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कुशीनगर में कर्ज में डूबे किसान ने आत्महत्या की

आत्महत्या करने वाले किसान गोविंद सिंह का घर और परिजन

आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के आरोप में किसान के दो भाई गिरफ्तार

कुशीनगर. कसया थाना क्षेत्र के ग्राम सभा धुरिया में बुधवार की सुबह कर्ज में डूबे किसान ने आत्महत्या कर ली। किसान गोविंद सिंह का शव फंदे से लटकता मिला। गोविंद सिंह पर चार लाख का खर्च था। यह कर्ज उसने खेतीबारी, मकान बनवाने व पत्नी का इलाज कराने के लिए लिया था। ये सभी कर्ज गांवों में समूहों के नाम पर सूदखोरों द्वारा चलाए गए नेटवर्क से लिया गया था।

किसान का अपने चाचा की जमीन को लेकर अपने भाइयों से विवाद भी था। पुलिस ने किसान की आत्महत्या के एक दिन बाद उसके घर से एक डायरी बरामद की जिसमें उसने आत्महत्या का कारण लिखा था। इस आधार पर पुलिस ने गोविंद सिंह के दो भाइयों को गिरफ्तार किया है।

चाचा की जमीन को लेकर भाइयों में कलह

किसान गोविंद सिंह मंगलवार की रात परिवार के साथ भोजन कर सोए। सुबह उनका शव कमरे की दीवार में बने होल में फंसी रस्सी के फंदे से लटका मिला। उनके 14 वर्षीय पुत्र मनीष ने घटना की लिखित जानकारी पुलिस को दी। उसने बताया कि खेती, मकान बनवाने, मां का इलाज आदि के लिए चार लाख का कर्ज लिया था। उसकी अदायगी को लेकर वह परेशान व चिंतित थे।

गोविंद सिंह के घर में पत्नी के अलावा 18 वर्ष की एक बेटी और 14 वर्ष का एक बेटा है। उनके पास खेती की कुछ जमीन थी जिसमें खेतीबारी करते थे। गोविंद के दो भाई-रविन्द्र सिंह व भगवान सिंह हैं जो उनसे अलग रहते हैं। गोविंद के चाचा बांके सिंह ने शादी नहीं की थी। वह गोविंद के साथ रहते थे। उन्होंने अपने कुछ खेत गोविंद की पत्नी किरन के नाम बैनामा कर दिया था। शेष बची जमीन उन्होंने किरन के नाम वसीयत कर दी। इसको लेकर गोविंद और उनके दोनों भाइयों में विवाद शुरू हुआ। उसके दोनों भाई चाचा बांके सिंह के इस निर्णय से खुश नहीं थे। चाचा बांके सिंह ने पूर्व में एक वसीयत लिखी थी जिसमें तीनों भाइयों को बराबर का हकदार बनाया गया था।

चाचा की जमीन को लेकर तीनों भाइयों में कलह हो गई। आखिर में पंचायत में मामला सुलझा जिसमें चाचा की जमीन तीनों भाइयों में बराबर बांट दी गई। पूर्व में बांके सिंह द्वारा बैनामा की गई जमीन भी वापस हो गई। इस जमीन का बैनामा कराने में गोविंद सिंह का 1.27 लाख रूपए खर्च हुए थे। यह उन्होंने कर्ज लिया था। चाचा की जमीन के बंटवारे के बाद बैनामे की यह रकम उन्हें भाइयों द्वारा नहीं मिली।

