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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रामगढ़ ताल क्षेत्र में स्थायी निर्माण रोकने को कहा

प्रदेश सरकार को तीन महीने में रामगढ़ ताल को वेटलैंड के रूप में चिन्हित करने का आदेश
गोरखपुर, 11 अगस्त। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ( एनजीटी ) ने उत्तर प्रदेश सरकार को रामगढ़ ताल को तीन महीने में वेटलैण्ड के रूप में चिन्हित और वर्गीकृत करने तथा इसके कैचमेंट एरिया ( प्रवाह क्षेत्र ) में किसी भी प्रोजेक्ट की स्वीकृति नहीं देने का आदेश दिया है। एनजीटी के इस आदेश के बाद रामगढ़ ताल क्षेत्र में बन रहीं आवासीय एवं व्यावसायिक योजनाओं पर ग्रहण लग सकता है।
एनजीटी ने यह आदेश गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रो राधेमोहन मिश्र की याचिका पर दिया है।
प्रो मिश्र ने एनजीटी ने याचिका दाखिल कर रामगढ़ ताल को वेटलैंड ( कन्जर्वेशन एंड मैनेजमेंट) रूल्स 2010 के तहत चिन्हित कर इसके दायरे में हो रहे स्थानी निर्माणों पर रोक लगाने की मांग की थी। उनकी याचिका को एनजटी ने स्वीकार करते हुए पिछले महीने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व सम्बन्धित विभागों को नोटिस जारी किया था।
नौ अगस्त को सुनवाई करते हुए एनजीटी ने कहा कि वेटलैंड ( कन्जर्वेशन एंड मैनेजमेंट ) रूल्स 2010 के अनुसार एक वर्ष के अन्दर राज्य सरकार को सभी वेटलैंड को चिंन्हित व वर्गीकृत कर इसी ब्रीफ डाक्यूमेंट तैयार कर सेंटल वेटलैंड रेगुलेटरी अथारिटी को सौंपना था लेकिन इस दिशा में कोई कार्य नहीं हुआ।
प्रो मिश्र के अधिवक्ता का कहना था कि रामगढ़ताल के प्रवाह क्षेत्र ( कैचमेंट एरिया )
में गोरखपुर विकास प्राधिकरण लगातार स्थायी निर्माण करा रहा है। दो दर्जन से अधिक आवासीय योजनाए इस क्षेत्र में स्थापित की गई हैं और की जा रही हैं। यही नहीं व्यावसायिक काम्पलेक्स भी बनाए जा रहे हैं जो वेटलैंड कन्जर्वेशन एंड मैनेजमेंट रूल्स 2010 के प्रावधानों के खिलाफ है।
याचिका की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश यूडी साल्वी और विशेषज्ञ सदस्य एआर युसूफ की कोर्ट ने यूपी सरकार को तीन महीने में रामगढ़ताल को वेटलैंड के रूप मंे चिन्हित व वर्गीकृत करने तथा इसका ब्रीफ डाक्यूमेंट सेंटल वेटलैंड रेगुलेटरी अथारिटी को देने का आदेश दिया। एनजटी ने यह भी आदेश दिया कि रामगढ़ ताल के कैचमेंट एरिया में किसी भी प्रोजेक्ट की अनुमति नहीं दी जाए और इस क्षेत्र में कपड़े धोने, वेस्ट मैटेरियल डम्प करने जैसी गतिविधियांें पर रोक लगायी जाए।
यहां उल्लेखनीय है कि चिन्हित वेटलैंड में पिछले दस वर्ष में उसके सबसे अधिक प्रवाह क्षेत्र तक में किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण प्रतिबंधित है। सिर्फ बोटिंग के लिए जेटी बनाए जा सकते हैं। यदि रामगढ़ ताल को वेटलैंड के तौर पर चिन्हित कर लिया गया तो इसके प्रवाह क्षेत्र में बने और बन रहे सभी स्थायी निर्माण अवैध हो जाएंगें। एनजीटी के इस आदेश के बाद रामगढ़ ताल क्षेत्र में बन रहीं आवासीय एवं व्यावसायिक योजनाओं पर ग्रहण लग सकता है।

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