स्वास्थ्य

डेरवा पीएचसी : कभी बाढ़ में डूबा रहता था, आज है प्रदेश में अव्वल

गोरखपुर। कायाकल्प योजना के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में साफ-सफाई व संक्रमण नियंत्रण के मानक प्रोटोकाॅल के पालन में अनुकरणीय प्रदर्शन करने वाले संस्थानों में गोरखपुर जिले का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डेरवा ने पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

जिला मुख्यालय से करीब 75 किमी दूर इस पीएचसी का चयन भारत सरकार के नेशनल क्वालिटी एश्योरेंश सर्विसेज (एनक्वास) ने किया है। इसके मानक प्रोटोकाॅल पर यह पीएचसी 84.7 अंक पाकर अव्वल रहा। एनक्वास की टीम अगले महीने डेरवा पहुंच रही है।

उल्लेखनीय है कि डेरवा पीएचसी 1998 की बाढ़ मेें पूरी तरह डूब गया था। बाढ़ के बाद इसे बड़हलगंज सीएचसी में शिफ्ट करना पड़ा। 2017 में भारत सरकार के कायाकल्प योजना में आने से पहले इस पीएचसी की हालत खस्ताहाल थी।

तत्कालीन नोडल अधिकारी डा. एनके पांडेय बताते हैं कि यहां कार्य करना बड़ा ही दुरुह था। उन्होंने जिला क्वालिटी एश्योरेंस मैनेजर डा. मुस्तफा के साथ मिलकर केंद्र के कायाकल्प का काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि भवनों की मरम्मत व साफ-सफाई के बाद डेरवा पीएचसी के आसपास के 206 गांवों में अच्छा संदेश गया। प्रभारी चिकित्साधिकारी व अन्य स्टाॅफ के रात्रिकालीन निवास से बदलाव में और तेजी आई।

 

पीएचसी परिसर में एक रैन बसेरा भी बनाया गया है। सड़क निर्माण के साथ परिसर में हर्बल गाॅर्डेन भी बनाया गया है। यहां अलग से फार्मेसी स्टोर बनाया गया है साथ ही आईईसी मैटेरियल से सुसज्जित ट्रेनिंग हाल तैयार किया गया। मरीजों के लिए वाटर कूलर, गीजर, वाशिंग मशीन की व्यवस्था हुई। पूरे पीएचसी को सीसीटीवी कैमरे से लैस किया गया।

मुख्य चिकित्साधिकारी श्रीकांत तिवारी ने बताया कि केरल राज्य की तर्ज पर स्थानीय लोगों की मदद से कुछ अतिरिक्त सुविाधाएं जुटाने का भी प्रयास किया गया है। जिसके तहत ग्राम प्रधान व स्थानीय विधायक के सहयोग से मरीजों के लिए प्रसाधन, बैठने के लिए टिनशेड व परिसर के पक्की सड़क का निर्माण किया गया है।

इस पीएचसी पर एक केंद्रीकृत आक्सीजन प्लांट से ईटीसी वार्ड, जेएसवाई वार्ड, इमरजेंसी वार्ड और लेबर रूम में आक्सीजन सप्लाई की जाती है। यहां अलग से न्यू बार्न केयर यूनिट भी बनाया गया है। लैब असिस्टेंट को प्रशिक्षित कर लैब का काम तेज कराया गया। लैब में ईटीपी का इंतजाम है जिससे दूषित द्रव नाले में विसर्जित किया जाता है। यहां आयुष ओपीडी, एलोपैथिक ओपीडी, नेत्र परीक्षण केंद्र, प्रभारी चिकित्साधिकारी कक्ष और दो बेड का इमरजेंसी वार्ड, लैब, फार्मेसी कार्नर एक ही ब्लाक में अलग-अलग कमरों में संचालित हो रहे हैं।

इस समय डेरवा पीएचसी की ओपीडी करीब 200-250 के बीच है। संस्थागत प्रसव पहले की तुलना में 25 से बढ़कर 100 प्रति माह है। नियमित टीकाकरण की संख्या 50 के करीब पहुंच चुकी है। पीएचसी में पब्लिक एनाउंसमेंट सिस्टम भी लगा हुआ है। यहां कुल नौ सरकारी आवासों में प्रभारी चिकित्साधिकारी समेत एक चिकित्साधिकारी, दो स्टाफ नर्स, दो एएनएम, एक फार्मासिस्ट और एक वार्ड बाॅय रात्रिकालीन निवास करते हैं। पीएचसी पर दो एंबुलेंस तैनात रहती है। वर्तमान में यह पीएचसी 2.8 लाख की आबादी को कवर कर रहा है। यहां एक स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी की भी नियुक्ति की गई है।

उक्त सभी बदलावों का असर यह रहा कि वर्ष 2017 में कायाकल्प योजना में इस पीएचसी का जिले में पहला स्थान जबकि राज्य में 79.4 अंको के साथ चौथा स्थान था। अब वित्तीय वर्ष 2018-19 के योजना में यह पूरे प्रदेश में अव्वल हो गया। फिलहाल यहां 10 ओपीडी और 10 आईपीडी मरीजों का फीडबैक रोजाना लिया जाता है। जिसके आधार पर व्यवस्था में निरंतर सुधार किया जा रहा है।

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