गोरखपुर। मदरसों में नए सत्र की पढ़ाई मंगलवार से शुरु हो गई। पहले दिन छात्रों की तादाद कम रही। पहले दिन पहुंचे छात्रों के चेहरों पर खुशी थी। जहां बच्चों ने पढ़ाई की वहीं इंटरवल में पुराने सहपाठियों के साथ जमकर मस्ती भी की। शिक्षकोें ने भी उत्साह से शिक्षण कार्य शुरु किया। मदरसों में नया एडमिशन भी प्रारंभ हो चुका है। मदरसों में रौनक बढ़ गई है।
मदरसा जियाउल उलूम पुराना गोरखपुर गोरखनाथ के प्रधानाचार्य मौलाना नूरुज़्ज़मा मिस्बाही ने बताया कि मदरसे में पढ़ाई सुचारु रुप से शुरु हो गई है। पहले दिन के हिसाब से छात्रों की तादाद ठीक-ठाक रही। हाफिज व आलिम कोर्स की पढ़ाई भी जारी है। मदरसे में नया एडमिशन प्रारंभ हो चुका है। अबकी बार मदरसे के बच्चों को निशुल्क ड्रेस न मिलने की खबर से अफसोस हुआ है।
मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार के शिक्षक मुफ्ती अख्तर हुसैन ने बताया कि मदरसे में नए सत्र का पहला दिन उत्साहजनक रहा। लंबी छुट्टी के बाद मदरसे में एक बार फिर रौनक बढ़ गई है। टाइम टेबल के हिसाब से कक्षाओं का संचालन प्रारंभ हो चुका है। मदरसे के छात्रों को निशुल्क ड्रेस योजना से बाहर रखने की खबर पीड़ा दायक है।

जामिया रजविया मेराजुल उलूम चिलमापुर के शिक्षक मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने बताया कि मदरसे में नया सत्र शुरु होने से चहल पहल बढ़ गई है। पठन पाठन चालू हो गया है। एडमिशन भी प्रारंभ है। पहला दिन उत्साहजनक रहा।
जिले के 288 के करीब मदरसे मान्यता प्राप्त हैं। जिसमें दस अनुदानित हैं। सात मदरसों में मिनी आईटीआई योजना संचालित होती है।
“मदरसा आधुनिक शिक्षकों को करीब चार साल से नहीं मिला मानदेय
मंगलवार को मदरसों में नया सत्र प्रारंभ हो गया लेकिन मो. आसिफ, शबाना खातून, बदरे आलम अंसारी, मो. आज़म, नवेद आलम, गौसिया सुम्बुल, मो. इरफान, सैयद मेहताब अनवर सहित सैकड़ों आधुनिक विषय के शिक्षक मायूस नज़र आए।
मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत मदरसों में आधुनिक विषयों (विज्ञान, गणित, हिन्दी, अंग्रेजी, सा. विज्ञान) की शिक्षा देने वाले मदरसा शिक्षकों को करीब चार साल से मानदेय नहीं मिला है। केंद्र सरकार की यह योजना मदरसा शिक्षकों के लिए दुश्वारी का सबब बन गई है। कई शिक्षकों की आकस्मिक मौत भी हो चुकी है। शिक्षकों का परिवार एक-एक पैसे का मोहताज है।
जिले में करीब 160 से अधिक मदरसे आधुनिकीकरण योजना से आच्छादित हैं। योजना के तहत मदरसे में तीन शिक्षकों की नियुक्ति का प्राविधान है। स्नातक शिक्षक को छह हजार रुपया व परास्नातक शिक्षक को बारह हजार रुपया केंद्र सरकार मानदेय देती है। वहीं राज्य सरकार द्वारा क्रमश: दो व तीन हजार रुपया राज्यांश के तौर पर शिक्षकों को मिलता है। शिक्षकों का करीब साढ़े चार माह का राज्यांश भी बकाया है।