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आशा कर्मियों ने प्रदर्शन कर कहा -हक मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा

इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन संबद्ध ऐक्टू के राज्यव्यापी आह्वान पर सात अगस्त को प्रयागराज में आशा कर्मियों ने सीएमओ कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन कर अपनी मांगों के सम्बन्ध में आवाज बुलंद की और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।

आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस ( ऐक्टू) के प्रदेश सचिव कामरेड अनिल वर्मा ने बजट में आशा कर्मियों की अनदेखी और वर्षों से कराई जा रही बेगार , प्रोत्साहन राशियों में हेर फेर, करोड़ों रुपए की भुगतान के नाम पर जबरन वसूली की चर्चा की। उन्होंने उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के राज्य व्यापी प्रतिवाद दिवस पर लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने पर पुलिस द्वारा पीलीभीत जिलाध्यक्ष और आशाकर्मियों के विरुद्ध कूट रचित ढंग से विभिन्न धाराओं में मुकदमा लिखे जाने की कार्यवाही की निंदा करते हुए कहा कि श्रम की लूट और भ्रष्ट्राचार पर रोक लगाने के बजाय सरकार दमन पर उतर आई है।

उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन की जिलाअध्यक्ष आशा ने कहा कि आशा वर्कर्स वर्षों से दो हजार रुपए में पूरे साल , जाड़ा,गर्मी, बरसात , रात,दिन विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में लगी रहती हैं । उनके योगदान का सरकार कोई मूल्यांकन नहीं करना चाहती ।
विगत वर्षों में किए गए कई तरह के कामों की घोषित प्रोत्साहन राशियों का भुगतान लंबित है, इस 1. 5 लाख करोड़ का प्रोत्साहन राशि घोटाले और आशा कर्मियों से उनके भुगतान के बदले धमका कर साल भर में 1000 करोड़ की वसूली के विरुद्ध वर्षों से आंदोलनरत हैं। पर सरकार इसे सुनना नही चाहती।

आशा वर्कर्स यूनियन के जिला सचिव मंजू ने कहा कि 2013 में हुए भारतीय श्रम सम्मेलन ने आशा कर्मियों को स्वास्थ्य कर्मी का दर्जा देकर न्यूनतम वेतन व मातृत्व अवकाश दिए जाने की सिफारिश की थी। वर्ष 2017 में स्वयं मोदी जी की अध्यक्षता में हुए भारतीय श्रम सम्मेलन ने ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेडूटी देने की सिफारिश की  किंतु दोनों श्रम सम्मेलनों की सिफारिशें कूड़ेदान में फेंक दी गई तथा आशा कर्मियों को जान लेवा काम के बोझ के नीचे दबा दिया गया। आज वे संगठित होकर सरकार के वास्तविक चेहरे को बेनकाब कर रही हैं, अपने श्रम की लूट के खिलाफ आवाज उठा रही हैं, भ्रष्ट्राचार के विरुद्ध मोर्चा खोल रही हैं तो उन्हें डराने और चुप कराने की कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में लखीमपुर में अधीक्षक द्वारा आशा के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले को दंडित करने,45/ 46 वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करते हुए न्यूनतम वेतन ईएसआई,ईपीएफ , ग्रेड्यूटी,मातृत्व अवकास, स्वास्थ्य व जीवन बीमा देने के साथ काम की सीमा तय करते हुए विगत वर्षों का सम्पूर्ण बकाया भुगतान किये जाने की मांग की गई है।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से ऐक्टू जिला सचिव देवानंद, आशा वर्कर्स की जिला उपाध्यक्ष रंजना भारतिया, संगीता सिंह, रेखा श्रीवास्तव, मीना कुशवाहा, अनुपा, ललिता सोनी, सावित्री, रागिनी, रूपा, प्रतिमा तिवारी, प्रीति मिश्रा, फूला देवी कंचन, ऊषा, सुप्रिया, मंजू, भाकपा माले के जिला प्रभारी सुनील मौर्य आदि ने भाग लिया।

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