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देवदह के लिए अपनी कृषि भूमि छोड़ने को तैयार नहीं हैं किसान

किसान बोले : प्रशासन करेगा मनमानी तो होगा आंदोलन

लक्ष्मीपुर (महराजगंज), 6 नवम्बर. गौतम बुद्ध की ननिहाल कहे जाने वाले देवदह को विकसित करने के क्रम में शासन की ओर से धन स्वीकृत होने के बाद डीएम ने पुरातत्व विभाग से एनओसी मांगा है। जिसके क्रम में पुरातत्व विभाग ने देवदह का सीमांकन करना शुरू कर दिया जिसमें करीब 80 एकड़ जमीन किसानों की शामिल है जिसे किसी भी सूरत में छोड़ने के लिए किसान तैयार नहीं है। उनका कहना है कि यदि शासन – प्रशासन की ओर से मनमानी करने की कोशिश की गई तो किसान बृहद आंदोलन के लिए तैयार हैं।

वर्ष 1978 में देवदह की खुदाई के साथ ही पुरातत्व विभाग ने करीब 88 एकड़ जमीन देवदह के लिए संरक्षित कर लिया था। देवदह के विकास के लिए स्थानीय प्रतिनिधियों और बौद्ध अनुयायियों द्वारा लगातार शासन से मांग की जाती रही। इस पर बार्डर एरिया डवलपमेंट के तहत 24 लाख रुपये देवदह के तार और बाड़ के लिए स्वीकृत कर दिया गया। इस कार्य के लिए पुरातत्व विभाग की एनओसी की आवश्यकता होती है। डीएम की ओर से एनओसी मांगा गया तो पुरातत्व विभाग के अधिकारी देवदह आये और संरक्षित जमीन का सीमांकन किया गया। इसमें करीब 80 एकड़ जमीन किसानों की है जिसे छोड़ने के लिए वे किसी भी कीमत पर तैयार नहीं है।

किसानों ने शनिवार को सीमांकन के दौरान की गई निशानदेही को मिटा दिया और तो रविवार को बैठक कर जमीन नहीं छोड़ने का एलान किया. किसानों ने चेताया की यदि शासन – प्रशासन ने मनमानी करने की कोशिश की तो बृहद आंदोलन किया जाएगा।

किसानो के पक्ष में आये जनप्रतिनिधि

नौतनवा के पूर्व विधायक कौशल किशोर उर्फ मुन्ना सिंह ने लक्ष्मीपुर ब्लाक के बनरसिहां कला स्थित देवदह के मुद्दे पर कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए बुद्ध विहार का विकसित होना जरूरी है लेकिन इसके लिए किसानो की जमीन को जबरिया नहीं लिया जा सकता। किसानों के साथ खिलवाड़ नही होने दिया जाएगा। यदि विकास में किसानों की जमीन आड़े आती है तो किसानो के जमीन का बाजार भाव से चार गुना मुआवजा दिलाने की लड़ाई लड़ी जाएगी.
विधायक अमन मणि त्रिपाठी ने कहा कि बनरसिंहा कला के देवदह के विकास की बात है तो यह क्षेत्र का बहुप्रतीक्षित योजना है जो होना चाहिए। रही बात किसानों की जमीन का तो पहले उनको विधि सम्मत मुआवजा देने के बाद ही उनकी मर्जी से ही उनकी जमीन लिया जा सकता है।

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