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कारपोरेट हित को साधने वाला बजट है : डॉक्टर चतुरानन ओझा

गोरखपुर। समान शिक्षा आंदोलन के डॉक्टर चतुरानन ओझा ने कहा है कि केन्द्रीय बजट पीपीपी के सहारे झूठी उम्मीद की बात करने वाला बजट है। यह जनता के साथ धोखाधड़ी का और कारपोरेट हित को साधने वाला बजट है। इसमें ना पिछले बजट का कोई मूल्यांकन है और ना आगामी वर्ष का स्पष्ट लेखा जोखा है। यह बजट मोदी के मन की बात /भाषण का ही विस्तारित रूप है। इसमें भक्तों की मरी हुई आत्मा में भी कोई स्पंदन पैदा करने की सामर्थ्य नहीं है जिससे वे अपना भजन जारी रख सकें।

बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में डॉ ओझा ने कहा कि सरकार के पिछले सात बजट का हिसाब करके हम उसके खोखलेपन , धोखाधड़ी को देख सकते हैं। दरअसल इनका हर बजट और इनकी हर घोषणा अब इस बात की पुष्टि करती है कि यह सरकार कहलाने और सरकार में बने रहने लायक नहीं हैं। जवाबदेह व्यवस्था और जवाबदेह सरकार के लिए सरकार के नाम पर चल रहे कारपोरेट के गिरोह का सत्ता से खदेड़ा जाना जरूरी है। डिजिटल विश्वविद्यालय के भरोसे शिक्षा और क्रिप्टो करेंसी के भरोसे अर्थव्यवस्था चलाने वाली इन हवाई बातों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता ।

उन्होंने कहा कि इन अंग्रेजी बोलने वालों को अंग्रेजी देशों की तरह मुफ्त शिक्षा, चिकित्सा और प्रत्येक व्यक्ति के लिए न्यूनतम आय सुनिश्चित करने वाला बजट पेश करना चाहिए। इस बजट के स्थान पर उन्हें पिछले बजट का हिसाब किताब और अगले एक साल के आय-व्यय की मुकम्मल तस्वीर रखनी चाहिए थी लेकिन अपनी बदनीयति के चलते यह सरकार यह सब करने में असमर्थ है।

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