गोरखपुर। दो माह से लापता ईंट भट्ठा मजदूर सुभाष चंद्र यादव की सकुशल वापसी की मांग को लेकर भाकपा माले द्वारा परिजनों और ग्रामवासियों को साथ लेकर चलाए जा रहे आंदोलन से दबाव में आई पुलिस ने छह अगस्त को एफआईआर दर्ज कर लिया। पुलिस ने ईंट भट्ठा मालिक अनिरुद्ध साधवानी, गोरख मुंशी और कंश मुंशी के खिलाफ गंभीर चोट पहुँचने की धमकी देते हुए अपराध कारित करने, जानबूझ कर अपमानित करने और हत्या का केस दर्ज किया है।
ईंट भट्ठा मजदूर सुभाष चंद्र यादव पिपराइच थाना क्षेत्र के लहूरादेऊर गाँव के रहने वाले थे। वे जंगल औराही गाँव स्थित मोती मार्का ईंट भट्ठा पर काम कर रहे थे। सुभाष यादव की पत्नी प्रभावती देवी द्वारा पुलिस को दिए गए तहरीर में कहा गया था कि उनके पति हर सप्ताह घर आते थे लेकिन जब वह कई हफ्ते नहीं आए तो वह ईंट भट्ठे पर पहुंची तो उन्हे स्पष्ट जवाब देने के बजे कहा गया कि सुभाष को मार कर ईंट भट्ठे में फेंक दिया है।
प्रभावती पति के गायब होने के बारे में एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस और अफसरों के पास गई लेकिन उसे सिर्फ आश्वासन मिला। ज्ञापन देने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हुआ तो भाकपा माले नेताओं ने आंदोलन शुरू किया। धरना-प्रदर्शन के बाद लहुरादेव गाँव के पंचायत भवन पर 30 जुलाई से धरना शुरू किया गया जो छह दिन बाद चार अगस्त को भूख हड़ताल में तब्दील हो गया। परिजन और ग्रामवासी ईंट भट्ठा मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और सुभाष की सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे थे।
भाकपा माले के वरिष्ठ नेता राजेश साहनी, विनोद भारद्वाज, राज्य कमेटी की सदस्य मनोरमा चौहान ने बताया कि छह अगस्त की रात 11 बजे पिपराइच थाना प्रभारी भठ्ठा मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसकी कॉपी लेकर धरना स्थल पर भेजा। इसके बाद भूख हड़ताल स्थगित करने का निर्णय लिया गया। कॉमरेड राजेश साहनी ने कहा कि हमारे आंदोलन की आंशिक जीत हुई है। आंदोलन के बल पर दमनकारी तानाशाही सरकार कार्यवाही करने पर मजबूर हुई है। अब अभियुक्तों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आगे बढ़ा जायेगा।
