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दो माह से मानदेय ना मिलने से फीकी रहेगी शिक्षामित्रों की ईद

गोरखपुर, 15 जून । उत्तर प्रदेश में 170000 शिक्षामित्र समय से मानदेय ना मिलने से तंगहाली का जीवन व्यतीत कर रहे हैं. शिक्षामित्रों को दो माह का मानदेय नहीं मिल पाया है और 16 जून शनिवार को ईद त्योहार हैं जो शिक्षा मित्रों के लिए फीकी ही रहेगी । इसके पहले भी समय से मानदेय नहीं मिलने से शिक्षा मित्रों की होली ,दशहरा, दिवाली फीकी रही है.

अभी अपनी मांगों के संदर्भ में 1 जून से लखनऊ के इको गार्डन में शिक्षा मित्रों ने 13 दिन तक लगातार सत्याग्रह आंदोलन उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संयुक्त संघर्ष मोर्चा के संयोजक गाजी इमाम आला के नेतृत्व में किया. आंदोलन के कितेरहवें दिन संघर्ष मोर्चा के आठ सदस्यीय शिष्ट मंडलों से मुख्यमंत्री की वार्ता हुई जिसमें उन्होंने सहानुभूति प्रकट करते हुए उत्तराखंड ,मध्य प्रदेश, हरियाणा ,राजस्थान आदि प्रदेशों का कोई एक मॉडल उत्तर प्रदेश में लागू करने और शिक्षामित्रों का सम्मानजनक मानदेय देने की बात कही. लेकिन शिक्षा मित्रों को समय से वेतन न मिलने की समस्या बनी हुई है.

शिक्षा मित्र सुशील कुमार सिंह ने कहा कि 46 -47 डिग्री सेंटीग्रेड पर प्रदेश का शिक्षा मित्रों ने तपती दुपहरी में लखनऊ इको गार्डन में 13 दिन तक अनवरत धरना दिया । 4 दिन क्रमिक अनशन पर भी बैठा उसके पश्चात जो कुछ सरकार की तरफ से मिला वह सिर्फ कोरा आश्वासन ही मिला है । दो महीने में समस्याओं का हल निकालने का फिर वादा किया गया है अब देखने वाली बात होती है कि 2 महीने बाद शिक्षामित्रों की जिंदगी सुधरती है या पुनः लगभग 1 साल पहले वाली ही बात होगी.वादा करके अभी तक शासन प्रशासन द्वारा शिक्षामित्रों को दुख ही दिया गया है.

रविंद्र चौधरी का कहना है कि 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द किया गया तब से लगातार शासन से शिक्षामित्र अपनी समस्याओं से अवगत कराते रहें हैं ,लेकिन सरकार पूर्ववर्ती सरकारों का दोषारोपण करके सिर्फ गुमराह करती चली आ रही है.  इस बार की वार्ता में शिक्षामित्रों में एक आस जगी है. अगर सरकार शिक्षामित्रों के लिए कुछ नहीं करेगी तो शिक्षामित्र अवसाद मैं आकर कोई गलत कदम न उठाएं यह चिंता लगातार बनी रहती है ,क्योंकि अब तक समायोजन रद्द होने से प्रदेश में लगभग 600 शिक्षामित्रों की अवसाद में मौतें हो चुकी हैं और इन मौतों पर सरकार की चुप्पी अभी तक बनी है,  शोक संवेदना तक नहीं प्रकट किया गया है.

सुनील शर्मा कहते हैं कि पूर्ववर्ती सरकार में शिक्षा मित्रों का सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन हुआ. उनकी जिंदगी पटरी पर आ गई थी लेकिन समायोजन रद्द होने से सरकार 10,000 मानदेय मात्र 1 वर्ष में 11 माह का देना स्वीकार किया है । जून माह में शिक्षामित्रों का मानदेय नहीं मिलेगा । इस जून महीने में शिक्षा मित्रों का पेट कैसे भरेगा इस पर सरकार को सोचना होगा ।

अशोक चंद्रा का कहन है कि सरकार हर वक्त सुप्रीम कोर्ट से आए फैसले को अक्षरश: पालन करने की बात कहते चली आ रही है.  इस बीच शिक्षामित्रों के पक्ष में हाईकोर्ट का एक फैसला आया है जिसमें 38878 रुपए देने की बात कही गई है तो फिर इस फैसले को अक्षरश: सरकार क्यों नहीं मान रही है ? उत्तराखंड में अपने पद पर रहते हुए 4 साल में योग्यता पूरी करने का समय दिया गया है उसी को उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं सरकार लागू कर रही है ? मध्य प्रदेश में 285000 संविदा शिक्षकों का बेसिक शिक्षा में संविलियन करने का फैसला लिया है ,छत्तीसगढ़ में भी संविदा शिक्षकों के नियमित करने के पक्ष में वहां की सरकार ने निर्णय लिया है, फिर सबसे बड़ा प्रदेश उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों के बारे में सरकार क्यों नहीं सोच रही है ?

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