खेतीबारी, बीमारी और मकान बनवाने के लिए भी लिया कर्ज

गोविंद सिंह ने मकान बनवाने के लिए भी कर्ज लिया था। यह कर्ज सूदखोरों द्वारा गांवों में सूमहों के नाम पर संचालित नेटवर्क से लिया गया था। इसमें पांच फीसदी ब्याज पर कर्ज लिया जाता है। ब्याज की रकम हर सप्ताह वसूली जाती है।
इसी बीच गोविंद की पत्नी की तबियत खराब रहने लगी। उसको फेफड़े सम्बन्धी बीमारी थी। उसका इलाज लखनउ और दिल्ली में चला। इलाज में भी काफी खर्च हुआ। खुद गोविंद भी हर्निया से पीड़ित थे. उसका भी इलाज चला. इस कारण कर्ज और बढ़ गया। कर्ज चुकाने के लिए गोविद ने जमीन रेहन पर रख दी. कुछ जमीन बेच भी दी। इसके बावजूद उसके उपर चार लाख का कर्ज चढ़ा हुआ था। खेती की जमीन बेचने और उसे रेहन पर रख देने के कारण गोेविंद की आय पूरी तरह से खत्म हो गई थी। घर का खर्च चलना मुश्किल हो गया था। बेटी की शाादी की चिंता उसे अलग से खाए जा रही थी।

इन परेशानियों से उबरने का उसे कोई रास्ता नहीं सूझा और उसने आत्महत्या कर ली।

डायरी में लिखीं कर्ज का दुष्चक्र

अपने कर्ज, चाचा के जमीन का विवाद, पत्नी की बीमारी व खेती बारी की परेशानियों को उन्होंने अपनी डायरी में लिखा था। गुरूवार को जब एसडीएम अभिषेक पांडेय और एसएचओ धुरिया गांव एक बार फिर पहुंचे और किरन ने बातचीत की तो डायरी का जिक्र्र आया। डायरी एक पन्ने में कर्ज में डूबे रहने और आत्महत्या करने का जिक्र् था। इस आधार पर पुलिस ने कसया थाने के निरीक्षक जितेन्द्र सिंह की तहरीर पर मुकदमा संख्या 1860/19 धारा 306 के तहत गोविंद सिंह के चाचा बांके सिंह, रविन्द्र सिंह व भगवान सिंह पर केस दर्ज कर रविन्द्र और भगवान को गिरफ्तार कर लिया। बांके काफी वृद्ध हो गए हैं। इसलिए उन्हें गिरफतार नहीं किया गया है।

धुरिया गांव में गुरुवार को पहुंचे कांग्रेस विधायक मंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू

आयुष्मान योजना का नहीं मिला लाभ, किसान सम्मान निधि भी नहीं मिली
कर्ज, बीमारी और खेतीबारी के संकट से जूझ रहे बांके सिंह की सरकारी योजनाओं से कोई मदद नहीं मिली। वह ओर उनका परिवार आयुष्मान योजना में कवर नहीं था। इस कारण उन्हें इलाज में काफी खर्च करना पड़ा। उन्हें छह महीने से राशन भी नहीं मिल रहा था क्योंकि पीओएस मशीन में उनका अंगूठा मैच नहीं कर रहा था। किसान सम्मान निधि का भी पैसा उन्हें नहीं मिला. उन्हें केंद्र या प्रदेश सरकार की आवास योजना का भी लाभ नहीं मिला. इस तरह कर्ज के मकड़जाल में फंसे एक बेबस किसान को सरकार की कोई योजना राहत नहीं दे पाई और उसे गले में फांसी का फंदा डालना पड़ा। इस घटना ने केन्द्र व प्रदेश की कल्याणकारी योजनाओं की विसंगतियों की भी पोल खोली है।

विधानसभा में उठेगा किसान की आत्महत्या और कर्ज माफ़ी का मामला

कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू गुरूवार को धुरिया गांव पहुंचे। उन्होंने आत्महत्या करने वाले किसान गोविंद सिंह के परिजनों और ग्रामवासियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार किसानों के हित के लिए बड़े- बड़े वादे व बड़ी -बड़ी योजनाएं संचालित कर रही है वहीँ दूसरी तरफ कर्ज में डूबे किसानों के आत्महत्याओं का दौर थमता नजर नही आ रहा है. किसान लगातार आत्महत्या कर रहे है जो सरकार के नाकामी को दर्शाता है. उन्होंने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता करते हुए हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया और कहा कि कर्ज माफी के मुद्दे को विधान सभा में उठाया जायेगा.

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