गोरखपुर। लोकसभा चुनाव रमजान के बीच कराए जाने पर देश में कुछ विरोध के सुर उठे जरूर हैं लेकिन मुस्लिम समाज हैरान व परेशान बिल्कुल भी नहीं है। मुस्लिम समाज सशक्त सरकार के चुनाव के लिए लोकतंत्र के जश्न में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने की बात कर रहा है और अपने वोट की कद्रो कीमत समझ रहा है।

खोखरटोला की रहने वाली रेलवे कर्मचारी अजरा जमाल का कहना है कि यह चुनाव मुसलमानों की दशा व दिशा तय करने के लिए अहम साबित होगा। हमें पांच साल के लिए एक ऐसी सरकार चुननी है जो हमारे विकास के लिए काम करे। रमजान में चुनाव से थोड़ी दुश्वारी होगी। गर्मी तेज रहेगी। कतारों में खड़ा होना थोड़ा मुश्किल होगा। अगर चुनाव रमजान से पहले हो जाता तो बेहतर था। खैर। चुनाव आयोग अगर अल्पसंख्यकों की सहूलियत के लिए ऐसा कुछ इंतजाम कर दे ताकि शिद्दत की गर्मी में कतार में खड़े होने से निजात मिल जाये, कम से कम मुस्लिम महिलाओं व बुजुर्गों को। मुस्लिम समाज सुबह ही बूथ पर जल्द पहुंचकर वोट दे दें तो बेहतर है। रमजान के पाक महीने में हमें इबादत के साथ वोट देकर बेहतर काम को अंजाम देना है। महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारी रहेगी।

दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्षा डा. हुमा सब्जपोश के मुताबिक रमजान में चुनाव से मुस्लिम मतदान प्रतिशत में गिरावट आ सकती है। चुनाव आयोग रमजान से पहले चुनाव करवा लेता तो बेहतर था। खैर। हमें अपने वोट की कद्र करते हुए मतदान में हिस्सा जरूर लेना चाहिए। यह चुनाव हमारा मुस्तकबिल तय करेगा। मुस्लिम समाज अगर दुश्वारी से बचना चाहता है तो सुबह ही वोट करके अपनी जिम्मेदारी से फारिग हो जाएं। चुनाव आयोग को चाहिए कि बूथों पर तमाम तरह की सुविधाएं सभी को मुहैया करायी जाएं ताकि मतदान में किसी को भी किसी प्रकार की असुविधा न हो। वैसे रमजान में मुस्लिम समाज इबादत के साथ तमाम काम करता ही है। रमज़ान में मुस्लिम समाज जैसे अपने सारे कर्तव्यों को निभाता है वैसे ही मतदान के कर्तव्य को भी निभायेगा।

वोडाफोन के एरिया सेल्स मैनेजर रहमतनगर निवासी मो. आसिम अहमद ने कहा कि रमजान में चुनाव होने से मुस्लिम समाज को कोई असुविधा नहीं होगी। शहर में तो बूथ नजदीक होते हैं जाने आने की सुविधा रहती है। हां ग्रामीण क्षेत्रों में बूथ दूर बने रहते हैं वहां कुछ असुविधा हो सकती है। अब जो ऐलान हो चुका है उसे बदला तो नहीं जा सकता है, लेकिन चुनाव आयोग से गुजारिश की जा सकती है कि
मतदाताओं की सुविधा का ख्याल रखते हुए बूथों पर हर तरह की सुविधा मुहैया करवायी जाए। रोजेदार महिलाओं व बुजुर्गों को लाइन में खड़ा रहना ज्यादा दुश्वारियों भरा होगा, लिहाजा उनका ज्यादा ख्याल रखा जाए।

मदरसा अंजुमन इस्लामिया खूनीपुर के शिक्षक कारी नसीमुल्लाह ने कहा कि रमजान में चुनाव होने से मुसलमानों को काफी दिक्कत आयेगी। सरकारी मदरसा शिक्षकों को रोजा रखकर ड्यूटी देने में परेशानी होगी। वहीं रमजान में मदरसा शिक्षक देश के बड़े-बड़े शहरों में चंदे के लिए निकल जाते हैं। उन्हें असुविधा होगी। इन्हीं चंदों से मदरसों का साल भर का निजाम चलता है। तेज गर्मी में रोजा रखकर लाइन में खड़े होने से रोजेदार दो चार होंगे। वोटिंग पर भी असर पड़ सकता है। जो मदरसा शिक्षक ड्यूटी पर रहेंगे उनके सेहरी व इफ्तारी कैसे होगी। लिहाजा अगर मदरसा शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी में न लगाया जाए तो कुछ बेतहर रहेगा। वैसे लोकतंत्र के इस उत्सव में मुस्लिम समाज उत्साह से भाग लेगा। हमारा वोट कीमती है लिहाजा मतदान सभी करें। भले ही थोड़ी दुश्वारी झेलनी पड़े।

जामिया अल फलाह मॉडल स्कूल मोहरीपुर के प्रबंधक मौलाना मो. जहीर खां निजामी के मुताबिक रमजान में चुनाव से मतदान प्रतिशत घट भी सकता है और बढ़ भी सकता है। घट इसलिए सकता है कि मदरसों के शिक्षक रमजान में बड़े-बड़े शहरों में चले जाते हैं चंदे के लिए। रमजान में ही जकात सदका लोग निकालते हैं। चंदे से ही मदरसा चलता है। लिहाजा मदरसों के शिक्षकों को दुश्वारी होगी। वहीं सरकारी मदरसा शिक्षक रोजा रखकर चुनाव ड्यूटी कैसे कर पायेंगे। मतदान प्रतिशत बढ़ने की वजह उन्होंने बतायी कि रमजान माह में विदेश व दूर दराज काम करने वाले घर पर आ जाते हैं। मई में गर्मी शिद्दत की रहेगी। वोटिंग लाइन में मुस्लिम समाज को खड़े रहने में दिक्त होगी खासकर वृद्धों व महिलाओं को। वैसे चुनाव पांच साल में एक बार आता है। अत: हमें सशक्त सरकार चुनने के लिए वोट की कद्र करनी होगी और मतदान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना होगा।

दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता तौहीद जे. अहमद ने कहा कि अबकी बार लोकसभा चुनाव की तिथियां रमज़ान के माह में घोषित की गई हैं। मुस्लिम समाज इस माह में रोजे रखता है। रोजे की हालत में जला देनी वाली गर्मी में लाइन में खड़ा होकर अपनी बारी का इंतजार करना मुस्लिम मतदाताओं के लिए भारी चुनौती भरा होगा। चुनाव आयोग मतदान का प्रतिशत बढ़ाने हेतु समय-समय पर मतदाता जागरुकता अभियान चलाता रहता है। इस बार यदि मतदान का प्रतिशत कम होता है तो इसका कारण चुनाव आयोग द्वारा लिया गया यह फैसला हो सकता है।