साहित्य - संस्कृति

‘ चम्पारण ने कहा है ’ : गांधी के सपनो का भारत नहीं बना

 

गोरखपुर। गांधी जयंती पर रूपान्तर नाट्य मंच ने दो अक्टूबर की शाम गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन में नाटक ‘ चम्पारण ने कहा है ’ का मंचन किया. युवा लेखक आनन्द पांडेय द्वारा लिखे गए इस नाटक की प्रस्तुति बेहद प्रभावशाली रही.

यह नाटक चम्पारण में गांधी के आंदोलन की पृष्ठिभूमि पर आधारित है. नाटक में दिखाया गया कि गांधी चम्पारण पहुंचते हैं और नीलहो और सरकार के उत्पीड़न से त्रस्त किसानों को एकजुट कर आंदोलन खड़ा करते हैं. साथ ही साथ वह स्कूल, शराब बंदी, स्वच्छता को लेकर भी कार्य करते हैं. उनका विश्वास है कि नीलहों की सोच में परिवर्तन होगा और वे किसानों का उत्पीड़न बंद कर देंगे लेकिन स्थानीय किसान नेता एवं लेखक पीर मुहम्मद मुनिस को इस बात पर संदेह है कि नीलहों का ह्दय परिवर्तन होगा. इस संदेह और अपने सवालों के साथ वह गांधी के साथ खड़े होते हैं.

आंदोलन सफल होता है और किसानों को नील की खेती की अनिवार्यता से मुक्ति मिलती है. गांधी लौट आते हैं लेकिन सरकार, सामंती ताकतें नए तौर तरीकों से किसानों का उत्पीड़न शुरू कर देते है. गांधी के सामाजिक प्रयोग भी वहां असफल साबित होते हैं. चम्पारण की सामाजिक, राजनीतिक व अर्थिक समस्याएं आज भी अनसुलझी हैं और उसे आज भी ‘ बापू ’ की तलाश है.

नाटक के अंत में बूढा किसान दिल्ली से आए दो लेखकों को फूल देते हुए कहता है कि वह उसे गांधी की प्रतिमा पर चढ़ा दें और गांधी से कहें कि उनके सपनों का भारत नहीं बना है जिसमें मजदूरों व किसानों का राज होना था. चम्पारण को आज भी गांधी की जरूरत है.

नाटक का निर्देशक वरिष्ठ रंग कर्मी अमल राय ने किया. इस नाटक के साथ ही उन्होंने 22 वर्ष बाद रंगमंच पर वापसी की.

गांधी की भूमिका अविनाश प्रताप शाही, पीर मोहम्मद मुनिस की भूमिका ऋषण पांडेय, ब्रजकिशोर की भूमिका निशिकान्त पांडेय ने निभाई. राजकुमार शुक्ल और बूढ़े आदमी की भूमिका में अपर्णेश मिश्र ने प्रभावशाली अभिनय किया. आदित्य राजन, रवि प्रताप सिंह, सुयश त्रिपाठी, शुभम कुलदीप, सनोज गौतम, आकाश गौड ने भी अपनी भूमिकाओं से न्याय किया.

प्रकाश व्यवस्था सुनील जायसवाल, रूप सज्जा दुर्गेश पांडेय व सुरभि अग्रवाल, वेषभूषा निशिकान्त पांडेय, देवयानी, ध्यनि व्यवस्था राजनाथ वर्मा की थी. आदित्य राजन व ऋषभ पांडेय ने नाटक के गीत गाए. रंगशाला प्रबंधन व अन्य जिम्मेदारियों में जितेन्द्र पांडेय, शरण मजूमदार, प्राची दूबे, पुरूषोत्तम पांडेय, डा. शैलेष श्रीवास्तव ने निभायी.

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