गोरखपुर। चार अक्टूबर से शुरू हुई ‘ बुद्ध की नदी रोहिन के साथ यात्रा’ ‘ चरथ भिक्खवे-2 ’ में देश के जाने-माने कवि, कथाकार, चित्रकार, शिक्षाविद भाग ले रहे हैं।
यात्रा के संयोजक ‘ प्रेमचंद साहित्य संस्थान ‘ के निदेशक और बीएचयू के हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे प्रो सदानंद शाही ने बताया है कि ‘ साखी शोध कार्यशाला , वाराणसी’ द्वारा आयोजित इस यात्रा में शिक्षाविद प्रो चन्द्रकला पाडिया (वाराणसी), आनन्द रूप और अर्पिता घोष (कोलकाता), आलोचक प्रो रघुवंश मणि (फैजाबाद), कवि पंकज चतुर्वेदी (कानपुर) , डॉ विहाग वैभव ( वाराणसी), शिवांगी गोयल (प्रयागराज), ओंकार सिंह (महराजगंज), अनुवादक यादवेन्द्र (पटना) , प्रो पृथ्वी राज सिंह ( छपरा ), डॉ रामसुधार सिंह (वाराणसी), अक्षत (वाराणसी), पत्रकार मनोज सिंह ( गोरखपुर) भाग ले रहे हैं। प्रो राजेश मल्ल, पत्रकार अशोक चौधरी, डॉ संजय श्रीवास्तव कई स्थानों पर यात्रा में शामिल हुए।
उन्होंने बताया है कि यात्रा का प्रारंभ 4 अक्टूबर को पूर्वाह्न 11 बजे गोरखपुर के खजांची चौराहे से हुआ । यहाँ से यात्री लुम्बिनी गए। लुम्बिनी और कपिलवस्तु के भ्रमण के बाद रोहिन नदी के उद्गम स्थान नेपाल के देवदह (रामग्राम के कॉलियों का एक प्रमुख नगर) के साथ यात्रा शुरू हुई । यात्रा 7 अक्तूबर की सुबह भारतीय सीमा में प्रवेश कर मिश्रवलिया स्थित रोहिन बैराज से नदी के किनारे-किनारे चलते हुए लक्ष्मीपुर होते हुए समरधीरा पहुंची। समरधीरा में जाने माने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ आर एन सिंह ने यात्रियों का स्वागत किया। ग्रामीणों से संवाद के बाद यात्रा चानुकीघाट होते हुए काँधपुर दर्रा वनग्राम पहुंची। यहाँ वनटाँगिया समुदाय के लोगों के साथ रोहिन नदी के साथ यात्रा हुई। वनटाँगिया समुदाय के लोगों ने नदी कटान से हो रहे विस्थापन के बारे में जानकारी दी।
महिलाओं ने गीतों के जरिए वनटाँगिया समुदाय के संघर्ष को बयान किया। काँधपुर दर्रा से चौक स्थित रामग्राम उत्खनन स्थल के अवलोकन के बाद यात्रा रोहिन नदी तीनमुहानी घाट होते हुए भौरवारी पहुंची। यहाँ नदी तट पर कविता पाठ हुआ। दोपहर में यात्री दौलतपुर वनटाँगिया गाँव पहुंचे जहां बातचीत के बाद सभी ने एक साथ भोजन किया।

यात्रा 10 और 11 अक्तूबर को कुशीनगर, मगहर के साथ -साथ बुद्ध के जीवन से जुड़ी नादियों कुकत्था, हिरण्यवती, आमी, राप्ती नदी के साथ यात्रा जारी रहेगी। डोमिनगढ़ में रोहिन नदी के राप्ती नदी से मिलन स्थल पर भ्रमण के बाद यात्रा के समापन के मौके पर 12 अक्टूबर को पूर्वाह्न 11 बजे से गोरखपुर के रामगढ़ ताल स्थित बौद्ध संग्रहालय में संगोष्ठी और बुद्ध के जीवन , मूल्य और दर्शन से सम्बंधित कविता – पाठ का आयोजन होगा।
प्रो चंद्रकला पाडिया की अध्यक्षता में आयोजित इस समापन समारोह का उद्घाटन प्रो हरीश त्रिवेदी करेंगे । इसमें कथाकार रणेंद्र और इतिहासकार डॉ रमाशंकर सिंह के भी व्याख्यान होंगे । भोजन सत्र के बाद हिन्दी के प्रतिष्ठित कवियों-पंकज चतुर्वेदी, रमाशंकर सिंह, प्रकाश उदय, विहाग वैभव, अष्टभुजा शुक्ल, अनंत मिश्र, देवेन्द्र आर्य, स्वप्निल श्रीवास्तव, रघुवंश मणि, अनिल कुमार सिंह, यादवेन्द्र, अरविन्द त्रिपाठी, कपिल देव, राजेश मल्ल, वीरेंद्र मिश्र दीपक, प्रमोद कुमार, श्रीधर मिश्र, अर्पण कुमार, सरवत जमाल, जयप्रकाश नायक, रंजना जायसवाल, वंदना शाही, शिवांगी गोयल, सुनीता अबाबील, धर्मेन्द्र त्रिपाठी कविता करेंगे।

प्रो शाही ने बताया है कि ‘ चरथ भिक्खवे ’ की शुरुआत पिछले वर्ष 15-24 अक्टूबर 2024 को बौद्ध स्थलों के भ्रमण से हुई थी । यह यात्रा सारनाथ से बोधगया, नालंदा, राजगीर, वैशाली, कुशीनगर, लुम्बिनी, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, कौशाम्बी होते हुए सारनाथ पर सम्पन्न हुई थी। ‘ चरथ भिक्खवे ‘ की पृष्ठभूमि में ‘बुद्ध की धरती पर कविता ’ शीर्षक यात्रा- कुशीनगर (2019), लुम्बिनी (2020),बोधगया (2022), सारनाथ(2023) और कुशीनगर (2023) है।

उन्होंने कहा कि बुद्ध के वैराग्य के मूल में रोहिन नदी के जल को लेकर शाक्य और कोलिय लोगों के बीच होता आया विवाद था। पालि ग्रंथ में इसके प्रमाण मौजूद हैं। रामग्राम के कोलिय और कपिलवस्तु के शाक्यों के बीच रोहिन के पानी के लिए युद्ध की नौबत आ गयी थी, जिसे बुद्ध ने संवाद और पंचायत के जरिए रोका। ‘ चरथ भिक्खवे-2 ‘ में रोहिन नदी के तट की यात्रा का मकसद बुद्ध के महाभिनिष्क्रमण के पीछे की इस सच्चाई को जानना और इसे लोगों तक पहुंचाना, नदियों के साथ बुद्ध के रिश्ते को समझना, नदियों के हवाले से देश के सांस्कृतिक भूगोल को जानना और भारत-नेपाल मैत्री को मजबूत करना है।
