गोरखपुर। अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा और भाकपा माले द्वारा चरगाँवा ब्लॉक के ग्राम जंगल पकड़ी में जन सम्मेलन का आयोजन कर भूमिहीन और गरीबों को वास-आवास के लिए जमीन देने, उन पर माइक्रोफाइनेंस कंपनियों सहित सभी प्रकार के कर्ज की माफ़ी के सवाल को उठाया गया।
जन सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए भाकपा माले राज्य स्थाई समिति सदस्य राजेश साहनी ने कहा कि जनता के बुनियादी सवालों को ब्लॉक/जिला और प़ंदेश तक का राजनीति का सवाल बनाना होगा। मौजूदा सरकार जनता के बुनियादी सवालों की अनदेखी कर रही है। ऐसे में जनता के वास आवास व कर्ज माफी के लिए डबल इंजन की सरकार को उखाड़ फेंकना आवश्यक है।
भाकपा माले के जिला सचिव राकेश सिंह ने कहा कि डबल इंजन की सरकार को उखाड़ फेककर ही बुनियादी सवालों को हल करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

सम्मेलन में प्रस्ताव पारित कर मांग की गई है कि नामी गिनामी कंपनियों को गांव की सीलिंग, बंजर, परती, आबादी आदि की जमीन देने की नीति वापस ली जाए और यह जमीन भूमिहीन गरीबों को बसाने, अस्पताल, स्कूल बारात भवन आदि के लिए सुरक्षित किया जाय। अंधाधुंध विकास के नाम पर बिना पुनर्वास/ व्यवसाय की व्यवस्था किये गरीबों को उजाड़ना बंद किया जाए, माइक्रो फाइनेंस कंपनियो, बैंकों, निजी सूदखोरों द्वारा गरीबों को दिए गए दो लाख तक के सभी कर्ज माफ किया जाए, गरीबो को कर्ज के लेनदेन में आरबीआई गाइडलाइन का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, बिजली के निजीकरण पर रोक लगाई जाए, स्मार्ट मीटर योजना बंद की जाए, गरीबों का बिजली बिल माफ कर 200 यूनिट बिजली फ्री की जाए। सहारा इंडिया की विभिन्न योजनाओं में जमा गरीबों का पैसा ब्याज सहित वापस की जाए।
सम्मेलन में मनरेगा में वर्ष भर काम देने, अकुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित दैनिक मजदूरी 783 रुपए मनरेगा सहित प्रत्येक कार्य में दिया जाए। इसके अलावा प्राइमरी स्कूलों के मर्जर, मदरसों के ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई।
सम्मेलन की अध्यक्षता भाकपा माले राज्य कमेटी की सदस्य मनोरमा चौहान ने और संचालन अ.भा. खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा के जिला सचिव विनोद भारद्वाज ने किया।
सम्मेलन को जैनुल अंसारी, सुभाष चंद्र पाल,सलवेदा खातून, लालचंद यादव,रामसहायी निषाद, रामानंद निषाद, आदि ने संबोधित किया।
