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 लॉकअप में दलित युवक की मौत की उच्चस्तरीय जांच हो -भाकपा (माले) 

लखनऊ। भाकपा (माले) के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने आजमगढ़ जिले के तरवां थाने के लॉकअप में 22 वर्षीय दलित युवक सन्नी कुमार की मौत की घटना में मृतक के गांव उमरी पट्टी का दौरा कर पीड़ित परिवार से भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने परिवार से शोक संवेदना व्यक्त की और तथ्य जुटाए।

भाकपा (माले) के राज्य समिति सदस्य विनोद सिंह के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने दौरे से लौटकर अपनी रिपोर्ट को आज जारी करते हुए कहा कि कानून के राज की जगह प्रदेश में जंगल राज है। आजमगढ़ की घटना से पहले बस्ती जिले में हिरासत में पुलिस की पिटाई से नाबालिग की मौत हुई। धन उगाही, फर्जी मुठभेड़ और थाने में लोगों की पीट कर हत्या करना आम बात हो गई है‌। युवक सन्नी की हत्या भी इसी की एक कड़ी है। योगी की पुलिस बेलगाम है। भाजपा राज में दलित सर्वाधिक असुरक्षित हैं। हाल ही में प्रतापगढ़ में 22 वर्षीय दलित युवती की रेप के बाद हत्या हो चुकी है।

प्रतिनिधिमंडल ने मृतक सन्नी की मां कुसुम, परिजनों और मौके पर उपस्थित गांव के लोगों से बात की। मां ने बताया कि सन्नी बनारस में रह कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था और इधर छुट्टी पर घर आया था। सन्नी के गांव के एक दोस्त ने एक लड़की का जिक्र करते हुए सन्नी से कहा कि तुमसे बात करने के लिए लड़की ने मेरे मोबाइल पर मैसेज किया है। इसके पहले भी इस मामले में लड़की के पिता ने थाने में तहरीर दी थी। सन्नी को माफी मांगनी पड़ी थी। उसके बाद सुलह-समझौता हुआ था और मामला समाप्त हो गया था।

सुलह हो जाने के बाद भी लड़की उससे क्यों बात करना चाहती है, इससे चिढ़कर सन्नी ने फोन मिलाया और अपनी मां व लड़की के पिता से शिकायत भी की। प्रतिक्रिया स्वरुप लड़की के पिता ने एसपी आजमगढ़ से शिकायत की। इसके बाद तरवां थाने की पुलिस 29 मार्च को 2 बजे दिन में आई और पूछताछ के नाम पर सन्नी को उठा ले गई। सन्नी को दो दिन थाने में रखा गया। 31 मार्च की भोर में ग्राम प्रधान द्वारा सूचना मिली कि सन्नी नहीं रहा। घर के लोग थाने पहुंचे, तो पता चला कि उसकी लाश थाने से पोस्टमार्टम हाउस गई है।

माले प्रतिनिधिमंडल से मृतक की मां ने कहा कि सन्नी ने आत्महत्या नहीं की। पुलिस ने उसकी हत्या की है और फंसने के डर से पुलिस ने आनन-फानन में बिना परिजनों को बताए लाश को पोस्टमार्टम के लिए आजमगढ़ भेजवा दिया। निष्पक्ष जांच हो, तो सब सामने आ जायेगा। दोषी पुलिसकर्मियों को दंड मिलना चाहिए और हमें न्याय।

परिजनों ने बताया कि सन्नी के पिता हरिकांत राम मुंबई में रह कर काम धंधा करते हैं। उनसे तरवां थाने की पुलिस ने पैसे की डिमांड की थी। वह रुपए देने के लिए तैयार भी थे और मुंबई से चले भी। अभी वे रास्ते में ही थे कि तब तक सन्नी की पुलिस लॉकअप में मौत हो गयी।

भाकपा (माले) प्रतिनिधिमंडल ने घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने, थाना प्रभारी सहित मामले में लिप्त पुलिसकर्मियों को हत्या के आरोप में जेल भेजने, इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कारगर उपाय करने, मृतक के परिवार को त्वरित न्याय, पर्याप्त मुआवजा व एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की।

तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में भाकपा (माले) नेता वसंत प्रसाद और सुदर्शन शामिल थे।

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