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नहीं दिखा ईद का चांद , अलविदा आज

गोरखपुर, 15 जून। ईद-उल-फित्र का चांद गुरुवार को नहीं दिखा। शहर में मौसम साफ न होने व कहीं से भी चांद की तस्दीक न मिलने की वजह से शुक्रवार 15 जून को रोजा रखकर अलविदा मनाया जायेगा। यह तय हो गया है कि देवबंदी 16 जून को ईद मनायेंगे लेकिन सुन्नी बरेलवी मुसलमान कल 29वां रोजा मुकम्मल करके ईद के चांद का दीदार करने की कोशिश करेंगे। अगर चांद की तस्दीक हुई तो सुन्नी बरेलवी मुसलमान भी 16 जून को ईद मनायेंगे। वहीं अगर चांद की तस्दीक नहीं हुई तो वह 30 रोजा मुकम्मल करके 17 जून को ईद मनायेंगे।

गुरुवार को चांद के दीदार के लिए लोग शाम इफ्तार के बाद आसमान पर नजर टिकाये रहे लेकिन मौसम साफ नहीं होने से चांद नहीं दिखा। लोग दूर-दराज के रिश्तेदारों, संबंधियों से भी चांद दिखाई देने की खबरें पूछते रहे।

ईद का चांद दिखाई देने की जानकारी लोग सोशल मीडिया पर लेते रहे। ईद के चांद के दीदार को लोगों ने जहां देशभर में रिश्तेदारों और संबंधियों से जानकारी जुटाई। वहीं सऊदी अरब, दुबई, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया आदि देशों से चांद देखे जाने की खबर पूछते रहे।

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वहीं शहर की मस्जिदों में अलविदा (रमजान के अंतिम जुमा की नमाज) की तैयारी पूरी कर ली गयी है। शहर व ग्रामीण अंचल की विभिन्न मस्जिदों में रमजान के अंतिम जुमा की नमाज पढ़कर दुआएं मांगी जायेंगी। अपराह्न 12:30 बजे से लेकर अपराह्न 2:30 बजे तक विभिन्न मस्जिदों में जुमा की नमाज अदा की जायेगी। इसके लिए विशेष व्यवस्था की गयी है। मस्जिदों में तकरीर और अलविदाई खुतबा होगा। इसके बाद मुस्लिम समाज के लोग दो रकात जुमा की फर्ज नमाज अदा करेंगे।

सब्जपोश मस्जिद जाफरा बाजार में हाफिज रहमत अली निजामी, नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद में मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही, गाजी मस्जिद गाजी रौजा में हाफिज रेयाज अहमद, रहमतनगर जामा मस्जिद में मौलाना अली अहमद, चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में हाफिज महमूद रजा, खादिम हुसैन मस्जिद तिवारीपुर में हाफिज व कारी अफजल बरकाती, गौसिया मस्जिद छोटे काजीपुर में मौलाना मोहम्मद अहमद, शेख झाऊं साहबगंज में मौलाना फैजुल्लाह कादरी, नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में मौलाना असलम रजवी, मस्जिद सुभानिया तकिया कवलदह में मौलाना जहांगीर अजीजी, हाफिज रेयाज अहमद, रसूलपुर जामा मस्जिद में मौलाना शादाब आलम आदि रमजान के अंतिम जुमा की नमाज पढ़ायेंगे।

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हाफिज रेयाज अहमद ने बताया कि रमजान के महीने के आखिरी जुमा को अलविदा या जुमातुल विदा भी कहते हैं। यूं तो इस माह के हर दिन की अहमियत है, लेकिन जुमा को और दिनों का सरदार कहा जाता है। इसलिए इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। इसे छोटी ईद भी कहा जाता हैं। रमजान के आखिरी जुमा की नमाज से रमजान के समापन का संदेश मिलता है। रहमत भरा महीना जाने के गम में अलविदा-अलविदा माह-ए-रमजान अलविदा कहा जाता हैं। ईद के आने की खुशी जहां लोगों में होती है, वहीं इस रहमत भरे महीने के जाने का गम भी है। हाफिज रहमत अली ने बताया कि अलविदा के माने रुखसत करना है। अलविदा रमजान के आखिरी जुमा को कहते है। इसके बाद रमजान में कोई दूसरा जुमा नहीं आता है, इसलिए अलविदा कहा जाता है।

 

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