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छत पर खेती हमारी खाद्य आवश्यकताओं के लिए अधिक टिकाऊ विकल्प है : डॉ. राजेंद्र हेगड़े

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गोरखपुर एनवायरन्मेन्टल एक्शन ग्रुप ने शहर में छत पर जैविक खेती पर कार्यशाला का आयोजन किया

गोरखपुर. गोरखपुर एनवायरन्मेन्टल एक्शन ग्रुप द्वारा शहर में छत पर जैविक खेती विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन आज जी0ई0ए0जी0 कार्यालय पर किया गया. कार्यशाला में प्रशिक्षक के रूप में बेंगलुरू के कृषि वैज्ञानिक डॉ0 बी0 एन0 विश्वनाथ एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ0 राजेंद्र हेगड़े ने जानकारी दी.

बेंगलुरू के कृषि वैज्ञानिक डॉ0 बी0 एन0 विश्वनाथ ने कहा कि शहरी खेती दुनिया भर में गति प्राप्त कर रही है। यद्यपि अवधारणा नई नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में अपना खुद का शुद्ध भोजन बढ़ाने के लिए जोर दिया गया है। शहरों में एक स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए इसके अलावा कुछ भी आवश्यक है। स्वस्थ भोजन विकसित करने, हमारे प्रकृति और पर्यावरण को पोषित करने के लिए शहरों के आस-पास और आसपास लागू किए जाने वाले प्रयासों को लागू करना और ताकि हमारे बच्चों और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जगह को जीवित रखा जा सके।

उन्होंने कहा कि सी0एस0ई0 द्वारा बेंगलुरु के 5 बाजारों के किये गये अध्ययन में निकला है कि विश्व स्वस्थ्य संगठन के मानक के विपरीत बहुत से खाद्य प्रदार्थो में 300 गुना तक जहरीले पदार्थो की मात्र है। इन्हीं सब को ध्यान में रखते हुए निम्न बिन्दुओं पर एक दिवसीय सघन कार्यशाला में  छत पर खेती की आवश्यकता, कार्बनिक सब्जियों की अवधारणा, कंटेनरों में बढ़ती सब्जियों के व्यवहार, अपशिष्ट पृथक्करण और घर पर कंपोस्टिंग, कंटेनर बागवानी में संयंत्र की देखभाल और छत बागवानी प्रथाओं का प्रदर्शन पर बातचीत की गई.

कृषि वैज्ञानिक डॉ0 राजेंद्र हेगड़े ने कहा कि शहरी खेती में छत पर खेती हमारे स्वास्थ्य की दिशा में एक सरल लेकिन निश्चित कदम है और अंतरिक्ष अनुमानों के बावजूद, हमारी खाद्य आवश्यकताओं के लिए एक अधिक टिकाऊ विकल्प है। छत पर खेती के माध्यम से हरियाली विकसित करें और शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण को कम करें। यह शारीरिक व्यायाम के लिए भी एक उपयुक्त जगह है। तीव्र शहरी जीवनशैली से आराम पाने और छत पर बढ़ते फसलों को देखकर असाधारण खुशी प्राप्त करने के लिए, घरेलू गीले अपशिष्ट को खाद में बदलने के लिए कुछ आवश्यक क्रियाऐं करनी जरूरी है।

अपने घर की छत में आप कुछ बदलाव करके इसे हरा-भरा बना सकती हैं। इसकी लागत भी बहुत अधिक नहीं है। आप अगर फ्लैट में रहते हैं और आपकी बालकनी का आकार ठीक-ठाक है, तो वहां भी गमले, छोटा सा टेबल, दो कुर्सी आदि लगा कर बैठने लायक जगह बनाया जा सकता है। घर का यह कोना आपको निश्चित तौर पर ढेर सारा सुकून देगा। आप छत पर टमाटर, भिंडी, बैंगन, पालक, धनिया, लहसुन, मुली, लौकी, गोभी, इत्यादि आसानी से लगा सकते है।
कीड़े-मकौड़ों से बचाव नियमित रूप से जैविक फर्टिलाइजर का उपयोग 15 से 30 दिनों तक करें। हर्बल नीम तेल का इस्तेमाल कीड़े-मकौड़ों भगाने के लिए नियमित रूप से दो-तीन महीने के अंतराल पर करें। छत की खेती में उपयोग होने वाली जैवकि खाद एवं जैविक फर्टिलाइजर को आप स्वयं घर पर बना सकते। जिससे आसानी से घर से निकलने वाले कूड़े कचरे का प्रबन्धन हो जायेगा।

अपने सपनों का गार्डन तैयार करने से पहले आप अपने छत को वॉटरप्रूफ यानी जलरहित बनाने की तैयारी करें। आपके छत का फ्लोर आपके गार्डेन की बेस के तहत काम करेगा। आप अपनी छत पर पौधे उगाने के लिए सीधे मिट्टी नहीं डाल सकते हैं। सबसे पहले आपको पक्की ईंट या जिस ईंट को मिट्टी पकाकर में पक्का किया जाता है, इसे छत पर पूरी बिछा दें। यह आम ईंटों से बेहतर होता है क्योंकि कच्ची ईंट पिघलकर निकासी में बाधा उत्पन्न करते है। उसके बाद इस पर वायर मेस बिछा दें। यह आपके मिट्टी को ईंटों के अंदर जाने से बचाता है। इससे छत भी खराब नहीं होगी और छत पर हरियाली बढ़ेगी। इसके अलावा आप छत पर गमलों में सब्जी की खेती कर सकते है।

छत की खेती में नियमित पानी देने से पहले पौधों को चेक करें। हर सुबह पौधों में पानी दें और सूरज की रोशनी के पास रख दें। पौधों की मिट्टी अगर गीली है तो पानी न दें। ज्यादा पानी से जड़ सड़ने लगती है। अगर आप नोटिस करते हैं कि पौधे सूख रहे हैं या पीले पड़ रहे है, तब आप पौधों को दिन भर के लिए घर के भीतर भी रख सकते हैं।

कार्यशाला में मुख्य रूप से डा0 शीराज़ वजीह, डा. एस.एस. वर्मा, वीके श्रीवास्तव, एमपी कंडोई, के.के.सिंह, निवेदिता मणि, डा0 सुमन सिन्हा, नितिन अग्रवाल, जितेन्द्र श्रीवास्तव, एजाज रिजवी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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