देंगी। तब जाकर यह दम्पत्ति एनआरसी जाने को तैयार हुआ। मोहित ने सहायिकाओं को प्रेरित कर बच्चों के अभिभावकों के साथ एनआरसी सेंटर में अलग-अलग शिफ्ट में चार सहायिकाओं को तैनात किया। बच्चों का इलाज चला और वे स्वस्थ हो गए।

पति, सास, ससुर को भी समझाया

सुपरवाईजर मोहित सक्सेना का कहना है कि हमारी कार्यकर्ता बड़ी तन्मयता से अति कुपोषित बच्चों के अभिभावकों को एनआरसी सेंटर ले जाने के लिए प्रेरित करती हैं लेकिन लोग आसानी से तैयार नहीं होते। उन्होंने बताया कि सितम्बर 2018 से लेकर मार्च 2019 के बीच उनकी टीम ने 17 बच्चों को एनआरसी ले जाने के लिए चिन्हित किया था और ले भी गए। वहां सभी बच्चों को एडमिट करने का सुझाव दिया गया लेकिन कोई तैयार नहीं था। बच्चों को भर्ती करने के लिए दादा, दादी, सास, ससुर, पति सभी के पास टीम के साथ जाकर मोटिवेट किया गया लेकिन सिर्फ 13 बच्चों के अभिभावक एडमिशन के लिए तैयार हुए।

मोहित बताती हैं कि झुंगिया में एक बच्चे की मां ने उनसे कहा कि वह काम छोड़ कर एनआरसी जाएगी तो मालिक उसे नौकरी से निकाल देंगे। टीम मालिक के पास गई। वह तैयार भी हो गए लेकिन महिला ने बच्चे को भर्ती नहीं कराया। मोहित ने बताया कि जिन 13 बच्चों को भर्ती कराया गया उनमें से 5 बच्चों के माता पिता उन्हें अस्पताल से वापस लेते आए। इन बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि अगर हफ्ता-दस दिन अस्पताल में रहेंगे तो रोजी-रोटी कैसे चलेगी।

उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ज्योति, किरन, नीता, सुनीता, शांति, सरोज और पुष्पा की मदद से जंगल मातादीन निवासी सुदर्शन की बेटी सौम्या, सेमरा नंबर एक निवासी विजय का बेटा दिव्यांश, सेमरा नंबर दो निवासी अंकित का बेटा आयुष, भेड़यागढ़ निवासी पप्पू की बेटी लाडो, हकीम नंबर एक के निवासी बृजेश का बेटा यश, मानबेला निवासी रामस्वरूप की बेटी कुसुम और यहीं के बंगला टोला निवासी 2.9 वर्षीय अनुराग को एनआरसी में भर्ती कराया गया था और अब यह बच्चे स्वस्थ हैं। मोहित का कहना है कि कई बार अभिभावकों को मोटिवेट करने सीडीपीओ भी उनके साथ गये हैं।

समुदाय की मदद आवश्यक

शहरी बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) पीके श्रीवास्तव ने बताया कि कुपोषण को दूर करने में मोहित सक्सेना जैसे कार्यकर्ताओं के प्रयास तभी सफल होंगे जब समुदाय के लोग मदद करेंगे। जिला कार्यक्रम अधिकारी हेमंत कुमार सिंह के निर्देशों के अनुसार सुपरवाईजर और कार्यकर्ता लोगों को लगातार प्रेरित करती हैं कि वे अपने बच्चों को एनआरसी सेंटर में भर्ती करावें लेकिन लोग तैयार नहीं होते। अगर समाज में सक्रिय लोग मदद करें तो यह काम और आसान होगा।

  • एनआरसी सेंटर की सुविधाएं
    • जनपद के बीआरडी मेडिकल कालेज में एनआरसी सेंटर है और यहां सभी सुविधाएं निशुल्क हैं।
    • यहां बच्चों के इलाज के अलावा दोनों समय भोजन और एक केयर टेकर को भी निशुल्क भोजन मिलता है।
    • भर्ती बच्चों को दोनों समय दूध और अंडा दिया जाता है।
    • जो अभिभावक बच्चे के साथ रहते हैं उन्हें 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से उनके खाते में दिए जाते हैं।
    • जो आंगनबाड़ी बच्चों को एनआरसी ले जाती हैं उन्हें सिर्फ एक बार 50 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
    • केंद्र में भर्ती कराने से बच्चे को नया जीवन मिलता है। केंद्र में प्रशिक्षित चिकित्सक और स्टाफ नर्स बच्चों की देखभाल करती हैं।

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