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“ 50 प्रतिशत आरक्षण की बाध्यता को समाप्त किए बगैर सामाजिक न्याय नहीं हो सकता ”

गोसाईं की बाजार (आजमगढ़)। राष्ट्रीय ओबीसी दिवस/मण्डल दिवस पर साथ अगस्त को सामाजिक न्याय आंदोलन द्वारा गोसाईं की बाजार आजमगढ़ मे ” मण्डल अधूरा क्यों, जातिगत जनगणना, मतदाता और नागरिकता तथा आरक्षण का सवाल ” विषय पर  विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि 7 अगस्त 1990 को 27 प्रतिशत आरक्षण लागू होने क़े बावजूद आज तक पूर्ण रूप से 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ पिछडी जातियों को नहीं मिला है। क्रीमीलेयर की बाध्यता और 50 प्रतिशत आरक्षण की बाध्यता को समाप्त किए बगैर सामाजिक न्याय नहीं हो सकता। सरकार जातिगत जनगणना की बात कहकर जिस तरह बिहार में मतदाता सूची से नाम काट रही है उसका शिकार दलित और पिछड़े ही होंगे।

वक्ताओं ने कहा कि आजादी क़े बाद लम्बे संघर्षो क़े बाद मिले आरक्षण पर सवाल करने वालों को बताना चाहिए कि वह कौन सी प्रक्रिया है जिसके तहत सदियों से जन्म और जाति क़े आधार पर भेदभाव क़े शिकार 85 प्रतिशत जनता को उसके अधिकार मिलेंगे। महिला आरक्षण में कोटे में कोटा और निजी क्षेत्र में आरक्षण को लागू करना होगा। बहुजन समाज को बांटने के लिए पिछड़ों में कोटे में कोटा और अब दलितों में उपवर्गीकरण की साजिश हो रही है।

गोष्ठी को किसान नेता राजीव यादव, सत्यम प्रजापति, किसान एकता समिति के महेंद्र यादव, रामदुलार राम, कामरेड बसंत, वरुण कुमार, हरेंद्र, कवि श्याम नारायण ने सम्बोधित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ राजेंद्र यादव ने और अध्यक्षता रामसूरत यादव ने किया।

गोष्ठी में डॉ. आर. पी. प्रजापति, राम शब्द राम, श्याम सुंदर मौर्य, विनोद यादव, नंदलाल यादव, इलियास, इरशाद, जयराम, हरिराम बीडीसी, रमेश कुमार, अवधेश यादव, जयहिंद राम, दुर्गा यादव आदि लोग शामिल रहे।

 

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