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लाकडाउन से बेपरवाह रोहुआ गांव में खुलेआम कच्ची शराब की महफिल जम रही

गोरखपुर। कोरोना महामारी के कारण हुए देशव्यापी लाकडाउन के बीच गोरखपुर जिले का एक गांव ऐसा है जहां कच्ची शराब बनाने का धंधा बेखौफ चल रहा है और कच्ची शराब पीने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं।

यह गांव है रोहुआ ग्राम सभा। चार टोलो में बंटा यह गांव गोरखपुर के चिलुवाताल थाना क्षेेत्र में आता है। मजनू में पुलिस चौकी भी स्थापित है। यह गांव कच्ची शराब के लिए काफी समय से चर्चित है। कच्ची शराब के धंधे को लेकर मजनू पुलिस चौकी के दो इंचार्ज पूर्व में निलम्बित हो चुके हैं। कच्ची शराब के अवैध कारोबार की शिकायत करने पर यहां के ग्राम प्रधान को छह महीने पहले पीट दिया गया था।

कोरोना महामारी को रोकने के लिए घोषित देशव्यापी लाकडाउन के चलते हर तरह की गतिविधियां ठप पड़ी हैं लेकिन इस गांव में कच्ची शराब का बनना बंद नहीं हुआ है। इस गांव के कई युवकों ने 26 मांर्च को गोरखपुर न्यूज लाइन से सम्पर्क कर बताया कि यहां पर बेखौफ होकर कच्ची शराब बनायी जा रही है जिसका सेवन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं।

युवकों द्वारा भेजी गयी तस्वीर में साफ दिख रहा है कि बड़ी संख्या में लोग कच्ची शराब के ठेके पर जुटे हैं और शराब पी रहे हैं। शराब पीने के लिए लोग दूर-दूर गांवों से आ रहे हैं और वे इस बात से भी बेपरवाह हैं कि भीड़ में एक दूसरे के सम्पर्क में आने से उन्हें कोरोना विषाणु का संक्रमण हो सकता है।

मिली जानकारी के अनुसार गांव में आधा दर्जन स्थानों पर कच्ची शराब बनायी और बेची जा रही है। इसकी जानकारी गांव के कुछ लोगों ने पुलिस को दी। आज शाम छह बजे कुछ पुलिस कर्मी गांव आए लेकिन उनके आने के पहले शराब बनाने के ठेके अचानक बंद हो गए थे। पुलिस कर्मी निरीक्षण कर चले गए। उसके बाद फिर ये ठेके आबाद हो गए।

गांव के लोगों का कहना है कि स्थानीय पुलिस के संरक्षण के कारण कच्ची शराब के कारोबारियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। कच्ची शराब के कारोबार का विरोध करने पर वे हमला कर देते हैं। इसलिए लोग चुप रहना बेहतर समझते हैं।

1 Comment

  • तथ्यपरक रिपोर्ट के लिए साधुवाद।
    जग जाहिर है पुलिस और कच्ची शराब ठेकेदार का गठजोड़। प्रशासन इस गठजोड़ को अब तक नहीं तोड़ पाया है। इसके पीछे की एक बड़ी वजह पुलिस प्रशासन की वसूली, मुनाफाखोरों की मुनाफाखोरी। इसकी आड़ में समाज में फैल रहा यह व्यसन।
    पुलिस और प्रशासन को राजनीतिज्ञों का संरक्षण। इस तरह की अपार अवैध कमाई का चुनाव में उपयोग।
    वर्षों से इसी दुष्चक्र में फंसी हुई है जनता।

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