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विचार

जनतंत्र के महाजन का पुनर्जन्म

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पंकज के जायसवाल बैंकों द्वारा सेवा शुल्कों में बढ़ोत्तरी के निर्णय को समझने के लिए हमें बैंकों के राष्ट्रीयकरण के इतिहास के पन्नों में झांकना पड़ेगा। हमें याद करना चाहिए कि देश की जनता को बैंकों की महाजनी से मुक्त कर बैंकों का राष्ट्रीयकरण करते वक़्त तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने कहा था कि “बैंकिंग प्रणाली जैसी संस्था, जो ...

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गुरमेहर कौर की आवाज सुनिए और उनकी निडरता का सम्मान करिए

पेंटिंग_राकेश कुमार दिवाकर

प्रो सदानंद शाही  लगभग एक दशक पहले मैं विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केन्द्र से जुडा था।उस दौर में हमने महिला अध्ययन में पाठ्यक्रम आदि बनाये।उस समय हमें अपने कुछ पुरुष सहकर्मियों की टिप्पणियां हैरत में डाल देतीं।अपने सारे वैदुष्य और पांडित्य को धता बताते हुए वे प्राय:  कहते रहते कि कहां फंसे हुए हो -‘महिलायें तो वैसे ही बेहाथ हो ...

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भूटान : सादगी का वैभव  

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 जावेद अनीस प्रकृति की गोद में बसा भूटान एक ऐसा देश है जो खुशहाली पर जोर देता है. जहाँ पूरी दुनिया का जोर जीडीपी यानी “सकल घरेलू उत्पाद” पर होता है वहीँ भूटान अपने नागिरकों का जीवन स्तर जीएनएच यानी “सकल राष्ट्रीय ख़ुशी” से नापता है. यह एक बड़ा फर्क है जो भूटान को पूरी दुनिया से अलग करता है. भूटान की हवाओं में ...

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मोदी सरकार का “ कांग्रेसी ” बजट

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जावेद अनीस 2014 में नरेंद्र मोदी बदलाव के नारे के साथ सत्ता में आये थे और जनता को भी उनसे बड़ी उम्मीदें थीं. लेकिन तीन साल पूरे होने को आये हैं और मोदी सरकार कोई नयी लकीर खीचने में नाकाम रही है, मोटे तौर पर वह वह पिछली सरकार के नीतियों का ही अनुसरण करते हुए दिखाई पड़ रही है. ...

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हिजड़ा समुदाय का रहस्य लोक

Image source - 'Myself Mona Ahmed', Dayanita Singh and Mona Ahmed, Scalo Verlag Ac, 2001

इना गोयल, शोध छात्रा यूनिवर्सिटी कॉलेज लन्दन, यू.के. ( यह लेख हिजड़ा समुदाय पर शोध करते हुए इस बात को समझने का प्रयास है कि हिजडों की भूमिका पर अपना मत रखने के क्या अर्थ हैं और हिजड़ा बनने की प्रक्रियायें क्या हैं ।  यह अध्ययन दिल्ली, भारत में रहने वाले हिजड़ा समुदाय के नृजातीय (Ethnographic) अध्ययन पर आधारित है ...

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नोटबंदी : असर-बेअसर

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जावेद अनीस बीते साल 8 नवम्बर 2016 को रात आठ बजे प्रधानमंत्री ने अचानक 500 और 1000 के नोटों को बंद करने की घोषणा की थी तो यह भारतीयों के लिए सबसे बड़ी घटना बन गयी जिसकी दुनियाभर में चर्चा हुई. इस फैसले की वजह से देश की 86 प्रतिशत मुद्रा एक ही झटके में चलन से बाहर हो गयी, ...

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कपड़े में अटका ‘ ईमान ’

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नासिरुद्दीन, वरिष्ठ पत्रकार एक फोटो है. फोटो में एक नौजवान लड़का और लड़की हैं. दोनों सज-धज कर बैठे हैं. साथ में उनकी छोटी सी बेटी है. आम आंखों को इस तस्वीर में दिलकश जोड़ी दिख रही है. एक नन्हीं प्यारी सी बच्ची दिख रही है. लेकिन, कुछ खास लोगों की खास आंखों को सिर्फ लड़की का खुला चेहरा, उसकी बांहें, उसका ...

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हिंसा में कोई मर्दानगी नहीं

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नासिरुद्दीन वरिष्ठ पत्रकार रघुवीर सहाय की कविता ‘औरत की जिंदगी’ की कुछ पंक्तियां हैं- कई कोठरियां थीं कतार में/ उनमें किसी में एक औरत ले जाई गयी/ थोड़ी देर बाद उसका रोना सुनाई दिया/ उसी रोने से हमें जाननी थी एक पूरी कथा/ उसके बचपन से जवानी तक की कथा… तीन लाख 27 हजार 394- महज गिनने के लिए यह ...

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‘ जे नोटवा बंद कइले बा उहो चटनी ओटनी खात बा का ’

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  रमाशंकर चौधरी किसुन कुशवाहा उर्फ महतो खड्डा विधान सभा क्षेत्र से भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहे एक नेता के प्रबल समर्थक हैं लेकिन उससे ज्यादे मोदी भक्त हैं। खेतिहर मजदूर किसुन की आदत में शुमार है कि वह सुबह चाय पीने चौराहे पर जाते हैं और सभी हिन्दी अखबार जरुर पढते है। अखबारों से मिली सूचनाओं से ...

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पूंजीवाद और साम्राज्यवाद के खिलाफ अनवरत संघर्ष का अप्रितम योद्धा

फिदेल कास्त्रो

पूंजीवाद, और साम्राज्यवाद के खिलाफ अनवरत संघर्ष का अप्रितम योद्धा सग़ीर ए खाकसार, वरिष्ठ पत्रकार  वो शख्स अमेरिका की उधार दी हुई सांसों पर जीना नहीं चाहता था।उसे किसी के बनाये और थोपे गए वसूल पसन्द नहीं थे। आजीवन अमेरिकी नेतृत्व को चुनौती देना , प्रतिबंध झेलना बर्दाश्त था लेकिन विश्व चौधरी के सामने सर झुकाना कत्तई मंज़ूर नहीं था। ...

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