स्वास्थ्य

देवरिया में मच्छरों से बचाव के लिए सूअरबाड़ों में लग रहीं जालियां 

जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाव को लेकर सतर्क हुआ स्वास्थ्य विभाग

 एण्‍टी लार्वल दवा का छिड़काव व सूअरपालकों की हो रही काउंसिलिंग

देवरिया, इंसेफेलाइटिस से बच्‍चों की जान बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रयास जारी हैं.  जेई वायरस के संग्राहक सूअरों के बाड़ों को आबादी से दूर करने के साथ ही बाड़े को जाली से ढका जा रहा है. ताकि इन सूअरों को जेई वायरस के संवाहक मच्‍छर न काट सकें. जिले में कुल 350 सूअरबाड़े  हैं और सूअरों की संख्या 3500 है. इनपर विभाग के द्वारा कड़ी नजर रखी जा रही है.

मलेरिया अधिकारी सुधाकर मणि ने बताया कि सूअर इस बीमारी के मुख्य वाहक होते हैं. सूअर के शरीर में इस बीमारी के वायरस पनपते और फलते-फूलते हैं, और फिर मच्छरों द्वारा यह वायरस सूअर से मानव शरीर में पहुंच जाता है. धान के खेतों में पनपने वाले मच्छर जापानी इन्सेफेलाइटिस वायरस से संक्रमित होते हैं. यह वायरस दरअसल सेंट लुई एलसिफेसिटिस वायरस एंटीजनीक्ली से संबंधित एक फ्लेविवायरस है. जापानी एनसेफेलिटिस के वायरस का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं होता है. यह संक्रमित व्यक्ति के छूने आदि से नहीं फैलता. केवल सूअर  ही जापानी एनसेफेलिटिस वायरस को फैला सकते हैं. इसीलिए सूअरों पर विशेष नजर रखी जा रही है. इंसेफेलाइटिस प्रभावित गांवों के रूप में 200 गांवों को चिन्हित किया गया है. जहां बीमारी से लड़ने के लिए इंतजाम किया जा रहा है. साफ-सफाई को लेकर विभाग गंभीर है. सूअरों को आबादी से बाहर रखने का प्रयास किया जा रहा है. ताकि मच्‍छरों की पहुंच उनके पास तक न रहे. सूअरपालको की व्‍यवसाय बदलने के लिए काउन्सिलिंग की जा रही है. इसमें स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के साथ ही पशु चिकित्‍सा विभाग और मुख्‍य विकास अधिकारी कार्यालय समन्वित रूप से प्रयास कर रहा है. जब तक उनका व्‍यवसाय  नहीं बदल जाता है, तब तक सूअरों को सुरक्षित करने के प्रयास निरन्‍तर जारी हैं.

जांच के लिए बरेली भेजा जाता है सूअरों का सीरम 

संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग डॉ  केपी यादव ने बताया कि जेई में सूअर की सहभागिता को देखते हुए विभाग पूरी तरह से संवेदनशील है. हर माह 20 सूअरों का सीरम जांच के लिए बरेली भेजा जाता है. सूअरपालकों  और उनके पास मौजूद सूअरों की पूरी सूची तैयार की गई है. सूअरबाड़ों को मच्‍छरदानी लगाकर पूरी तरह सुरक्षित किया जा रहा है. साथ ही साथ बाड़ों को आबादी से दूर कराया जा रहा है. वहां पर स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के सहयोग से एण्‍टी लार्वल दवा का छिड़काव भी कराया जा रहा है. ताकि मच्‍छरों के जरिए सूअरों के शरीर में संग्रहित वायरस इंसानों में न पहुंचें.

 

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