स्वास्थ्य

देवरिया में  ब्लड सैंपल के लिए रात में घरों पर दस्तक दे रही मलेरिया टीम

देवरिया में अभियान के दौरान मरीजो का ब्लड सैंपल लेते स्वास्थ्यकर्मी

 

-जनपद के 8 संवेदनशील इलाकों में किया जा रहा नाइट ब्लड सर्वे

-चार सदस्यीय टीमों को 500-500 स्लाइड बनाने का लक्ष्य

देवरिया ।

रात आठ बजते ही मलेरिया विभाग की टीमें संवेदनशील इलाकों के लिए निकल जाती है। इन टीमों को 25 जनवरी तक नाइट ब्लड सर्वे करना है ताकि फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को रफ्तार मिल सके। जिले के कुल आठ संवदेनशील इलाके हैं, जहां सर्वे चलाया जा रहा है। 18 जनवरी से चल रहे इस सर्वे में अब तक 2000 लोगों के ब्लड सैंपल लिए जा चुके हैं। टीमों को 4000 स्लाइड बनाने का लक्ष्य मिला है।
सीएमओ डॉ डीबी शाही ने बताया मलेरिया विभाग राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को लेकर नाइट ब्लड सर्वे कर रहा है। जिले के गरूलपर, रामनाथ देवरिया, लार, भागलपुर, पथरदेवा, भाटपाररानी, भलुअनी, भटनी सहित 8 स्थानों को इसके लिए चुना गया है। इन स्थानों पर नाइट ब्लड सर्वे के लिए चार सदस्यों वाली 8 टीमें लगाई गई हैं। बायोलाजिस्ट डॉ वीके सोनी की अगुवाई में रामनाथ देवरिया में एलटी धर्मेंद्र,राकेश कुमार मल्ल, फाइलेरिया इन्स्पेक्टर अनिल पांडेय और की टीम निकलती है। बायोलाजिस्ट डॉ वीके सोनी बताते हैं कि सबेरे टीम का एक सदस्य इलाके के किसी संभ्रांत व्यक्ति या सभासद से मिलकर अभियान की जानकारी दे देता है। रात आठ बजे टीम का मूवमेंट होता है। फिर लोगों को घरों से निकालकर ब्लड सैंपल लिए जाते हैं। फाइलेरिया के विषय में जानकारी भी दी जाती है। सर्दी के मौसम में इस तरह से कई मुश्किलें आती है। वहीँ गरुलपार में लैब असिस्टेंट (एलए) ओपी मणि , एलए उमाशंकर शुक्ल, अजय प्रताप कनौजिया और राकेश कुमार की टीम रात में ब्लड सैंपल लेती है। ओपी मणि बताते हैं कि प्रतिदिन उनकी टीम रात आठ बजे गरुलपार पहुंच जाती है। रात में ही टीम के सदस्य मोहल्ले में भ्रमण करते हैं। संभ्रांत व्यक्तियों से मदद लेते हैं और गली-गली से लोगों को एकत्र कर ब्लड सैंपल लेते हैं। लोगों को फाइलेरिया के विषय में भी समझाया जाता है।

25 जनवरी तक चलेगा अभियान

मलेरिया अधिकारी सीपी मिश्रा ने बताया वर्तमान में जिले में 2369 फाइलेरिया के मरीज हैं, जिनका इलाज चार रहा है। 18 जनवरी से चल रहे इस सर्वे में अब तक 2000 लोगों के ब्लड सैंपल लिए जा चुके हैं। नाइट ब्लड सर्वे अभियान संवेदनशील गरुलपार, रामनाथ देवरिया, लार, भागलपुर, पथरदेवा, भाटपाररानी, भलुअनी, भटनी में 25 जनवरी तक चलेगा। अभियान के दौरान चिन्हित इलाके में 500-500 स्लाइड बनाई जा रही है, जो जांच के लिए भेजी जाएंगी।

फाइलेरिया के बारे में जाने

• फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है।
• व्यक्ति किसी भी उम्र में फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है।
• फाइलेरिया के लक्षण हाथ-पैर में सूजन व हाइड्रोसील है।
• एमडीए दवा फाइलेरिया के परजीवी को मार देती है और हाथी पांव व हाइड्रोसील जैसी बीमारी से बचाने में मदद करती है।
• दो साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्तियों के अलावा यह दवा सभी को खानी है।
• दवा उम्र एवं ऊंचाई के आधार पर दी जाएगी। खाली पेट दवा नहीं खानी है। स्वास्थ्य कर्मियों के सामने ही दवा खाना जरूरी है।
• दवा खाने के बाद मरते हुए परजीवियों की प्रतिक्रिया स्वरूप कभी-कभी शरीर और सिर में दर्द, बुखार, उल्टी, बदन पर चकत्ते एवं खुजली जैसी मामूली दिक्कतें हो सकती हैं। जो अपने आप ठीक हो जाती हैं।

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