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बड़ी गंडक नदी में समाता जा रहा है कचहरी टोला

कुशीनगर जिले में बड़ी गंडक नदी की कटान से तमकुही तहसील के एपी तटबंध के पास का अहिरौलीदान का कचहरी टोला पूरी तरह से नदी में समाता जा रहा है. एक सप्ताह में गांव के 30 घर नदी की कटान से कट गए. तीन दर्जन से अधिक लोगों ने अपने घर खुद तोड़ दिए हैं. गुरुवार को अपना घर तोड़ते समय मलबे में दब जाने से 3 लोग घायल हो गए जिसमें से एक व्यक्ति की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई.

जुलाई महीने में अहिरौलीदान के चार टोले के 30 घर नदी की कटान की जद में आकार खत्म हो गए. इन गांवों में पहले से 200 से अधिक घर नदी में समा चुके हैं.

अगस्त महीने में नदी सबसे अधिक कचहरी टोले में कटान कर रही है. इस तोले में तमाम लोगों के पक्के मकान थे जो नदी की कटान में कटते जा रहे हैं.

गुरुवार को इसी गांव के जोगी सिंह अपना पक्का मकान तोड़ रहे थे ताकि ईंट आदि बचा सकें. उनके इस कार्य में रिश्तेदार मुन्ना सिंह मदद कर रहे थे. इसी दौरान मकान का एक हिस्सा ढह गया और जोगी सिंह, मुन्ना सिंह उसकी चपेट में आ गये और दोनों घायल हो गए. अस्पताल ले जाते समय मुन्ना सिंह की मौत हो गई.

अगस्त महीने के 10 दिनों में इस गांव के 30 घर कट गए. ये घर राम नरेश सिंह, पारस सिंह, छोटेलाल सिंह, बंका सिंह, उमेश सिंह, चन्द्रिका सिंह, जोगेन्दर सिंह, वीरेंद्र सिंह, ज्ञानी सिंह, रामचंद्र सिंह के थे. इनमें से कुछ घर दो मंजिला थे.

जुलाई महीने में हरिकिशुन सिंह, अशोक सिंह, गया प्रसाद सिंह, रामज्ञा सिंह, पारस सिंह, खरखुटा टोला के ब्रह्मा चौहान, नान्हू चौहान आदि का घर नदी की कटान के दायरे में आ गया और नदी में समा गया.

इस गांव में करीब 100 घर हैं. तीन दर्जन से अधिक लोग अपने घर को खुद तोड़ चुके हैं और परिवार सहित पलायन कर रहे हैं. नदी की कटान की गति को देखते हुए लगता है कि एक पखवारे में कचहरी टोला का अस्तित्व खत्म हो जायेगा.

बड़ी गंडक नदी नारायणी नेपाल से होकर यूपी के महराजगंज और कुशीनगर जिले से गुजरते हुए बिहार जाकर सोनपुर में गंगा नदी में मिल जाती है.

हर वर्ष नदी की बाढ से तटवर्ती गांवों के लोग प्रभावित होते हैं. नदी की धारा में जल्दी-जल्दी नाटकीय बदलाव होता है जिसके कारण प्रति वर्ष खेत और लोगों के घर नदी में समा जाते हैं.

नदी पर एपी तटबंध बना है. तटबंध के आस-पास अहिरौलीदान, बाघाचैर, नोनिया पट्टी, फरसाछापर, बाघ खास, विरवट कोन्हवलिया, जवही दयाल, बघवा जगदीश, परसा खिरसिया, जंगली पट्टी, पिपराघाट, दोमाठ, मठिया श्रीराम, वेदूपार, देड़ियारी, सिसवा दीगर, सिसवा अव्वल, खैरटिया, मुहेद छापर आदि गांव है.

अहिरौलीदान के एक दर्जन टोले-छितु टोला, बैरिया, खरखूरा, मदरही, नोनिया पट्टी आदि तटबंध के भीतर हैं. ये गांव जब बसे थे तो नदी उनसे काफी दूर थी और बाढ़ के वक्त ही उनके नजदीक नदी का पानी पहुंचता था. वर्ष 2012 से नदी का रूख तटबंध की तरफ मुड़ता चला गया और अब नदी अहिरौलीदान गांव के एक दर्जन टोलों के काफी करीब आ गई है। यही गांव नदी की काटन से प्रभावित हैं. एक पखवारे से नदी अहिरौलीदान गांव के 3-4 टोलों में कटान कर रही है. कटान से सबसे अधिक प्रभावित तटबंध के किलोमीटर 13 से 14 किलोमीटर तक का क्षेत्र है.

ग्रामीणों द्वारा कटान की जानकारी अफसरों को दी गई. अफसरों ने मौके का निरिक्षण किया लेकिन कटान को रोकने का कोई उपाय नहीं किया.

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